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आसमानी आफत: कुतुब मीनार से तीन गुना बड़ा एस्टेरोइड आ रहा है पृथ्वी की ओर

Wed, 21 Jul 2021 12:33 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Wed, 21 Jul 2021 12:33 PM IST
सार

25 जुलाई की रात दो बजे यह पृथ्वी से लगभग 28 लाख 70 हजार किमी की दूरी से अपोलो नाम की कक्षा से गुजरेगा।

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Asteroid three times bigger than Qutub Minar is coming towards Earth
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

कुतुब मीनार से तीन गुना बड़े आकार का एक विशाल एस्टेरोइड (2008 जीओ 20) करीब 23 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की ओर आ रहा है।

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वैज्ञानिकों ने इसे संभावित खतरनाक की श्रेणी में रखा है
25 जुलाई की रात दो बजे यह पृथ्वी से लगभग 28 लाख 70 हजार किमी की दूरी से अपोलो नाम की कक्षा से गुजरेगा। हालांकि इसके पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से लगभग आठ गुना अधिक है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे संभावित खतरनाक की श्रेणी में रखा है।
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की इस पर लगातार नजर
बता दें कि पृथ्वी से सात मिलियन किमी तक की दूरी से गुजरने वाले एस्टेरोइड इस श्रेणी में रखे जाते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस पर लगातार नजर रखे हुए है। यह एस्टेरोइड 220 मीटर चौड़ा है जो कुतुब मीनार से तीन गुने बड़े आकार का है।
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100 वर्षों में 22 एस्टेरोइड बन सकते हैं पृथ्वी के लिए खतरा
एस्टेरोइड आम तौर पर बृहस्पति ग्रह की कक्षा में पाए जाते हैं। कुछ एस्टेरोइड दूसरे ग्रहों की कक्षा में भी घूमते पाए गए हैं और इसी ग्रह के साथ साथ सूरज की भी परिक्रमा करते रहते हैं।

वैज्ञानिकों के पास अब तक लगभग दस लाख एस्टेरोइड की जानकारी है। इनमें से 22 अगले सौ वर्षों में पृथ्वी के लिए खतरा भी बन सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने बताया कैसे गैस और धूल के बादल बने एस्टेरोइड
नैनीताल स्थित आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान के अंतरिक्ष विज्ञानी डॉ. शशि भूषण पांडे ने बताया कि लगभग 4.5 अरब साल पहले जब हमारी सौर प्रणाली विकसित हो रही थी, तब गैस और धूल के कुछ ऐसे बादल जो ग्रह के रूप में विकसित नहीं हुए, बाद में एस्टेरोइड बन गए।

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