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जमीन की धोखाधड़ी में तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज
Updated Sat, 18 Nov 2017 02:02 AM IST
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हल्द्वानी। मुखानी पुलिस ने जमीन के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी के मामले में डेवलपर सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि पौने पांच लाख रुपये देने के बावजूद आरोपियों ने जमीन की रजिस्ट्री नहीं की और भुक्तभोगी को परेशान किया। पुलिस इस मामले की विवेचना कर रही है।
पिथौरागढ़ जिले के भैंसकोट मुनस्यारी निवासी नरेंद्र सिंह शाही ने डीआईजी को जमीन की धोखाधड़ी के मामले में प्रार्थनापत्र दिया था। शिकायत थी कि रुद्रपुर स्थित ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड के डेवलपर रामाकर ठाकुर ने ए आर विलास के नाम से कमलुआगांजा में प्रोजेक्ट प्रारंभ किया। उद्देश्य था कि वह रिहायशी भवनों का निर्माण कर उनकी बिक्री करेगा। इस मामले में उसने समाचार पत्रों में विज्ञापन भी जारी किया। प्रोजेक्ट से प्रभावित होकर उसने विला नंबर 27 इकतीस लाख में बुक कराया। तय राशि में एक लाख 75 हजार रुपये 26 जून 15 को स्टेट बैंक के बताए गए खाते में जमा किया। इसके बाद उसे ओपीसी की तरफ से एक रसीद जारी की गई। इसके बाद रामाकर के कहने पर उसने तीन लाख रुपये स्टेट बैंक के खाते में फिर जमा किया। पैसा जमा होने पर कंपनी के मैनेजर सीपी बेलवाल ने उसका ऋण स्वीकृत किया। कुछ कागजातों पर दस्तखत कराने के बाद अभिलेख तैयार किए गए। बताया गया कि उसे नौकरी पर रखा गया है। कुछ दिनों बाद मैनेजर ने नौकरी से निकालने का फरमान सुनाया। कंपनी के फरमानों को सुनकर भुक्तभोगी ने रामाकर से पैसा वापस करने के लिए दबाव बनाया। इस बीच उसको चेक प्रदान किया गया लेकिन चेक का बैंक में भुगतान नहीं हो सका। डीआईजी के निर्देश पर एसआईटी ने जांच किया। काफी दिनों बाद भुक्तभोगी को जमीन पर मालिकाना हक भी नहीं मिल सका। जांच में प्राथमिक तौर पर आरोप सही मिलने पर एसआईटी प्रभारी ने मुखानी पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। मुखानी थानाध्यक्ष कमाल हसन ने बताया कि इस मामले में रामाकर ठाकुर के साथ उसके दो सहयोगियों कमलुवागांजा निवासी सीपी बेलवाल और रुद्रपुर निवासी रोहन भटनागर के खिलाफ पुलिस धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। रामाकर मूल रूप से बिहार का निवासी बताया जा रहा है। उसके खिलाफ पहले से एक अन्य मुकदमा चल रहा है। पुलिस की तलाश के बावजूद उसका पता नहीं चल सका है।
पिथौरागढ़ जिले के भैंसकोट मुनस्यारी निवासी नरेंद्र सिंह शाही ने डीआईजी को जमीन की धोखाधड़ी के मामले में प्रार्थनापत्र दिया था। शिकायत थी कि रुद्रपुर स्थित ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड के डेवलपर रामाकर ठाकुर ने ए आर विलास के नाम से कमलुआगांजा में प्रोजेक्ट प्रारंभ किया। उद्देश्य था कि वह रिहायशी भवनों का निर्माण कर उनकी बिक्री करेगा। इस मामले में उसने समाचार पत्रों में विज्ञापन भी जारी किया। प्रोजेक्ट से प्रभावित होकर उसने विला नंबर 27 इकतीस लाख में बुक कराया। तय राशि में एक लाख 75 हजार रुपये 26 जून 15 को स्टेट बैंक के बताए गए खाते में जमा किया। इसके बाद उसे ओपीसी की तरफ से एक रसीद जारी की गई। इसके बाद रामाकर के कहने पर उसने तीन लाख रुपये स्टेट बैंक के खाते में फिर जमा किया। पैसा जमा होने पर कंपनी के मैनेजर सीपी बेलवाल ने उसका ऋण स्वीकृत किया। कुछ कागजातों पर दस्तखत कराने के बाद अभिलेख तैयार किए गए। बताया गया कि उसे नौकरी पर रखा गया है। कुछ दिनों बाद मैनेजर ने नौकरी से निकालने का फरमान सुनाया। कंपनी के फरमानों को सुनकर भुक्तभोगी ने रामाकर से पैसा वापस करने के लिए दबाव बनाया। इस बीच उसको चेक प्रदान किया गया लेकिन चेक का बैंक में भुगतान नहीं हो सका। डीआईजी के निर्देश पर एसआईटी ने जांच किया। काफी दिनों बाद भुक्तभोगी को जमीन पर मालिकाना हक भी नहीं मिल सका। जांच में प्राथमिक तौर पर आरोप सही मिलने पर एसआईटी प्रभारी ने मुखानी पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। मुखानी थानाध्यक्ष कमाल हसन ने बताया कि इस मामले में रामाकर ठाकुर के साथ उसके दो सहयोगियों कमलुवागांजा निवासी सीपी बेलवाल और रुद्रपुर निवासी रोहन भटनागर के खिलाफ पुलिस धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। रामाकर मूल रूप से बिहार का निवासी बताया जा रहा है। उसके खिलाफ पहले से एक अन्य मुकदमा चल रहा है। पुलिस की तलाश के बावजूद उसका पता नहीं चल सका है।
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