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Nainital News: बरसात शुरू ही आने लगे फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन मरीज बढ़े
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प्रतीकात्मक।
हल्द्वानी। मानसून आते ही फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। एसटीएच में त्वचा रोग के 150 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के 50 से 60 लोग होते हैं। फंगल संक्रमण पुरुष, महिला, बच्चे और बुजुर्ग को प्रभावित कर सकता है।
एसटीएच में त्वचा रोग विशेषज्ञ और विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि बरसात में फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए रोज नहाने के अलावा साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। ज्यादा से ज्यादा साफ पानी पीएं। खाने में ज्यादा तेल का इस्तेमाल न करें। नमी वाली जगहों पर न रहें और बाजार का फास्ट फूड न खाएं। इधर मंगलवार को सुशीला तिवारी अस्पताल में हुई ओपीडी में 2025 मरीज पहुंचे। बेस अस्पताल में 996 मरीजों की ओपीडी हुई।
लक्षण और उपचार
-फंगल संक्रमण हाथ-पैर, सिर, उंगलियों, मुंह और शरीर के अन्य भागों में भी हो सकता है। इसमें त्वचा पर रैशेज, पपड़ी आना या खाल निकलना, खुजली, त्वचा लाल होना और त्वचा से सफेद पाउडर की तरह पदार्थ आना आदि शामिल है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर यह फैलता भी है। हालांकि घरेलू उपायों में नारियल तेल का उपयोग काफी कारगर रहता है।
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-बैक्टीरियल इंफेक्शन में बुखार, ठंड लगनाा, सिरदर्द, थकान और खांसी शामिल है। यह श्वसन, मूत्र मार्ग, जननांग, मलाशय आदि को ज्यादा प्रभावित करते हैं। पाचन तंत्र, कान का संक्रमण, रक्त प्रवाह को भी प्रभावित करता है। त्वचा के संक्रमण से फोड़े, चकत्ते या मवाद भरे दाने हो सकते हैं।
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एसटीएच में त्वचा रोग विशेषज्ञ और विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि बरसात में फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए रोज नहाने के अलावा साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। ज्यादा से ज्यादा साफ पानी पीएं। खाने में ज्यादा तेल का इस्तेमाल न करें। नमी वाली जगहों पर न रहें और बाजार का फास्ट फूड न खाएं। इधर मंगलवार को सुशीला तिवारी अस्पताल में हुई ओपीडी में 2025 मरीज पहुंचे। बेस अस्पताल में 996 मरीजों की ओपीडी हुई।
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लक्षण और उपचार
-फंगल संक्रमण हाथ-पैर, सिर, उंगलियों, मुंह और शरीर के अन्य भागों में भी हो सकता है। इसमें त्वचा पर रैशेज, पपड़ी आना या खाल निकलना, खुजली, त्वचा लाल होना और त्वचा से सफेद पाउडर की तरह पदार्थ आना आदि शामिल है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर यह फैलता भी है। हालांकि घरेलू उपायों में नारियल तेल का उपयोग काफी कारगर रहता है।
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-बैक्टीरियल इंफेक्शन में बुखार, ठंड लगनाा, सिरदर्द, थकान और खांसी शामिल है। यह श्वसन, मूत्र मार्ग, जननांग, मलाशय आदि को ज्यादा प्रभावित करते हैं। पाचन तंत्र, कान का संक्रमण, रक्त प्रवाह को भी प्रभावित करता है। त्वचा के संक्रमण से फोड़े, चकत्ते या मवाद भरे दाने हो सकते हैं।