फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Check went into the pit of Stiac

गड्ढे में चली गईं एसटीएच की जांचें

Thu, 16 Apr 2015 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी Updated Thu, 16 Apr 2015 02:11 AM IST
विज्ञापन

अव्यवस्थाओं का गढ़ बन चुके सुशीला तिवारी अस्पताल में लापरवाही से किरण जोशी की मौत का पहला मामला नहीं है। हाल ही में हुई तीन मौत और बिना इलाज के मरीज को रेफर करने की जांच रिपोर्ट गड्ढे में डाल दी गई है। आज तक जांच रिपोर्ट का पता नहीं चला पाया है और किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

विज्ञापन


इंदिरा नगर निवासी मो. इश्तियाक ने अपनी बच्ची को हालत बिगड़ने पर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया था। पिछले वर्ष 23 सितंबर को डाक्टर और स्टाफ की लापरवाही के चलते बच्ची की मौत हो गई थी। बच्ची की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ था। मेडिकल कालेज चौकी इंचार्ज को डाक्टरों के खिलाफ तहरीर देने के साथ ही अस्पताल प्रशासन से भी जांच कराने को प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन सात माह बाद भी आज तक जांच रिपोर्ट नहीं आई।
विज्ञापन


पुलिस ने भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह लाइन नंबर 16 निवासी मो. अय्यूब (65) की 21 दिसंबर को मौत हो गई थी। परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर तोड़फोड़ की थी। डाक्टरों के खिलाफ जांच का आश्वासन दिया गया। पुलिस को दोनों ओर से तहरीर दी गई थी, लेकिन वह मामला भी ठंडे बस्ते में है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यही नहीं इंदिरा नगर निवासी सोनू ने शोएब (शिशु) को उल्टी-दस्त होने पर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया था। नौ मार्च को शोएब की मौत हो गई थी। इस प्रकरण में भी परिजनों ने डाक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया था। एमएस (चिकित्सा अधीक्षक) डा. एके पांडेय ने जांच कराने का आश्वासन दिया था। इस मामले में भी पुलिस को तहरीर सौंपी गई थी, जांच आज तक पूरी नहीं हुई है।

अस्पताल प्रबंधन की अमानवीयता यहीं खत्म नहीं होती इस वर्ष 13 जनवरी को मुक्तेश्वर से आए घायल बच्चे को अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से मना कर दिया था। चोटिल बच्चा बिना इलाज के करीब 5:30 घंटे तड़पता रहा। मामला डीएम दीपक रावत तक पहुंचने पर उन्होंने एसडीएम को मौके पर भेज कर इलाज कराया और रेफर किया। इस मामले की भी जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आई है। इस संबंध में प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed