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सहकारी बैंकों में करेंसी एक्सचेंज से सफेदपोशों को झटका
कैलाश्ा पाठक
Updated Fri, 18 Nov 2016 01:48 AM IST
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सहकारी बैंकों में करेंसी एक्सचेंज बंद होने का सबसे बड़ा झटका सफेदपोशों को लगा है। सफेदपोश सहकारी बैंक प्रबंधन पर पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बदलवाने का दबाव बना रहे थे।
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बताया जा रहा है कि नैनीताल जिले के सहकारी बैंकों की अलग-अलग शाखाओं में एक मंत्री जी ने ब्लैक मनी के पचास करोड़ रुपए एक्सचेंज कराने भेजे थे। नोट एक्सचेंज के लिए आईडी जब तक जुटती तब तक सरकार ने सहकारी बैंकों में एक्सचेंज बंद कर दिया। बैंकों ने मंत्री जी को पैसे वापस कर दिए हैं।
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पांच सौ और एक हजार के नोट बाजार में बंद होने के बाद करेंसी एक्सचेंज के पांचवें दिन ही उत्तरप्रदेश में सहकारी बैंकों और सोसायटी में एक्सचेंज घोटाला उजागर हो गया। आरबीआई ने तत्काल सहकारी बैंकों में एक्सचेंज और पुराने नोट जमा कराने पर रोक लगा दी।
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नए सर्कुलर से आम जनता को भले ही परेशानी हुई लेकिन नेता सबसे ज्यादा आहत हैं। उत्तराखंड में भी इस तरह का एक मामला चर्चाओं में है। सहकारी बैंक सूत्रों के मुताबिक एक मंत्री जी ने सहकारी बैंकों में ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए भेजा था।
बैंक प्रबंधन पर इसका दबाव भी था। बैंक प्रबंधन पुराने नोट एक्सचेंज के लिए आईडी जुटा रहा था। अचानक आरबीआई के सर्कुलर से बैंकों ने यह पैसा मंत्री जी को लौटा दिया। नेता मायूस हैं और पैसा कैसे और कहां खपाएं, इसी चिंता में डूबे हैं। हालांकि, सहकारी बैंक शाखाओं के प्रबंधकों का कहना है कि किसी भी मंत्री जी ने इतनी बड़ी रकम एक्सचेंज के लिए नहीं दी थी।
दुग्ध संघों से भी गायब हो गए छोटे नोट
अब यह भी कहा जा रहा है कि कैश एक्सचेंज शुरू होने के बाद करीब पचास करोड़ रुपया हल्द्वानी की विभिन्न ब्रांचों से बंट चुका है। बाजार में अभी तक छोटे नोट नहीं मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि छोटे नोट ब्लैक मनी से एक्सचेंज होकर बाजार से गायब हो रहे हैं।
अधिकांश लोगों को कैश एक्सचेंज में दो हजार रुपए का नोट दिया जा रहा है। दो हजार रुपए का नोट बाजार में चलन में इसलिए नहीं आ पा रहा है सामान की खरीद के बाद दुकानदारों के पास वापसी के लिए छोटे नोट नहीं हैं।
बैंकों से निकले नोट कहां गए, इसको लेकर भी तमाम चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि दूध, गैस, पेट्रोल, और दवा की दुकानों से ब्लैक मनी को व्हाइट में एक्सचेंज किया जा रहा है। लालकुआं दुग्ध संघ और दुग्ध डेरियों से एक्सचेंज का बड़ा खेल चलने की चर्चा है।
आंचल दुध की आपूर्ति एजेंटों के माध्यम से ग्राहकों तक होती है। एजेंट रोजाना सुबह और शाम को दूध की डिलीवरी के साथ पांच सौ और एक हजार के नोटों के साथ 50 और 100 के नोट भी दे रहे हैं।
प्रतिदिन दूध और दूध से जुड़े उत्पादों का लाखों रुपए का कारोबार होता है। इतना होने पर भी छोटे नोट दुग्ध संघ से गायब हो रहे हैं। ऐसी शिकायतों के बाद जिला प्रशासन और आयकर विभाग की नजर भी इन संस्थानों में नहीं पड़ रही है।