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सरकारी वकीलों की नियुक्ति का रास्ता साफ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 May 2017 01:32 AM IST
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- फोटो : google
हाइकोर्ट में शासकीय अधिवक्ता, स्थायी अधिवक्ता, अपर अधिवक्ता, अपर शासकीय अधिवक्ता और ब्रिफ होल्डर की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर स्पेशल अपील को स्वीकार करते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार अपने हित को देखते हुए नियुक्ति कर सकती है।
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हाइकोर्ट के अधिवक्ता दिनेश कुमार चंदोला ने स्पेशल अपील दायर कर एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें नियुक्तियों में पारदर्शिता रखते हुए चीफ जस्टिस की संस्तुति के बाद ही नियुक्ति करने को कहा गया था।
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सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता का कोई निजी हित नहीं है। न तो उसने सरकारी पद के लिए कोई आवेदन किया है और न ही अभी तक किसी की नियुक्ति की गई है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
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स्पेशल अपील में कहा गया कि पंजाब और हरियाणा मामले में सरकार को आदेशित किया गया था कि सरकारी पैसों का दुरुपयोग न हो सके इसके लिए कम अधिवक्ता नियुक्ति किए जाने चाहिए इसलिए पंजाब हरियाणा का निर्णय यहां पर लागू नहीं होगा।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इस संबंध में सरकार ने पांच लोगों की कमेटी बनाई है वह उचित है। कोर्ट ने कहा कि आवेदनों पर स्क्रूटनी कर कार्यवाही की जानी चाहिए जिससे सरकार की पैैरवी के लिए हाइकोर्ट में योग्य अधिवक्ता नियुक्त हो सके। कोर्ट ने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं की नियुक्ति संबंधित नियमावली के तहत करे।