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कोवाक्सिन सिर्फ दूसरी डोज लगाने वालों के लिए ही उपलब्ध
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प्रतीकात्मक।
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हल्द्वानी। जनपद में टीकाकरण अभियान जारी है। अब तक जनपद में 86.6 प्रतिशत लोगों को टीके की पहली डोज लग चुकी है हालांकि दूसरी डोज लगाने वालों का प्रतिशत अभी काफी कम है। इधर, काफी समय से कोवाक्सिन की पहली डोज अब नहीं आ रही, जिससे कोवाक्सिन की डोज लगाने वाले निराश हैं हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोविशील्ड की डोज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग के 6 सितंबर तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 87.9 प्रतिशत लोगों को पहली डोज लग चुकी है, जबकि दूसरी डोज 28.4 प्रतिशत लोगों को ही लगी है। नैनीताल जनपद में 86.6 प्रतिशत को पहली, 30.2 प्रतिशत को दूसरी डोज लगी है।
कुमाऊं के अन्य जनपदों पर देखा जाए तो एक मात्र बागेश्वर जिला 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन कर चुका है। हालांकि दूसरी डोज लगाने वालों का प्रतिशत भी यहां 43.7 प्रतिशत ही है। चंपावत में पहली डोज 90.2 और दूसरी 34.5 प्रतिशत को लगी है। अल्मोड़ा में 89 प्रतिशत को पहली डोज, 36.1 प्रतिशत को दूसरी, पिथौरागढ़ में 86.3 प्रतिशत को पहली, 31.3 प्रतिशत को दूसरी डोज, ऊधमसिंह नगर में 80.7 प्रतिशत को पहली और 17.4 प्रतिशत को ही दूसरी डोज लगी है।
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इधर, एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि कोविशील्ड की 90 हजार डोज और कोवाक्सिन की दूसरी डोज के लिए 15850 डोज उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि कोवाक्सिन नहीं आने की वजह से वर्तमान में कोविशील्ड की डोज लगाई जा रही है।
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स्वास्थ्य विभाग के 6 सितंबर तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 87.9 प्रतिशत लोगों को पहली डोज लग चुकी है, जबकि दूसरी डोज 28.4 प्रतिशत लोगों को ही लगी है। नैनीताल जनपद में 86.6 प्रतिशत को पहली, 30.2 प्रतिशत को दूसरी डोज लगी है।
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कुमाऊं के अन्य जनपदों पर देखा जाए तो एक मात्र बागेश्वर जिला 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन कर चुका है। हालांकि दूसरी डोज लगाने वालों का प्रतिशत भी यहां 43.7 प्रतिशत ही है। चंपावत में पहली डोज 90.2 और दूसरी 34.5 प्रतिशत को लगी है। अल्मोड़ा में 89 प्रतिशत को पहली डोज, 36.1 प्रतिशत को दूसरी, पिथौरागढ़ में 86.3 प्रतिशत को पहली, 31.3 प्रतिशत को दूसरी डोज, ऊधमसिंह नगर में 80.7 प्रतिशत को पहली और 17.4 प्रतिशत को ही दूसरी डोज लगी है।
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इधर, एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि कोविशील्ड की 90 हजार डोज और कोवाक्सिन की दूसरी डोज के लिए 15850 डोज उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि कोवाक्सिन नहीं आने की वजह से वर्तमान में कोविशील्ड की डोज लगाई जा रही है।