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रावत की वजह से उलझी कुमाऊं की आधा दर्जन सीटें

Sat, 07 Jan 2017 12:39 AM IST
राजीव शुक्ला
राजीव शुक्ला Updated Sat, 07 Jan 2017 12:39 AM IST
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Because of the half-dozen seats Rawat complicating Kumaon
हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से अभी तक चुनाव लड़ने को लेकर पत्ते न खोलने से धारचूला सहित कुमाऊं की करीब आधा दर्जन सीट भी बुरी तरह से उलझ गई है। इन सीटों के कांग्रेसी दावेदार न तो ढंग से प्रचार ही कर पा रहे हैं और न ही अपनी दावेदारी के लिए पैरवी कर पा रहे हैं।

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रावत इस सीट से विधायक हैं और पूर्व में उनके लिए सीट छोड़ने वाले हरीश धामी भी इस विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं।  आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने के साथ ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। सीएम रावत पूर्व में भी चुनाव लड़ ने संबंधी सवालों का गोल-मोल जवाब देते रहे हैं।
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राजनीतिक गलियारों में सीएम के धारचूला से दोबारा चुनाव लड़ने की चर्चाएं हो रही हैं। साथ ही ऊधमसिंह नगर के जसपुर और किच्छा, नैनीताल जिले के रामनगर, अल्मोड़ा के सल्ट सीट से चुनाव में उतरने की बात भी हो रही है। जबकि, गढ़वाल में केदारनाथ, सहस्रपुर, रायपुर, डोईवाला से भी चुनावी समर में उतरने के कयास लगाए जा रहे हैं।
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ऐसे में इन सीटों के दावेदार भी खुद को उलझा हुआ महसूस कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सीएम को अपने लिए सीट का चयन स्वयं करना है। इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है कि सीएम हरिद्वार से भी अपना भाग्य अपना सकते हैं।

यह भी संभव है कि सीएम दो सीटों से चुनाव लड़ें। कांग्रेस 50 सीटों पर उम्मीदवार तय हो जाने का दावा कर रही है। उक्त 50 विधानसभाओं में सीएम का नाम शामिल नहीं है।  

हरिद्वार ग्रामीण से सीएम की पुत्री चर्चा में

कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी में उम्मीदवारों को लेकर सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष चर्चा हुई थी। सूत्रों की मानें तो सीएम की बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी हो सकती हैं। बैठक में अनुपमा के नाम पर भी चर्चा हुई।

तो क्या मास्टर ब्लास्टर की भूमिका में होंगे सीएम

मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनावी समर में न कूदकर सबको चौंका सकते हैं। सत्ता की चाभी मिलने के बाद मुख्यमंत्री अपने किसी विश्वसनीय की सीट खाली कराकर उपचुनाव लड़ सकते हैं।  2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा होने के कारण प्रचार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के कंधों पर ही है। 

कांग्रेस में टिकट बंटवारे के बाद उठने वाले बवंडर को थामने के साथ ही मुख्यमंत्री रावत के ऊपर सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रचार की जिम्मेदारी होगी। मुख्यमंत्री के बेटे वीरेंद्र रावत और अनुपमा रावत भी चुनावी घमासान में दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं।


सूत्रों की मानें तो कांग्रेस एक परिवार एक टिकट का फार्मूला अपना सकती है। ऐसे में सीएम अपने परिवार से एक को टिकट दिलाकर पार्टी को जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत झोकेंगे।

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