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गरीबों के राशन से अमीरी के ख्वाब
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सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में छापेमारी करती पूर्ति विभाग की टीम।
- फोटो : HALDWANI
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हल्द्वानी। सस्ता गल्ला विक्रेता ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन बेच रहे हैं। पूर्ति विभाग की प्रथम दृष्टया जांच में यह तथ्य सामने आ रहा है। बृहस्पतिवार को पूर्ति विभाग के अधिकारियों ने छह सस्ता गल्ले की दुकानों में छापा मारा। इसमें से तीन दुकानें बंद पाई गई। पूर्ति विभाग की ओर से इन विक्रेताओं को नोटिस भेजा गया है। साथ ही तत्काल प्रभाव से राशन वितरण पर रोक लगा दी है। पूर्ति विभाग के अधिकारियों ने पीडीएस गोदाम से वाहनों को जारी होने वाली रसीद भी मांगी है।
बृहस्पतिवार को पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने छह सस्ता गल्ले की दुकानों में छापा मारा। इसमें से तीन दुकानें बंद पाई गई। तीन दुकानों में स्टॉक सही पाया गया। बिना पूर्व सूचना के दुकान बंद रखने पर तीन सस्ता गल्ला विक्रेताओं को नोटिस भेजा गया है। साथ ही इन दुकानों के राशन वितरण पर रोक लगा दी गई है।
पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने बताया कि पूर्ति विभाग की ओर से पहले राशन और कुल वितरण का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया सस्ता गल्ला विक्रेताओं की ओर से ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन बेचने की बात सामने आ रही है।
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पकड़ा गया गेहूं-चावल पीडीएस गोदाम में जमा कराया
पूर्ति विभाग ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पकड़ा गया राशन पीडीएस गोदाम में जमा करा दिया है। पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने बताया कि गेहूं और चावल की सुपुर्दगी वरिष्ठ विपणन निरीक्षक खाद्य नागरिक आपूर्ति को दे दी गई है।
कैमरों की हो जांच तो सामने आएगी असली तस्वीर
गोदाम में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पूर्ति विभाग के अधिकारियों को इन सीसीटीवी कैमरों की जांच करनी चाहिए थी। साथ ही यह देखना चाहिए था कि जो गाड़ी पूर्ति विभाग की ओर से सीज की गई है। उस गाड़ी में राशन कब लोड हुआ और वह गाड़ी गोदाम से किस सस्ता गल्ला विक्रेता के वहां गई लेकिन पूर्ति विभाग ने दूसरे दिन भी कैमरों की जांच नहीं की।
गोदाम की स्टॉक की जांच क्यों नहीं हुई
राशन पकड़े जाने के बाद पूर्ति विभाग के अधिकारियों ने पीडीएस गोदाम के स्टॉक की जांच करनी चाहिए थी। साथ ही स्टॉक का मिलान करना था, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने यह करना उचित नहीं समझा।
पीडीएस गोदाम में समन्वय की कमी
पीडीएस गोदाम में समन्वय की कमी है। पूर्ति विभाग के अधिकारियों का आरोप है कि पीडीएस गोदाम नियमानुसार उनके पास होना चाहिए, लेकिन यह गोदाम खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के पास है। इस कारण उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती है। विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जबकि पहाड़ में पीडीएसस गोदाम पूर्ति विभाग के पास है।
ऐसे होता है खेल
विभागीय सूत्रों के अनुसार सस्ता गल्ला विक्रेताओं को राशन कार्डधारक और यूनिटों के हिसाब से जारी होता है। नैनीताल जिले में मात्र 40 प्रतिशत राशन बायोमीट्रिक तरीके से बांटा जाता है और 60 प्रतिशत राशन ऑफलाइन बांटा जाता है। इस ऑफलाइन बांटे जाने वाले राशन में ही खेल होता है। इस राशन की ही कालाबाजारी होती है। सस्ता गल्ला विक्रेता यह राशन या तो गोदाम में ही दलाल को बेच देता है। या अपनी दुकान से दलालों को बेचता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार नैनीताल जिले में बंटने वाले राशन का 39 प्रतिशत राशन की कालाबाजारी हो रही है।
हमारे पास स्टाफ की कमी है। स्टाफ कम होने के कारण छापे, जांच का अभियान नहीं चल पाता है।
-मनोज कुमार डीएसओ नैनीताल
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बृहस्पतिवार को पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने छह सस्ता गल्ले की दुकानों में छापा मारा। इसमें से तीन दुकानें बंद पाई गई। तीन दुकानों में स्टॉक सही पाया गया। बिना पूर्व सूचना के दुकान बंद रखने पर तीन सस्ता गल्ला विक्रेताओं को नोटिस भेजा गया है। साथ ही इन दुकानों के राशन वितरण पर रोक लगा दी गई है।
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पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने बताया कि पूर्ति विभाग की ओर से पहले राशन और कुल वितरण का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया सस्ता गल्ला विक्रेताओं की ओर से ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन बेचने की बात सामने आ रही है।
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पकड़ा गया गेहूं-चावल पीडीएस गोदाम में जमा कराया
पूर्ति विभाग ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पकड़ा गया राशन पीडीएस गोदाम में जमा करा दिया है। पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने बताया कि गेहूं और चावल की सुपुर्दगी वरिष्ठ विपणन निरीक्षक खाद्य नागरिक आपूर्ति को दे दी गई है।
कैमरों की हो जांच तो सामने आएगी असली तस्वीर
गोदाम में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पूर्ति विभाग के अधिकारियों को इन सीसीटीवी कैमरों की जांच करनी चाहिए थी। साथ ही यह देखना चाहिए था कि जो गाड़ी पूर्ति विभाग की ओर से सीज की गई है। उस गाड़ी में राशन कब लोड हुआ और वह गाड़ी गोदाम से किस सस्ता गल्ला विक्रेता के वहां गई लेकिन पूर्ति विभाग ने दूसरे दिन भी कैमरों की जांच नहीं की।
गोदाम की स्टॉक की जांच क्यों नहीं हुई
राशन पकड़े जाने के बाद पूर्ति विभाग के अधिकारियों ने पीडीएस गोदाम के स्टॉक की जांच करनी चाहिए थी। साथ ही स्टॉक का मिलान करना था, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने यह करना उचित नहीं समझा।
पीडीएस गोदाम में समन्वय की कमी
पीडीएस गोदाम में समन्वय की कमी है। पूर्ति विभाग के अधिकारियों का आरोप है कि पीडीएस गोदाम नियमानुसार उनके पास होना चाहिए, लेकिन यह गोदाम खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के पास है। इस कारण उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती है। विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जबकि पहाड़ में पीडीएसस गोदाम पूर्ति विभाग के पास है।
ऐसे होता है खेल
विभागीय सूत्रों के अनुसार सस्ता गल्ला विक्रेताओं को राशन कार्डधारक और यूनिटों के हिसाब से जारी होता है। नैनीताल जिले में मात्र 40 प्रतिशत राशन बायोमीट्रिक तरीके से बांटा जाता है और 60 प्रतिशत राशन ऑफलाइन बांटा जाता है। इस ऑफलाइन बांटे जाने वाले राशन में ही खेल होता है। इस राशन की ही कालाबाजारी होती है। सस्ता गल्ला विक्रेता यह राशन या तो गोदाम में ही दलाल को बेच देता है। या अपनी दुकान से दलालों को बेचता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार नैनीताल जिले में बंटने वाले राशन का 39 प्रतिशत राशन की कालाबाजारी हो रही है।
हमारे पास स्टाफ की कमी है। स्टाफ कम होने के कारण छापे, जांच का अभियान नहीं चल पाता है।
-मनोज कुमार डीएसओ नैनीताल