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Nainital News: अवैध खड़िया खनन मामले में जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त
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नैनीताल। बागेश्वर की कपकोट तहसील में अवैध रूप किए जा रहे खड़िया खनन के मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट ने कमिश्नर को नियुक्त किया है। कोर्ट ने पूर्व में लगाई गई रोक को जारी रखते हुए राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) को भी पक्षकार बनाया है। राज्य सरकार, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य को जांच में कोर्ट कमिश्नर की सहायता करने के लिए भी कहा गया है। कोर्ट कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट फरवरी तक पेश करनी होगी।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ में हुई। पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि भविष्य में इस क्षेत्र में कोई खनन पट्टा जारी न किया जाए। सुनवाई के दौरान पट्टेधारकों की ओर से कहा गया कि किसी भी तरह की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है। वे निर्धारित शर्तों के अनुरूप ही खनन कार्य कर रहे हैं। 2020 में भी इसकी जांच उपजिला अधिकारी व भू-राजस्व अधिकारी की ओर से की गई थी, जिसमें कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह जांच 2020 में हुई थी लेकिन 2022 में शर्तों का उल्लंघन हुआ है।
यह है याचिका
बागेश्वर के हीरा सिंह पपोला ने जनहित याचिका दायर में कहा कि कपकोट के रिमाघाटी, गुलामप्रगड और भीयूं गांव में सरकार की ओर से खनन पट्टा दिया गया है। कारोबारी की ओर से मानक से अधिक खनन किया जा रहा है। इस प्रकार के अवैध खनन को बाहर ले जाने के लिए वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से सड़क भी बना ली गई है। अंधाधुंध हो रहे खनन के चलते गांव के जलस्रोत सूखने की कगार पर पहुंच चुके है। याचिकाकर्ता का कहना था कि अवैध रूप से किए जा रहे खनन से होने वाले दुष्प्रभाव से गांव को बचाया जाए।
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इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ में हुई। पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि भविष्य में इस क्षेत्र में कोई खनन पट्टा जारी न किया जाए। सुनवाई के दौरान पट्टेधारकों की ओर से कहा गया कि किसी भी तरह की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है। वे निर्धारित शर्तों के अनुरूप ही खनन कार्य कर रहे हैं। 2020 में भी इसकी जांच उपजिला अधिकारी व भू-राजस्व अधिकारी की ओर से की गई थी, जिसमें कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह जांच 2020 में हुई थी लेकिन 2022 में शर्तों का उल्लंघन हुआ है।
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यह है याचिका
बागेश्वर के हीरा सिंह पपोला ने जनहित याचिका दायर में कहा कि कपकोट के रिमाघाटी, गुलामप्रगड और भीयूं गांव में सरकार की ओर से खनन पट्टा दिया गया है। कारोबारी की ओर से मानक से अधिक खनन किया जा रहा है। इस प्रकार के अवैध खनन को बाहर ले जाने के लिए वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से सड़क भी बना ली गई है। अंधाधुंध हो रहे खनन के चलते गांव के जलस्रोत सूखने की कगार पर पहुंच चुके है। याचिकाकर्ता का कहना था कि अवैध रूप से किए जा रहे खनन से होने वाले दुष्प्रभाव से गांव को बचाया जाए।
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