फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Changed jamani

खनन कारोबारियों ने मनमाफिक बदल दी जमरानी की धारा 

Mon, 03 Apr 2017 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी। Updated Mon, 03 Apr 2017 12:52 AM IST
विज्ञापन
Changed jamani
गौला में खनन - फोटो : अमर उजाला

हल्द्वानी। नदी और नाले अपना रास्ता खुद बनाते हैं, उससे छेड़छाड़ प्रकृति के संतुलन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जमरानी क्षेत्र इसका अपवाद है। रीवर ट्रेनिंग की आड़ में खनन कारोबारियों ने हर जगह पर नदी का रुख अपने मन माफिक बदला है। पोकलेन से नदी को नाले का रूप देकर नदी से खनन किया गया है। कारोबारियों ने करीब आठ किलोमीटर के दायरे में बेतहाशा खनन कर बड़े-बड़े गड्ढे और टीले बना दिए हैं। अवैध खनन के चलते ही जमरानी में खनन पर प्रतिबंध लगा है। 

विज्ञापन


जमरानी में दशकों से खनन होता आया है। जिला प्रशासन ने आधा दर्जन से अधिक कारोबारियों को खनन के पट्टे आवंटित किए हैं। हर साल बरसात में स्थानीय लोगों की भूमि जमरानी नदी के कटाव से बह जाती है। जमरानी ग्रामीणों के खेत काटने के साथ उद्गम स्थल से करोड़ों-अरबों रुपये का पत्थर, रेता और बजरी बहाकर ले आती है। यही रेता, बजरी और पत्थर गौला तक पहुंचता है। जमरानी का पट्टा उसी काश्तकार को जारी होता है, जिसकी जमीन कटाव में बह जाती है, ताकि वह आवंटित पट्टे से खनन कर अपना गुजर बसर कर सके।
विज्ञापन


काश्तकार खुद के नाम पट्टा आवंटित कराने के बजाय किसी भी कारोबारी को अधिकृत कर देते हैं। बाकायदा इसके लिए पूरी लिखा-पढ़ी और प्रशासन को एनओसी दी जाती है। यहीं से गोलमाल की शुरुआत होती है। कारोबारी पट्टे पर खनन कर काश्तकार को अनुबंध के आधार पर धनराशि देते हैं। खनन पर सरकार को रायल्टी मिलती है। खनन कारोबारियों की लॉबी काफी मजबूत है। स्थानीय प्रशासन ही नहीं बल्कि सरकार को प्रभावित करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्रशर और खनन कारोबारियों की लॉबी के दबाव में 30 सितंबर 2016 को उत्तराखंड रीवर ट्रेनिंग नीति लागू की गई। इसमें खनन लॉबी के दबाव में सरकार ने नदियों में मलबा जमा होने से बरसात में नदी के प्रवाह से आपदा का खतरा बताया। रीवर ट्रेनिंग में मलबे की सफाई के बहाने नदियों तक पोकलेन और जेसीबी चलाने की अनुमति दे दी। जबकि, आवंटित पट्टों में मशीनों से खनन की अनुमति नहीं है। 

सरकार की इस नीति से खनन लॉबी की मन की मुराद पूरी हुई। सरकार ने नदियों में जमा मलबा (अरबों रुपये का पत्थर और बजरी) की सफाई की आवंटित पट्टों के अतिरिक्त कुछ कारोबारियों को छह माह के लिए खनन करने की अनुमति दे दी। अवैध खनन के लिए वैध लाइसेंस जारी होने के बाद खनन कारोबारियों ने जमरानी नदी का रुख ही बदल दिया। जेसीबी और पोकलैंड से मनमाफिक नदी का रुख जगह-जगह बदलकर खनन कर लिया।


हर पांच मीटर की दूरी पर नदी को नाले का रूप देकर उसका रुख मोड़ दिया। खनन के लिए सारे नियम कानून ताक में रख दिए। अनाप-शनाप खनन होने से पूरा नदी क्षेत्र ऊंचे टीलों और गहरे गड्ढों में बदल दिया। इससे जमरानी में खनन से जुड़े वाहनों की संख्या बढ़ी। सुबह से खनन के लिए डंपरों की लंबी लाइनों के साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ गईं। ऐसी ही एक दुर्घटना में अमृतपुर में खनन से जुड़े वाहन ने बच्चे को कुचल दिया। बच्चे की मौत से आक्रोशित भीड़ के हंगामे के बाद प्रशासन ने खनन बंद करवा दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed