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झिरना, कालागढ़ में अब नहीं होगी घुसपैठ
Updated Wed, 24 Oct 2018 01:48 AM IST
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रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के सबसे संवेदनशील जोन झिरना, कालागढ़ में अब घुसपैठ करना आसान नहीं होगा। सीटीआर ने पियर टू पियर (पी2पी) नेटवर्किंग से सभी स्वचालित कैमरों को जोड़ दिया है। यदि किसी ने घुसपैठ की तो तत्काल फोटो खिंचकर रेंजर तक पहुंच जाएगा, जिससे घुसपैठ करने वाले की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
झिरना, कालागढ़ जोन जिला बिजनौर की सीमा से लगे हैं और इन क्षेत्रों से अक्सर घुसपैठ होती है। लकड़ी तस्करी समेत वन्यजीवों के शिकार की भी सूचनाएं मिलती हैं। कार्रवाई से बचने के लिए कई बार घुसपैठिए इन जोनों में लगे कैमरा ट्रैपों को तोड़ देते थे, जिसकी वजह से घुसपैठ करने वालों की शिनाख्त नहीं हो पाती थी। इस समस्या से निपटने के लिए सीटीआर प्रशासन ने झिरना, कालागढ़ में पी2पी नेटवर्किंग से कैमरा ट्रैप लगा दिए हैं। इस तकनीक से यदि किसी घुसपैठिए की फोटो खिंचती है तो वह एक कैमरे से दूसरे कैमरे में होकर संबंधित जोन के रेंजर तक पहुंच जाएगी। सभी कैमरे संबंधित जोन के रेंजर या वन चौकी से संचालित होंगे। यह व्यवस्था कालागढ़, झिरना के उन स्थानों पर होगी, जहां पर सिग्नल नहीं आते हैं। जिन इलाकों में नेटवर्क रहेगा, वहां जीएसएम कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे।
कैमरा ट्रैप से खिंचते ही रेंजर के पास पहुंचेगी फोटो
पियर टू पियर नेटवर्किंग से जुड़े से सभी कैमरे
झिरना, कालागढ़ जोन में पी2पी, जीएसएम कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। जंगल में घुसपैठ करने वाले तस्करों की फोटो तत्काल खिंचकर संबंधित जोन के रेंजर के पास पहुंचेगी। इससे संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वन विभाग कार्रवाई कर सकेगा।
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- अमित वर्मा, उप निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर।
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झिरना, कालागढ़ जोन जिला बिजनौर की सीमा से लगे हैं और इन क्षेत्रों से अक्सर घुसपैठ होती है। लकड़ी तस्करी समेत वन्यजीवों के शिकार की भी सूचनाएं मिलती हैं। कार्रवाई से बचने के लिए कई बार घुसपैठिए इन जोनों में लगे कैमरा ट्रैपों को तोड़ देते थे, जिसकी वजह से घुसपैठ करने वालों की शिनाख्त नहीं हो पाती थी। इस समस्या से निपटने के लिए सीटीआर प्रशासन ने झिरना, कालागढ़ में पी2पी नेटवर्किंग से कैमरा ट्रैप लगा दिए हैं। इस तकनीक से यदि किसी घुसपैठिए की फोटो खिंचती है तो वह एक कैमरे से दूसरे कैमरे में होकर संबंधित जोन के रेंजर तक पहुंच जाएगी। सभी कैमरे संबंधित जोन के रेंजर या वन चौकी से संचालित होंगे। यह व्यवस्था कालागढ़, झिरना के उन स्थानों पर होगी, जहां पर सिग्नल नहीं आते हैं। जिन इलाकों में नेटवर्क रहेगा, वहां जीएसएम कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे।
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कैमरा ट्रैप से खिंचते ही रेंजर के पास पहुंचेगी फोटो
पियर टू पियर नेटवर्किंग से जुड़े से सभी कैमरे
झिरना, कालागढ़ जोन में पी2पी, जीएसएम कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। जंगल में घुसपैठ करने वाले तस्करों की फोटो तत्काल खिंचकर संबंधित जोन के रेंजर के पास पहुंचेगी। इससे संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वन विभाग कार्रवाई कर सकेगा।
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- अमित वर्मा, उप निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर।