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उपलब्धि: आईआईएससी बेंगलुरु के साथ कुविवि करेगा शोध
Thu, 17 Apr 2025 02:15 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 17 Apr 2025 02:15 AM IST
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प्रतीकात्मक
नैनीताल। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) केंद्र सरकार के एएनआरएफ पेयर (पार्टनरशिप फॉर एकेडमिक एंड रिसर्च एडवांसमेंट) कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय को शामिल किया गया है। यह परियोजना इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी), बेंगलुरु की अगुवाई में संचालित की जाएगी।
100 करोड़ रुपये की इस मेगा शोध परियोजना में देशभर से 17 संस्थानों ने आईआईएससी के साथ मिलकर प्रस्ताव भेजे थे। आईआईएससी ने इनमें से सात संस्थानों को चयनित कर शोध समूह का गठन किया। इसमें कुमाऊं विश्वविद्यालय को भी शामिल किया गया। देशभर के कई समूहों ने इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया। इनमें से छह समूहों का चयन अंतिम रूप से किया गया।
इसमें बेंगलुरु विवि, आईआईईएसटी शिबपुर, एनआईटी नागालैंड, पांडिचेरी विवि, शिवाजी विवि और कालीकट विवि हैं। कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह परियोजना विवि की शोध पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करेगी। इससे विवि के शिक्षकों और छात्रों को देश के अग्रणी वैज्ञानिकों के साथ कार्य करने का मौका मिलेगा।
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इन क्षेत्रों में होगा शोध
- प्लास्टिक कचरा रिसाइकल, उच्च दक्षता वाले कार्बन नैनो मैटेरियल्स और टूडी नैनो मैटेरियल्स के साथ हाइब्रिड सुपर कैपेसिटर का विकास
- जैव-चिकित्सकीय अनुप्रयोगों हेतु मैग्नेटिक एवं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेस शील्डिंग मटेरियल्स
- कैंसर उपचार के लिए प्रभावशाली औषधि वितरण हेतु नैनो फॉर्मुलेशन का निर्माण
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100 करोड़ रुपये की इस मेगा शोध परियोजना में देशभर से 17 संस्थानों ने आईआईएससी के साथ मिलकर प्रस्ताव भेजे थे। आईआईएससी ने इनमें से सात संस्थानों को चयनित कर शोध समूह का गठन किया। इसमें कुमाऊं विश्वविद्यालय को भी शामिल किया गया। देशभर के कई समूहों ने इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया। इनमें से छह समूहों का चयन अंतिम रूप से किया गया।
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इसमें बेंगलुरु विवि, आईआईईएसटी शिबपुर, एनआईटी नागालैंड, पांडिचेरी विवि, शिवाजी विवि और कालीकट विवि हैं। कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह परियोजना विवि की शोध पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करेगी। इससे विवि के शिक्षकों और छात्रों को देश के अग्रणी वैज्ञानिकों के साथ कार्य करने का मौका मिलेगा।
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इन क्षेत्रों में होगा शोध
- प्लास्टिक कचरा रिसाइकल, उच्च दक्षता वाले कार्बन नैनो मैटेरियल्स और टूडी नैनो मैटेरियल्स के साथ हाइब्रिड सुपर कैपेसिटर का विकास
- जैव-चिकित्सकीय अनुप्रयोगों हेतु मैग्नेटिक एवं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेस शील्डिंग मटेरियल्स
- कैंसर उपचार के लिए प्रभावशाली औषधि वितरण हेतु नैनो फॉर्मुलेशन का निर्माण