{"_id":"62532d793053764cc146ef64","slug":"conflict-in-fatehpur-renge-haldwani-ramnagar-haldwani-news-hld45908071","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधुनिक संसाधनों का खूब इस्तेमाल, पर जंगलात से सफलता दूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आधुनिक संसाधनों का खूब इस्तेमाल, पर जंगलात से सफलता दूर
विज्ञापन
Conflict in Fatehpur Renge Haldwani Ramnagar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। वन विभाग फतेहपुर रेंज में कर्मचारियों की फौज उतारने के साथ आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है, जामनगर चिड़ियाघर से प्रशिक्षित टीम भी पहुंच चुकी है। इसके बाद भी जंगलात को बाघ को पकड़ने और मारने में सफलता नहीं मिल सकी है।
रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज में दिसंबर से मार्च के बीच छह लोग मानव-वन्यजीव संघर्ष में मारे गए हैं। इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने घटनास्थल के पास कैमरा ट्रैप लगाने और पगमार्क आदि के जरिए वन्यजीवों की पहचान करने की कोशिश की थी, इससे विशेषज्ञों की भी मदद ली गई थी। काफी हद तक पहचान भी हुई है, साथ ही जंगलात ने जहां पर वन्यजीव ने लोगों को मारा था, उस जगह से वन्यजीव के मिले बाल के पांच सैंपल एकत्र कर डब्ल्यूआईआई को भेजे हैं।
सूत्रों के अनुसार इसमें एक की रिपोर्ट आ चुकी है, जबकि चार सैंपल की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
डीएफओ रामनगर चंद्रशेखर जोशी का कहना है कि घटनास्थल से सैंपल लेकर डीएनए जांच को भेजा गया है। जब बाघ को पकड़ा जाएगा तब उसके सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाएंगे। दोनों सैंपल के मिलान से घटना में शामिल सही वन्यजीव की पुष्टि हो सकेगी।
विज्ञापन
इंफ्रारेड तकनीक से लैस ड्रोन का इस्तेमाल
हल्द्वानी। फतेहपुर रेंज में आदमखोर को काबू में करने के लिए जंगलात की मदद के लिए जामनगर चिड़ियाघर से 30 सदस्यों की टीम पहुंची है। इसमें पशु चिकित्सक से लेकर आधुनिक उपकरण है। यह टीम वन्यजीव का पता लगाने के लिए इंफ्रारेड ड्रोन (ड्रोन में इंफ्रारेड वाले कैमरे लगे होते हैं) का इस्तेमाल किया जा रहा है। वनाधिकारियों का सामान्य तौर पर ड्रोन होता है, जो इलाके की तस्वीरें लेता हैं, जबकि यह ड्रोन अगर किसी झाड़ी आदि में वन्यजीव छिपा है और उसकी तस्वीर नहीं भी आ रही है तो वहां इंफ्रारेड तकनीक होने के कारण तुलनात्मक तौर पर ज्यादा बेहतर तस्वीरें आती हैं। इसके अलावा वनकर्मियों को रात के लिए नाइट विजन दूरबीन भी दिया गया है। कैमरा ट्रैप आदि का इस्तेमाल भी हो रहा है, इसके बाद भी जंगलात के हाथ खाली है।
हाथी भी नहीं बने मददगार
हल्द्वानी। फतेहपुर रेंज में कई तरह की चुनौती का सामना जंगलात को करना पड़ रहा है। क्षेत्र में एक से अधिक बाघ-बाघिन की मौजूदगी हैं। दूसरा जंगल में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना है, जहां कोई भी वाहन नहीं चल सकता है। ऐसे में हाथी को लाया गया था, जो कारगर साबित नहीं हुआ। ऐसे में अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि सभी आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए किया जा रहा है।
विज्ञापन
रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज में दिसंबर से मार्च के बीच छह लोग मानव-वन्यजीव संघर्ष में मारे गए हैं। इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने घटनास्थल के पास कैमरा ट्रैप लगाने और पगमार्क आदि के जरिए वन्यजीवों की पहचान करने की कोशिश की थी, इससे विशेषज्ञों की भी मदद ली गई थी। काफी हद तक पहचान भी हुई है, साथ ही जंगलात ने जहां पर वन्यजीव ने लोगों को मारा था, उस जगह से वन्यजीव के मिले बाल के पांच सैंपल एकत्र कर डब्ल्यूआईआई को भेजे हैं।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार इसमें एक की रिपोर्ट आ चुकी है, जबकि चार सैंपल की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
डीएफओ रामनगर चंद्रशेखर जोशी का कहना है कि घटनास्थल से सैंपल लेकर डीएनए जांच को भेजा गया है। जब बाघ को पकड़ा जाएगा तब उसके सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाएंगे। दोनों सैंपल के मिलान से घटना में शामिल सही वन्यजीव की पुष्टि हो सकेगी।
विज्ञापन
इंफ्रारेड तकनीक से लैस ड्रोन का इस्तेमाल
हल्द्वानी। फतेहपुर रेंज में आदमखोर को काबू में करने के लिए जंगलात की मदद के लिए जामनगर चिड़ियाघर से 30 सदस्यों की टीम पहुंची है। इसमें पशु चिकित्सक से लेकर आधुनिक उपकरण है। यह टीम वन्यजीव का पता लगाने के लिए इंफ्रारेड ड्रोन (ड्रोन में इंफ्रारेड वाले कैमरे लगे होते हैं) का इस्तेमाल किया जा रहा है। वनाधिकारियों का सामान्य तौर पर ड्रोन होता है, जो इलाके की तस्वीरें लेता हैं, जबकि यह ड्रोन अगर किसी झाड़ी आदि में वन्यजीव छिपा है और उसकी तस्वीर नहीं भी आ रही है तो वहां इंफ्रारेड तकनीक होने के कारण तुलनात्मक तौर पर ज्यादा बेहतर तस्वीरें आती हैं। इसके अलावा वनकर्मियों को रात के लिए नाइट विजन दूरबीन भी दिया गया है। कैमरा ट्रैप आदि का इस्तेमाल भी हो रहा है, इसके बाद भी जंगलात के हाथ खाली है।
हाथी भी नहीं बने मददगार
हल्द्वानी। फतेहपुर रेंज में कई तरह की चुनौती का सामना जंगलात को करना पड़ रहा है। क्षेत्र में एक से अधिक बाघ-बाघिन की मौजूदगी हैं। दूसरा जंगल में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना है, जहां कोई भी वाहन नहीं चल सकता है। ऐसे में हाथी को लाया गया था, जो कारगर साबित नहीं हुआ। ऐसे में अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि सभी आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए किया जा रहा है।