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बंकिंघम पैलेस की तर्ज पर गौथिक शैली में बना है भवन

Sun, 17 Apr 2016 11:26 PM IST
भूपेंद्र मोहन रौतेला, नैनीताल
भूपेंद्र मोहन रौतेला, नैनीताल Updated Sun, 17 Apr 2016 11:26 PM IST
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Buckingham Palace-style building built in the style Guthik
हैरिटेज भवन - फोटो : अमर उजाला
बंकिंघम पैलेस की तर्ज पर गौथिक शैली में बना नैनीताल का राजभवन का अपना ऐतिहासिक महत्व है। राजभवन में ब्रिटिश शासनकाल के हथियार, बंदूक और तलवारें हैं। राजभवन स्थित ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स की विश्व में अपनी एक अलग पहचान है। फिर चाहे बात सुविधाओं की हो या फिर खूबसूरती की। यूनाइटेड प्रोविंस के गवर्नर मैलकम हैली ने 1926 में इस ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स का निर्माण कराया था। 
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1880 में नैनीताल में हुए भूस्खलन के बाद स्नोव्यू स्थित राजभवन में दरारें आ गई थीं।

राजभवन का कुछ बड़ा हिस्सा भी इसमें क्षतिग्रस्त हो गया था। खतरे को देखते हुए 27 अप्रैल 1897 को सेंट  जोजफ कॉलेज के पास नए राजभवन की नींव रखी गई। मार्च 1990 में राजभवन बनकर तैयार हो गया। 1947 में सरोजन नायडू इस राजभवन में रहने वालीं पहली भारतीय गवर्नर थी। नैसर्गिक सौंदर्य के बीच 220 एकड़ भूमि में फैले राजभवन परिसर में 50 एकड़ भूमि में गोल्फ मैदान, आठ एकड़ में भवन और 160 से ज्यादा में जंगल और स्वीमिंग पूल है। यूनाइटेड प्रोविंस के गवर्नर मैलकम हैली ने 1926 में यहां गोल्फ कोर्स बनाया।
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इसका डिजाइन और निर्माण ब्रिटिश आर्मी के विशेषज्ञ इंजीनियरों ने किया। इसमें 18 होल और 18 विभिन्न प्रकार की टी बनाई गई हैं। बताया जाता है कि 1927 में मिस्टर एच एलीन नाम के एक अंग्रेज अधिकारी ने 24 अंक अर्जित कर इस गोल्फ कोर्स में कीर्तिमान बनाया था। खास बात यह है कि आजादी से पहले गोल्फ मैदान सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, बृहस्पतिवार और रविवार को खुलता था।
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समुद्र सतह से 6475 फीट की ऊंचाई पर स्थित गोल्फ  मैदान में 80 के दशक तक आम लोगों के लिए प्रवेश वर्जित था। वर्ष 1994 में तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल बोरा ने इसे आम लोगों के लिए खोल दिया, तभी से यहां गोल्फ प्रतियोगिताएं होने लगी। जहां तक राजभवन मेें प्रवेश का सवाल है, उत्तराखंड बनने से पहले इसे केवल विशिष्ट अतिथियों के लिए खोला जाता था। पर उत्तराखंड के पहले राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने 20 नवंबर 2001 को इस राजभवन को आम नागरिकों और सैलानियों के लिए खोल दिया। 

राजभवन परिसर में सैलानियों को गाइड करने की जिम्मेदारी केएमवीएन को सौंपी गई है। तभी से निगम की ओर से राजभवन में वयस्कों के प्रवेश के लिए 50 और बच्चों के लिए 20 रुपये का टिकट तय किया गया है। निगम ने यहां पर तीन गाइड तैनात किए हैं, जो यहां पहुंचने वाले सैलानियों को राजभवन और गोल्फ कोर्स की सैर कराते हैं। यहां रखी गई 100 वर्ष पुरानी गणेश की मूर्तियां भी लोगों  को आकर्षित करती हैं। यह मूर्तियां नेपाल के राजा की ओर से भेंट  स्वरूप अंग्रेज शासकों को सौंपी गई थी। राजभवन के निर्माण में आगरा के लाल पत्थर का प्रयोग किया गया है। गोल्फ कोर्स के साथ ही यहां पर वाइल्ड  लाइफ के भी दर्शन होते हैं। देवदार, सुरई, खरसू, तिलौज, बुरांश जैसे वृक्षों के बीच गुलदार, काकड़, हिरन, घुरड़, लोमड़ी बंदर, चीतल, लंगूर, कुलीज जैसे जीव जंतु यहां देखे जा सकते  हैं। राजभवन में सुरक्षा की दृष्टि से 18 हाइड्रेेंट भी हैं। 



1970 और 2013 में लगी थी आग
नैनीताल।  राजभवन के डायनिंग हॉल में पांच जनवरी 1970 को आग लग गई थी। इसके बाद 30 मई 1970 को नये डायनिंग हाल का उद्घाटन यूपी के तत्कालीन गवर्नर डा. बी गोपाला रेड्डी ने किया  था। दो अप्रैल 2013 को भी राजभवन में जीर्णोद्धार कार्य चल रहा था। छत में एपीपी सीट बिछाने का कार्य चल रहा था, जिसे गैस हीटिंग टार्च से निर्धारित तापमान पर गर्म कर फिक्स किया जा रहा था। टार्च से निकली चिंगारी से लकड़ी ने आग पकड़ ली। बाद में आग पर काबू पाया गया और छत ठीक की गई।
 
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