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इको सेंसटिव जोन में भवन निर्माण और सड़क बनाने पर रोक

Tue, 20 Dec 2016 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल Updated Tue, 20 Dec 2016 01:46 AM IST
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Building and road construction in sensitive with a stop at Echo Zone
court shimla
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को छह माह में राष्ट्रीय वन नीति घोषित करने, वन क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए नीति निर्धारित करने और रियो डी जेनेरियो में हुई यूनाइटेड नेशनल कांफ्रेंस में वनों के लिए बनाई गई नीति का अनुपालन कराने का निर्देश दिया।
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कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि वह कार्बेट सहित अन्य नेशनल पार्कों के दस किलोमीटर के दायरे को इको सेंसेटिव जोन घोषित करे। जोन के दस किलोमीटर के दायरे पर कोई भी भवन निर्माण और सड़क बनाने पर रोक भी रोक लगाते हुए खंडपीठ ने जंगल की आग के मामलों पर भी सख्त रुख अपनाया।
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पूर्व में वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने जंगल में लगी आग से वन्य जीवों और मानव क्षति से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
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सोमवार को कोर्ट ने जंगली जानवरों टाइगर, लैपर्ड व पैंथर को आदमखोर घोषित न करने के साथ ही किसी भी मृत जानवर के फोटो इत्यादि को प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के सामने डिस्क्लोज न करने के निर्देश दिए।

कोर्ट ने कहा कि जरूरत हो तो आदमखोर घोषित होने से पहले मुख्य सचिव की कमेटी के सामने मामला रखा जाए। कोर्ट ने जंगली जानवरों को दुर्घटना से बचाने के लिए राजाजी नेशनल पार्क के अंदर रेलवे ट्रैक पर विद्युत व्यवस्था करने के निर्देश रेलवे को दिए।

जिम कार्बेट पार्क क्षेत्र के भीतर ट्रेनों की गति 30 किलोमीटर से अधिक न होने का भी निर्देश दिया। वनों में हाथियों का आवागमन क्षेत्र का अध्ययन कर रेलवे विभाग को इसकी जानकारी दी जाए।


जिम कार्बेट पार्क के चारों ओर केंद्र सरकार की मदद से पत्थरों की दीवार बनाने को कहा है। कोर्ट ने मुख्य सचिव व वन सचिव को सभी आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

खंडपीठ ने वन कानूनों में संशोधन कर शिकारियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करने को कहा। यह भी कहा कि इसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान लागू किया जाए। प्रदेश में कहीं भी हाउसिंग सोसाइटी बनने पर बीस प्रतिशत हरित क्षेत्र रखा जाए।   

वनों को आग से बचाने के लिए दस हजार अग्नि सुरक्षा कर्मचारी नियुक्त करने, अगले वित्त वर्ष में समुचित बजट की व्यवस्था करने, उचित मात्रा में पानी की व्यवस्था करने और वन अग्नि से नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा देने का निर्देश भी खंडपीठ ने दिया।

कोर्ट ने अतिक्रमणकारियों और गुर्जरों को वन भूमि  से एक वर्ष के भीतर बेदखल करने के निर्देश दिए। खंडपीठ ने कहा कि इसके लिए एसडीआरएफ व एनडीआरएफ कर्मिंयों की संख्या बढ़ाई जाए।


आग बुझाने वाले वन कर्मियों को फायर प्रूफ वर्दी तथा आधुनिक उपकरण दिए जाए। वन विभाग में फील्ड कर्मियों की संख्या में तीस प्रतिशत का इजाफा किया जाए। खंडपीठ ने कहा कि 24 घंटे के भीतर आग रोकने में विफल होने पर डीएफओ, 48 घंटे में वन संरक्षक और 72 घंटे के भीतर मुख्य वन संरक्षक को निलंबित किया जाए।
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