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डीएनए के चलते शव की हुई शिनाख्त
Updated Wed, 18 Apr 2018 02:21 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। शीशमहल नहर से बरामद जिस शव की शिनाख्त करने से एक व्यक्ति ने इनकार कर दिया था वह उसी के बेटे का निकला। डीएनए रिपोर्ट में यह साबित हुआ है। पिता ने हत्या का आरोप लगाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि मौत पानी में डूबने से हुई थी। मौत से पहले युवक ने अपने भाई से फोन पर बात की थी।
मल्ला ब्यूरा निवासी महेंद्र बिष्ट (34) पुत्र लक्षम सिंह 31 जुलाई 2017 को घर से लापता हो गया था। परिजनों ने इस मामले में हत्या की आशंका जताते हुए काठगोदाम पुलिस को तहरीर दी थी। परिजनों ने इस घटना को लेकर जिला पुलिस से लेकर मुख्यमंत्री तक पैरवी की थी। पुलिस ने पांच अगस्त 2017 को शीशमहल स्थित नहर से एक शव बरामद किया। पुलिस ने लक्षम सिंह को बुलाया लेकिन उन्होंने कहा कि शव उनके बेटे का नहीं है। शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस अधिकारी भी परेशान हो गए। पुलिस ने मौके से एक मोबाइल बरामद किया था। इस मोबाइल से महेंद्र ने अपने बड़े भाई मनमोहन सिंह बिष्ट से बातचीत की थी। तीन दिन तक परिजनों को मोर्चरी में बुलाने के बाद पुलिस ने शव की अज्ञात में अंत्येष्टि करवा दी थी।
मुकदमा दर्ज होने पर एसएसपी ने जांच की जिम्मेदारी काठगोदाम चौकी प्रभारी दान सिंह मेहता को दी। लक्षम सिंह ब्लड का सैंपल देने के लिए तैयार नहीं थे। शक के आधार पर पुलिस ने उन्हें किसी प्रकार मनाकर उनका ब्लड सैंपल लिया और डीएनए जांच के लिए देहरादून भेज दिया। देहरादून से डीएनए जांच की रिपोर्ट मंगलवार को काठगोदाम पुलिस को मिली। जांच रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि नहर से बरामद लाश लक्षम सिंह के बेटे महेंद्र की थी। पिता पुत्र का ब्लड ग्रुप मैच कर गया है। प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर ली है।
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31 जुलाई 2017 को लापता युवक की नहर में डूबने से हुई थी मौत
पिता ने शिनाख्त करने से इनकार कर हत्या का लगाया था आरोप
जायदाद में हिस्सा मांग रहा था महेंद्र
पुलिस के अनुसार महेंद्र अपने पिता और भाई से जायदाद में हिस्सा मांग रहा था। पुलिस का कहना है कि परिवार के लोग इस कारण हिस्सा देने को तैयार नहीं थे कि वह शराब पीकर संपत्ति बर्बाद कर देगा।
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मल्ला ब्यूरा निवासी महेंद्र बिष्ट (34) पुत्र लक्षम सिंह 31 जुलाई 2017 को घर से लापता हो गया था। परिजनों ने इस मामले में हत्या की आशंका जताते हुए काठगोदाम पुलिस को तहरीर दी थी। परिजनों ने इस घटना को लेकर जिला पुलिस से लेकर मुख्यमंत्री तक पैरवी की थी। पुलिस ने पांच अगस्त 2017 को शीशमहल स्थित नहर से एक शव बरामद किया। पुलिस ने लक्षम सिंह को बुलाया लेकिन उन्होंने कहा कि शव उनके बेटे का नहीं है। शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस अधिकारी भी परेशान हो गए। पुलिस ने मौके से एक मोबाइल बरामद किया था। इस मोबाइल से महेंद्र ने अपने बड़े भाई मनमोहन सिंह बिष्ट से बातचीत की थी। तीन दिन तक परिजनों को मोर्चरी में बुलाने के बाद पुलिस ने शव की अज्ञात में अंत्येष्टि करवा दी थी।
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मुकदमा दर्ज होने पर एसएसपी ने जांच की जिम्मेदारी काठगोदाम चौकी प्रभारी दान सिंह मेहता को दी। लक्षम सिंह ब्लड का सैंपल देने के लिए तैयार नहीं थे। शक के आधार पर पुलिस ने उन्हें किसी प्रकार मनाकर उनका ब्लड सैंपल लिया और डीएनए जांच के लिए देहरादून भेज दिया। देहरादून से डीएनए जांच की रिपोर्ट मंगलवार को काठगोदाम पुलिस को मिली। जांच रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि नहर से बरामद लाश लक्षम सिंह के बेटे महेंद्र की थी। पिता पुत्र का ब्लड ग्रुप मैच कर गया है। प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर ली है।
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31 जुलाई 2017 को लापता युवक की नहर में डूबने से हुई थी मौत
पिता ने शिनाख्त करने से इनकार कर हत्या का लगाया था आरोप
जायदाद में हिस्सा मांग रहा था महेंद्र
पुलिस के अनुसार महेंद्र अपने पिता और भाई से जायदाद में हिस्सा मांग रहा था। पुलिस का कहना है कि परिवार के लोग इस कारण हिस्सा देने को तैयार नहीं थे कि वह शराब पीकर संपत्ति बर्बाद कर देगा।