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नैंसी कान्वेंट प्रकरण ः संयुक्त मजिस्ट्रेट से मिले अभिभावक
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
Updated Sat, 23 May 2015 12:55 AM IST
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नैंसी कॉन्वेंट विद्यालय प्रबंधन की ओर से बुधवार रात नैनीताल रोड पर सुनसान जगह पर छोड़े गए बच्चों के अभिभावकों ने शुक्रवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट कोे मिलकर विद्यालय प्रबंधन की खामियां गिनाईं। अभिभावकों ने मांग की कि इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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खेकड़ा बागपत यूपी निवासी सुखपाल ने कहा कि उन्होंने इसी एक मई को अपने बच्चे हर्ष धामा का यहां 11वीं में दाखिला कराया। 13 मई को ही हर्ष गोरखपुर निवासी एक अन्य छात्र के साथ भाग गया। इसकी सूचना उन्होंने पुलिस में भी दी थी। 16 मई को हर्ष स्वयं घर बागपत पहुंच गया, जबकि दाखिले के समय प्रबंधन ने यहां कई गार्ड, सुरक्षा दीवार का हवाला दिया था। ऐसे में छात्र विद्यालय से भागा कैसे।
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वहीं, 12वीं के छात्र सनी धामा के पिता विजय पाल गुल्लू ने बताया कि बीते वर्ष सनी के बार-बार घर भेजने की जिद पर शिक्षकों ने उससे कहा कि यदि वह फेल हो जाएगा तो गांव भेज देंगे। इस पर वह परीक्षाओं में कापी खाली छोड़ आया, लेकिन उसे पास कर दिया गया। बार-बार कहने पर भी अभिभावकों को 11वीं की मार्कशीट नहीं दिखाई गई। उन्होंने स्कूल में केमिस्ट्री लैब न होने की बात भी कही।
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मनीष राणा के पिता प्रमोद राणा ने आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों को प्रताड़ित किया जाता है और फीस भी अभिभावक की हैसियत के अनुरूप तय की जाती है। बच्चों से अभिभावकों को एक-एक महीने तक बात नहीं करने दी जाती। उन्होंने प्रशासन से बच्चों की टीसी दिलाने की भी मांग की।
पारदर्शिता से होगी जांच
अभिभावकों को आश्वासन दिया है कि प्रकरण की पारदर्शिता के साथ जांच कराई जाएगी। दोषियों को कतई नहीं बख्शा जाएगा। - आशीष चौहान, संयुक्त मजिस्ट्रेट, नैनीताल।
फर्जी कहानी गढ़ी अभिभावकों ने : नैंसी प्रबंधन
नैंसी कान्वेंट स्कूल एमडी आईपी सिंह, चेयरपर्सन मंजू सिंह तथा प्रधानाचार्य धर्मेंद्र सिसोदिया का कहना है कि कुछ अभिभावक स्कूल पर नाजायज दबाव बनाकर शुल्क वापसी और बच्चों के लिए 90 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होने की मार्कशीट की मांग रहे थे। उनकी मांग न मानने पर उन्होंने झूठी कहानी गढ़कर विद्यालय को बदनाम करने की साजिश की। स्कूल प्रबंधन ने प्रेस वार्ता में अपने दावे के समर्थन में आडियो रिकार्डिंग सुनाई।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी नरेंद्र धामा, आर्यन तोमर और मनीष राणा अनुशासन हीन थे जिस पर उनके अभिभावकों से शिकायत कर उन्हें बुलाया गया और बच्चों को वापस ले जाने को कहा। उनका आरोप है कि गुल्लू धामा, राजेश तोमर, प्रमोद राणा और चार अन्य लोग सुरक्षा गार्डों से गालीगलौज और मारपीट करते हुए परिसर और गर्ल्स हास्टल में घुस गए। वार्डन पूनम यादव से अश्लीलता और धक्कामुक्की की।
प्रबंधन के साथ भी गालीगलौज की गई। यह जानकारी उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस चौकी में दी। एमडी ने दावा किया कि इस दौरान तीनों छात्र संस्था की गाड़ी में अभिभावकों की सुपुर्दगी में बैठे थे, लेकिन बाद में पुलिस ने अभिभावकों से मिलीभगत कर बच्चों को अपहृत दर्शा दिया और मुकदमा दर्ज कर दिया। इस पूरे प्रकरण की जानकारी प्रबंधन ने एसएसपी को भी दी।