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Nainital News: मरीजों के इलाज के साथ विशेषज्ञ डॉक्टर भी तैयार करेगा बेस अस्पताल
Sat, 24 Oct 2026 01:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:00 AM IST
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हल्द्वानी। कुमाऊं के मरीजों को बेहतर इलाज देने के साथ बेस अस्पताल अब विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। अस्पताल में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स शुरू कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मानकों के अनुरूप संसाधनों और व्यवस्थाओं का आकलन कर मान्यता लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मंजूरी मिलने पर अस्पताल के चयनित विभागों में डॉक्टरों को उच्च चिकित्सा प्रशिक्षण देने का रास्ता खुल सकेगा।
200 बेड की क्षमता वाले बेस अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 1500 से 1600 मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में यूरोलॉजी में सुपर स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा मेडिसिन विभाग में चार, आर्थोपेडिक्स में दो, ईएनटी में दो, सर्जरी में दो और नेत्र विभाग में तीन डॉक्टर तैनात हैं। अस्पताल प्रशासन इन्हीं विभागों में डीएनबी कोर्स शुरू कराने की संभावनाएं तलाश रहा है। इसके लिए विभागों में उपलब्ध चिकित्सकों और अन्य संसाधनों के आधार पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने की तैयारी है।
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मान्यता के लिए भेजा जाएगा प्रस्ताव
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमके तिवारी ने बताया कि डीएनबी कोर्स शुरू कराने के लिए संबंधित प्राधिकरण को पत्र लिखकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। एनएमसी के मानकों के अनुरूप जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं का आकलन किया जाएगा। जिन बिंदुओं पर कमी सामने आएगी, उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद ही संबंधित विभागों में कोर्स और दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
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खास बातें
अवधि :
एमबीबीएस के बाद सामान्यतः तीन वर्ष का पाठ्यक्रम।
प्रवेश :
नीट-पीजी परीक्षा और निर्धारित काउंसलिंग के माध्यम से।
पढ़ाई :
अस्पताल में मरीजों का उपचार, वरिष्ठ विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण और सैद्धांतिक अध्ययन।
विषय : जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, हड्डी रोग, ईएनटी और नेत्र रोग विभाग।
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200 बेड की क्षमता वाले बेस अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 1500 से 1600 मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में यूरोलॉजी में सुपर स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा मेडिसिन विभाग में चार, आर्थोपेडिक्स में दो, ईएनटी में दो, सर्जरी में दो और नेत्र विभाग में तीन डॉक्टर तैनात हैं। अस्पताल प्रशासन इन्हीं विभागों में डीएनबी कोर्स शुरू कराने की संभावनाएं तलाश रहा है। इसके लिए विभागों में उपलब्ध चिकित्सकों और अन्य संसाधनों के आधार पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने की तैयारी है।
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मान्यता के लिए भेजा जाएगा प्रस्ताव
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमके तिवारी ने बताया कि डीएनबी कोर्स शुरू कराने के लिए संबंधित प्राधिकरण को पत्र लिखकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। एनएमसी के मानकों के अनुरूप जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं का आकलन किया जाएगा। जिन बिंदुओं पर कमी सामने आएगी, उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद ही संबंधित विभागों में कोर्स और दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
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खास बातें
अवधि :
एमबीबीएस के बाद सामान्यतः तीन वर्ष का पाठ्यक्रम।
प्रवेश :
नीट-पीजी परीक्षा और निर्धारित काउंसलिंग के माध्यम से।
पढ़ाई :
अस्पताल में मरीजों का उपचार, वरिष्ठ विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण और सैद्धांतिक अध्ययन।
विषय : जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, हड्डी रोग, ईएनटी और नेत्र रोग विभाग।