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बाघ को रेस्क्यू करते समय जेसीबी से दबाने मामले में जांच बैठाई
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर।
Updated Sun, 19 Mar 2017 12:47 AM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
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रामनगर। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की बैलपड़ाव रेंज की दाबका नदी में बहू व ससुर को मारने के बाद पकड़े गए बाघ की मौत मामले में विभागीय जांच बैठा दी गई है। रेस्क्यू के दौरान वन विभाग के कर्मियों ने जेसीबी के पंजे से बाघ को काफी देर तक दबाए रखा। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अमर उजाला में खबर छपने के बाद वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि इस मामले में विभागीय जांच बैठा दी गई है। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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रामनगर। वन्यजीव और मानव संघर्ष के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच वन्यजीवों की रक्षा करने में वनकर्मी पस्त साबित हो रहे हैं। हालात ये हैं कि रेस्क्यू ऑपरेशन करने में वनकर्मी ट्रेंड तक नहीं हैं। इसी कारण कई बाघ समेत अन्य वन्यजीव अपनी जान गंवा चुके हैं।
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विगत दिनों तराई पश्चिमी वन प्रभाग के दाबका रेंज में एक बाघ द्वारा दो लोगों को मारने के बाद उसे पकड़ने के लिए चलाए गए रेस्क्यू अभियान में कई खामियां देखी गई थीं। इस कारण बाघ को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसका सबसे बड़ा कारण वनकर्मियों का ट्रेंड नहीं होना और संसाधनों की कमी है।
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वनकर्मियों को कैसे किसी हिंसक जानवर को काबू करना है इसकी ट्रेनिंग तक नहीं है। कुमाऊं के सभी वन प्रभागों में कहीं ट्रैक्यूलाइजर गन नहीं है तो नहीं बेहोशी की दवाइयां नहीं हैं। अधिकांश प्रभागों में इस गन के अचूक निशानेबाज नहीं हैं।
साथ ही रेस्क्यू के बाद रेस्क्यू सेंटर ले जाने के लिए बड़ा वाहन नहीं है। इसके चलते पिंजरे में कई घंटे कैद हिंसक जानवर बाहर निकलने की कोशिश में अपने को घायल कर लेता है। रेस्क्यू सेंटर पहुंचने से पहले ही अपनी जान गंवा बैठता या अत्यधिक घायल हो जाता है।
इस बारे में वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि रेस्क्यू के समय वनकर्मियों के ट्रेंड न होने के साथ संसाधनों की कमी है। जल्द ही इसे जल्द दूर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी जू के उपनिदेशक गोपाल सिंह कार्की वनकर्मियों को साल भर पांच-पांच वनकर्मियों की टीम को रेस्क्यू करने की ट्रेनिंग के साथ ही फायरिंग करना भी सिखाएंगे।
इसके साथ ही अफ्रीका की तर्ज पर एंबुलेंस बनाई जाएगी, जिससे जहां भी किसी घटना की सूचना मिलेगी यह एंबुलेंस अपने आप उधर रवाना हो जाएगी। इसके साथ ही हल्द्वानी जू में ही रेस्क्यू सेंटर बनाया जा रहा है जिसमें चार टाइगर व चार गुलदार रखने की व्यवस्था की जा रही है।
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