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डाक्टर ने तीमारदार को अनायास पीटा बुजुर्ग को ढकेला
Updated Fri, 29 Sep 2017 02:13 AM IST
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में एक बार फिर बखेड़ा हो गया। इस बार डॉक्टरों ने 12 साल के मरीज के तीमारदार को पटककर पीट दिया। बचाव में आई बुजुर्ग महिला से अभद्रता कर धक्का दे दिया। इससे वार्ड में अफरातफरी मच गई। हंगामे के बाद भी डॉक्टरों पर रहम नहीं आया। उन्होंने बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया।
ओखलकांडा निवासी नीमा ने सातवीं में पढ़ने वाले अपने बेटे करन (12) को बुखार और उल्टी होने पर एसटीएच में भर्ती कराया था। बृहस्पतिवार को पाल कॉलेज के पास रहने वाले दुकानदार गुणवंत करन का उसका हालचाल जानने के लिए आए थे। आरोप है कि वहां आए डॉक्टर अचानक गुणवंत को डांटने लगे। डॉक्टर का कहना था कि उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक से उनकी शिकायत की है। गुणवंत ने इस बारे में अनभिज्ञता जताई तो आरोप है कि उनके साथ आए जूनियर डॉक्टरों ने गुणवंत को पीट दिया। इस बीच प्रशिक्षु डॉक्टर भी आ गए। उन्होंने भी पिटाई कर दी। गुणवंत बार-बार गुहार लगाते रहे मगर उनकी किसी ने नहीं सुनी। वहां मौजूद करन की नानी लक्ष्मी हाथ जोड़कर डॉक्टरों से माफी मांगती रही मगर उसे भी धक्का दे दिया। इससे वार्ड में भर्ती मरीज दहशत में आ गए। उनके तीमारदार भी बीच बचाव को पहुंचे। लक्ष्मी का कहना था कि बच्चा एक सप्ताह से भर्ती है। कभी किसी डॉक्टर से ऊंची आवाज में बात नहीं की। आज अचानक क्या हो गया वह नहीं समझ पा रही है। इसके बाद गुस्साए डॉक्टरों ने बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया। नहीं चाहते हुए भी गरीब महिला अपने बच्चे को लेकर चली गई। मेडिकल चौकी पुलिस तब अस्पताल पहुंची जब बच्चा और उसके परिजन जा चुके थे।
चिकित्सा अधीक्षक की दलीलें
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके पांडे का कहना है कि गुणवंत तीन चार लोगों के साथ गया था। उस समय डाक्टर अशोक वार्ड में जूनियर के साथ मरीजों को देखने गए थे। डॉक्टर के बार-बार अनुरोध करने पर तीमारदार वार्ड से बाहर नहीं निकले। इसी दौरान झगड़ा हो गया था। हालांकि मरीज के परिजन इस दलील को नकार रहे हैं। उनका कहना था कि गुणवंत अकेले देखने आए थे। बच्चे की मां नीमा का कहना है कि इस मामले में वह पुलिस से न्याय की गुहार लगाएगी।
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ओखलकांडा निवासी नीमा ने सातवीं में पढ़ने वाले अपने बेटे करन (12) को बुखार और उल्टी होने पर एसटीएच में भर्ती कराया था। बृहस्पतिवार को पाल कॉलेज के पास रहने वाले दुकानदार गुणवंत करन का उसका हालचाल जानने के लिए आए थे। आरोप है कि वहां आए डॉक्टर अचानक गुणवंत को डांटने लगे। डॉक्टर का कहना था कि उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक से उनकी शिकायत की है। गुणवंत ने इस बारे में अनभिज्ञता जताई तो आरोप है कि उनके साथ आए जूनियर डॉक्टरों ने गुणवंत को पीट दिया। इस बीच प्रशिक्षु डॉक्टर भी आ गए। उन्होंने भी पिटाई कर दी। गुणवंत बार-बार गुहार लगाते रहे मगर उनकी किसी ने नहीं सुनी। वहां मौजूद करन की नानी लक्ष्मी हाथ जोड़कर डॉक्टरों से माफी मांगती रही मगर उसे भी धक्का दे दिया। इससे वार्ड में भर्ती मरीज दहशत में आ गए। उनके तीमारदार भी बीच बचाव को पहुंचे। लक्ष्मी का कहना था कि बच्चा एक सप्ताह से भर्ती है। कभी किसी डॉक्टर से ऊंची आवाज में बात नहीं की। आज अचानक क्या हो गया वह नहीं समझ पा रही है। इसके बाद गुस्साए डॉक्टरों ने बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया। नहीं चाहते हुए भी गरीब महिला अपने बच्चे को लेकर चली गई। मेडिकल चौकी पुलिस तब अस्पताल पहुंची जब बच्चा और उसके परिजन जा चुके थे।
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चिकित्सा अधीक्षक की दलीलें
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके पांडे का कहना है कि गुणवंत तीन चार लोगों के साथ गया था। उस समय डाक्टर अशोक वार्ड में जूनियर के साथ मरीजों को देखने गए थे। डॉक्टर के बार-बार अनुरोध करने पर तीमारदार वार्ड से बाहर नहीं निकले। इसी दौरान झगड़ा हो गया था। हालांकि मरीज के परिजन इस दलील को नकार रहे हैं। उनका कहना था कि गुणवंत अकेले देखने आए थे। बच्चे की मां नीमा का कहना है कि इस मामले में वह पुलिस से न्याय की गुहार लगाएगी।
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