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सहकारिता मंत्री को किसान की खुदकुशी का पता नहीं, कहा-पिछले साल हुई होगी मौत

Sun, 18 Jun 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल। 
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल।  Updated Sun, 18 Jun 2017 11:56 PM IST
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Cooperative minister does not know the suicide of the farmer
dhan singh rawat - फोटो : amarujala

बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुभानअल्लाह। प्रदेश की भाजपा सरकार इस कहावत को चरितार्थ करती प्रतीत हो रही है। बेड़ीनाग में कर्ज में डूबे किसान की आत्महत्या के मामले में बेतुका बयान देकर पहले मुख्यमंत्री फंसे थे। अब प्रदेश के उच्च शिक्षा और सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत कह रहे हैं कि मामले का उन्हें पता नहीं, शायद किसान ने पिछले साल आत्महत्या की हो।

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रविवार को यहां पहुंचे मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में जब यह सवाल उठा तो उन्होंनेे अनभिज्ञता जताते हुए चौंका दिया। उच्च शिक्षा मंत्री का कहना था कि किसान की आत्महत्या की उन्हें जानकारी नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री के यह हाल तब है जबकि प्रदेश में कांग्रेस हाल ही में बेरीनाग में एक किसान की आत्महत्या के मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश में है।
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कांग्रेस हर दिन इस मामले को लेकर जिलों में प्रदर्शन कर रही है और प्रदेश सरकार को कोस रही है। आलम यह भी है कि इसी मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी फंसे थे। मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि किसान ने आत्महत्या नहीं की है, क्योंकि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
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इस मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री ने किसान की आत्महत्या को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए थे। रविवार को उच्च शिक्षा मंत्री ने किसान की आत्महत्या के मामले से अनभिज्ञता जता कर यह भी साबित कर दिया कि इस मामले के सियासत से भी वह कोसो दूर हैं।

प्रदेश सरकार इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे चुकी है और उच्च शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि मामला शायद पिछले साल का होगा। यह तब है जबकि धन सिंह प्रदेश के सहकारिता मंत्री भी हैं और सहकारिता मंत्रालय का सीधा संबंध किसानों को दिए जा रहे कर्ज से भी है।

 

बताया गया है कि बेड़ीनाग का किसान बैंक की ओर से नोटिस मिलने के कारण परेशान था और उस पर अन्य संस्थाओं का भी कर्ज था। इसी परेशानी में उसने जहर पीकर जान दी थी।  उच्च शिक्षा मंत्री ने बाद में यह भी कहा कि सरकार ने लघु और सीमांत किसानों के लिए एक लाख तक की लिमिट बढ़ाई है और उन्हें दो फीसदी ब्याज दर पर ऋण देने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से किसानों की माली हालत में सुधार होगा। 

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