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जाम में फंसे बीमार किसान ने टैक्सी में ही दम तोड़ दिया
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Mon, 23 Oct 2017 01:28 AM IST
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जाम में फंसे बीमार किसान ने टैक्सी में ही दम तोड़ दिया
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। गुलाबघाटी में दो ट्रकों के पलटने से सलड़ी-काठगोदाम मार्ग पर लगा तीन घंटे का जाम बीमार किसान के लिए भारी पड़ गया। घंटों जाम में फंसे रहने से उसकी सांसें फूल गईं और टैक्सी में ही दम तोड़ दिया। सांस की बीमारी का इलाज कराने के लिए परिजन उसे मुक्तेश्वर से हल्द्वानी ला रहे थे, लेकिन हालत बिगड़ने के कारण समय से इलाज नहीं मिल सका। जाम एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाई।
गहना मुक्तेश्वर निवासी 55 साल के तारादत्त जोशी सांस की बीमारी से पीड़ित थे। रविवार को तबियत ज्यादा बिगड़ने पर घर वाले उन्हें टैक्सी से हल्द्वानी के बेस अस्पताल में इलाज के लिए ला रहे थे। गुलाबघाटी में दो ट्रकों के पलटने से जाम लगा तो सलड़ी काठगोदाम मार्ग पर उनकी टैक्सी भी फंस गई। तीन घंटे से ज्यादा समय तक गाड़ी जाम में फंसे रहने से तारादत्त की हालत बिगड़ गई।
परिजनों ने गाड़ी वालों से मिन्नतें की ताकि टैक्सी को निकाल कर अस्पताल तक पहुंचाया जा सके, फिर भी जाम नहीं खुला। साथ में आए उनके दामाद विनोद शर्मा ने एंबुलेंस 108 को भी फोन किया लेकिन जाम की वजह से एंबुलेंस भी नहीं पहुंच सकी।
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काठगोदाम थाने में फोन किया तो पुलिस की नींद टूटी। कुछ देर बाद पहुंचे सिपाहियों ने आड़े-तिरछे खड़े वाहनों पर लाठी फटकारकर जाम खुलवाया। जब तक तारादत्त का शरीर ठंडा पड़ चुका था। परिजन उन्हें लेकर बेस अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
यह घटना बहुत दुखद है। गुलाबघाटी पर दो ट्रकों के पलटने से जाम लग गया था। पुलिस फोर्स इन ट्रकों को हटवाने में लगा थी, ताकि जाम खुल सके। एकल मार्ग होने के कारण यातायात व्यवस्थित करने में दिक्कत हुई।
- जन्मेजय खंडूरी, एसएसपी, नैनीताल
घंटों लगा जाम, मगर पुलिस बनी रही अनजान
हल्द्वानी। अवकाश के दिनों में नैनीताल और भीमताल जाने वाले मार्गों पर आए दिन जाम की हालत रहती है। रविवार को भी ट्रक पलटने की वजह से भी जाम विकट हो गया था। तीन-चार घंटे जाम लगने के बाद भी पुलिस को इसकी सुध नहीं थी। जब किसान के दामाद ने काठगोदाम थाने फोन किया तब पुलिस को होश आया।
दो एंबुलेंस भी फंसी थीं जाम में
हल्द्वानी। नियमों के अनुसार ट्रैफिक सिग्नल, चौराहों पर जाम में भी सबसे पहले एंबुलेंस को निकलने की तरजीह दी जाती है लेकिन सलड़ी-काठगोदाम मार्ग पर लगे जाम में दो-दो एंबुलेंस भी फंसी हुई थी। गनीमत यह थी कि इस एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म नहीं हुआ था।
भरापूरा परिवार छोड़ गए तारदात्त
हल्द्वानी। तारादत्त जोशी की छह बेटियां मंजू शर्मा, हेमा पलड़िया, दुर्गा जोशी, नीमा जोशी और भावना जोशी और एक बेटा भास्कर है। पत्नी का छह महीने पहले ही देहांत हुआ है।
मिन्नतें की मगर गाड़ियां नहीं हटीं
हल्द्वानी। तारादत्त जोशी के दामाद विनोद शर्मा ने बताया कि जैसे ही बाबू की तबियत बिगड़नी शुरू हुई टैक्सी निकालने के लिए आगे खड़ी गाड़ी वालों के हाथ जोड़े, लाख मिन्नतें की, लेकिन किसी ने भी नहीं सुनी। परिचितों को भी फोन लगाया। किसी तरह काठगोदाम थाना पुलिस का नंबर मिला। फिर पुलिस को फोन किया। उसके 15 से 20 मिनट बाद पुलिस आई और जाम खुलवाया। वाहनों ने धीरे-धीरे रेंगना शुरू किया तो गाड़ी बढ़ी, फिर भी बाबू को नहीं बचा सके। गांव में डॉक्टर और अस्पताल की कमी होने पर ही वह अच्छे इलाज के लिए हल्द्वानी लेकर आ रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि गाड़ियों का जाम ही उनके ससुर की जान ले लेगा।
हल्द्वानी। किसी रोगी को पूरे तीन घंटे तक उपचार से दूर रखना उसे मार देना ही हुआ। मुक्तेश्वर के तारादत्त जोशी के साथ यही हुआ। कहने वाले अब कहते रहें कि तारादत्त जोशी की मौत सांस की बीमारी के कारण हुई। हालात बता रहे हैं कि अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कुचक्र में फंसकर एक आदमी की जान गई। रविवार को सरेराह यह कत्ल इसी अव्यवस्था और कुप्रबंधन के हाथों हुआ, लेकिन न तो किसी ने मुकदमा दर्ज किया और न ही किसी ने मुकदमा दर्ज कराया।
भीमताल-काठगोदाम सड़क वैसे भी जाम के लिए जानी जाती है। इस सड़क पर एक दर्जन से अधिक ऐसे स्थान हैं जहां किसी न किसी न वजह से जाम लगता ही रहता है। पर्यटन सीजन में तो कई दिन इस सड़क पर वाहन रेंगते हैं। बरसात में गुलाबघाटी, रेशम बाड़ी, सलड़ी आदि स्थानों पर मलबा आने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। यह सड़क भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन है। सलड़ी में मार्ग चौड़ा कर दिया गया है। इतना होने पर भी यह सड़क करीब-करीब वन वे ही है।
अभी कुछ दिन पहले ही नैनीताल रूट पर वीरभट्टी पुल क्षतिग्रस्त हुआ था। यही रूट है जिससे अल्मोड़ा की ओर जाने वाले भारी वाहनों को भेजा जाता रहा है। पुल की मरम्मत का काम जारी है और इस कारण इस रूट का यातायात भी भीमताल सड़क पर मोड़ दिया गया। इसी का नतीजा है कि भीमताल-काठगोदाम सड़क पर यातायात का दबाव तीन गुना से अधिक हो गया है।
एकल मार्ग और सामान्य से तीन गुना अधिक यातायात। जाहिर है कि भीमताल मार्ग पर वाहन चालकों की थोड़ी सी लापरवाही भी जाम का कारण बन जाती है। रविवार को भी यही हुआ। रानीबाग पुल के पास ट्रक पलटने से नैनीताल और भीमताल सड़क का पूरा यातायात प्रभावित हो गया।
हद यह है कि यहां कई घंटे का जाम लगा रहा और जाम खुलवाने वाले नदारद रहे। यातायात प्रबंधन का जिम्मा पुलिस के पास है और अधिकारियों की मानें तो क्रेन की व्यवस्था करनें और फिर ट्रक को हटाने मेें समय लगा। यातायात को सुव्यवस्थित रखने के लिए पुलिस तत्परता का दावा तो कर रही है पर कई मजबूरियों को भी गिना रही है। पुलिस की इसी मजबूर व्यवस्था में एक आदमी दम तोड़ गया और अब कानून का हवाला देकर पुलिस कह रही है कि कोई मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता।
एंबुलेंस को पहले रास्ता पाने का अधिकार है। लेकिन, यहां क्या किया जा सकता था। एक तो सिंगल रोड, उस पर पुलिस के पास क्र्रेन की कमी है। दोपहर बाद 3.30 बजे गुलाबघाटी के पास ट्रक पलटने से यह जाम लगा। प्राइवेट आपरेटर से क्रेन का इंतजाम करने में समय तो लगता ही है। जाम में फंस कर किसी की मौत हो जाए तो मुकदमा दर्ज होने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
-जन्मेजय खंडूरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल
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गहना मुक्तेश्वर निवासी 55 साल के तारादत्त जोशी सांस की बीमारी से पीड़ित थे। रविवार को तबियत ज्यादा बिगड़ने पर घर वाले उन्हें टैक्सी से हल्द्वानी के बेस अस्पताल में इलाज के लिए ला रहे थे। गुलाबघाटी में दो ट्रकों के पलटने से जाम लगा तो सलड़ी काठगोदाम मार्ग पर उनकी टैक्सी भी फंस गई। तीन घंटे से ज्यादा समय तक गाड़ी जाम में फंसे रहने से तारादत्त की हालत बिगड़ गई।
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परिजनों ने गाड़ी वालों से मिन्नतें की ताकि टैक्सी को निकाल कर अस्पताल तक पहुंचाया जा सके, फिर भी जाम नहीं खुला। साथ में आए उनके दामाद विनोद शर्मा ने एंबुलेंस 108 को भी फोन किया लेकिन जाम की वजह से एंबुलेंस भी नहीं पहुंच सकी।
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काठगोदाम थाने में फोन किया तो पुलिस की नींद टूटी। कुछ देर बाद पहुंचे सिपाहियों ने आड़े-तिरछे खड़े वाहनों पर लाठी फटकारकर जाम खुलवाया। जब तक तारादत्त का शरीर ठंडा पड़ चुका था। परिजन उन्हें लेकर बेस अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
यह घटना बहुत दुखद है। गुलाबघाटी पर दो ट्रकों के पलटने से जाम लग गया था। पुलिस फोर्स इन ट्रकों को हटवाने में लगा थी, ताकि जाम खुल सके। एकल मार्ग होने के कारण यातायात व्यवस्थित करने में दिक्कत हुई।
- जन्मेजय खंडूरी, एसएसपी, नैनीताल
घंटों लगा जाम, मगर पुलिस बनी रही अनजान
हल्द्वानी। अवकाश के दिनों में नैनीताल और भीमताल जाने वाले मार्गों पर आए दिन जाम की हालत रहती है। रविवार को भी ट्रक पलटने की वजह से भी जाम विकट हो गया था। तीन-चार घंटे जाम लगने के बाद भी पुलिस को इसकी सुध नहीं थी। जब किसान के दामाद ने काठगोदाम थाने फोन किया तब पुलिस को होश आया।
दो एंबुलेंस भी फंसी थीं जाम में
हल्द्वानी। नियमों के अनुसार ट्रैफिक सिग्नल, चौराहों पर जाम में भी सबसे पहले एंबुलेंस को निकलने की तरजीह दी जाती है लेकिन सलड़ी-काठगोदाम मार्ग पर लगे जाम में दो-दो एंबुलेंस भी फंसी हुई थी। गनीमत यह थी कि इस एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म नहीं हुआ था।
भरापूरा परिवार छोड़ गए तारदात्त
हल्द्वानी। तारादत्त जोशी की छह बेटियां मंजू शर्मा, हेमा पलड़िया, दुर्गा जोशी, नीमा जोशी और भावना जोशी और एक बेटा भास्कर है। पत्नी का छह महीने पहले ही देहांत हुआ है।
मिन्नतें की मगर गाड़ियां नहीं हटीं
हल्द्वानी। तारादत्त जोशी के दामाद विनोद शर्मा ने बताया कि जैसे ही बाबू की तबियत बिगड़नी शुरू हुई टैक्सी निकालने के लिए आगे खड़ी गाड़ी वालों के हाथ जोड़े, लाख मिन्नतें की, लेकिन किसी ने भी नहीं सुनी। परिचितों को भी फोन लगाया। किसी तरह काठगोदाम थाना पुलिस का नंबर मिला। फिर पुलिस को फोन किया। उसके 15 से 20 मिनट बाद पुलिस आई और जाम खुलवाया। वाहनों ने धीरे-धीरे रेंगना शुरू किया तो गाड़ी बढ़ी, फिर भी बाबू को नहीं बचा सके। गांव में डॉक्टर और अस्पताल की कमी होने पर ही वह अच्छे इलाज के लिए हल्द्वानी लेकर आ रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि गाड़ियों का जाम ही उनके ससुर की जान ले लेगा।
हल्द्वानी। किसी रोगी को पूरे तीन घंटे तक उपचार से दूर रखना उसे मार देना ही हुआ। मुक्तेश्वर के तारादत्त जोशी के साथ यही हुआ। कहने वाले अब कहते रहें कि तारादत्त जोशी की मौत सांस की बीमारी के कारण हुई। हालात बता रहे हैं कि अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कुचक्र में फंसकर एक आदमी की जान गई। रविवार को सरेराह यह कत्ल इसी अव्यवस्था और कुप्रबंधन के हाथों हुआ, लेकिन न तो किसी ने मुकदमा दर्ज किया और न ही किसी ने मुकदमा दर्ज कराया।
भीमताल-काठगोदाम सड़क वैसे भी जाम के लिए जानी जाती है। इस सड़क पर एक दर्जन से अधिक ऐसे स्थान हैं जहां किसी न किसी न वजह से जाम लगता ही रहता है। पर्यटन सीजन में तो कई दिन इस सड़क पर वाहन रेंगते हैं। बरसात में गुलाबघाटी, रेशम बाड़ी, सलड़ी आदि स्थानों पर मलबा आने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। यह सड़क भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन है। सलड़ी में मार्ग चौड़ा कर दिया गया है। इतना होने पर भी यह सड़क करीब-करीब वन वे ही है।
अभी कुछ दिन पहले ही नैनीताल रूट पर वीरभट्टी पुल क्षतिग्रस्त हुआ था। यही रूट है जिससे अल्मोड़ा की ओर जाने वाले भारी वाहनों को भेजा जाता रहा है। पुल की मरम्मत का काम जारी है और इस कारण इस रूट का यातायात भी भीमताल सड़क पर मोड़ दिया गया। इसी का नतीजा है कि भीमताल-काठगोदाम सड़क पर यातायात का दबाव तीन गुना से अधिक हो गया है।
एकल मार्ग और सामान्य से तीन गुना अधिक यातायात। जाहिर है कि भीमताल मार्ग पर वाहन चालकों की थोड़ी सी लापरवाही भी जाम का कारण बन जाती है। रविवार को भी यही हुआ। रानीबाग पुल के पास ट्रक पलटने से नैनीताल और भीमताल सड़क का पूरा यातायात प्रभावित हो गया।
हद यह है कि यहां कई घंटे का जाम लगा रहा और जाम खुलवाने वाले नदारद रहे। यातायात प्रबंधन का जिम्मा पुलिस के पास है और अधिकारियों की मानें तो क्रेन की व्यवस्था करनें और फिर ट्रक को हटाने मेें समय लगा। यातायात को सुव्यवस्थित रखने के लिए पुलिस तत्परता का दावा तो कर रही है पर कई मजबूरियों को भी गिना रही है। पुलिस की इसी मजबूर व्यवस्था में एक आदमी दम तोड़ गया और अब कानून का हवाला देकर पुलिस कह रही है कि कोई मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता।
एंबुलेंस को पहले रास्ता पाने का अधिकार है। लेकिन, यहां क्या किया जा सकता था। एक तो सिंगल रोड, उस पर पुलिस के पास क्र्रेन की कमी है। दोपहर बाद 3.30 बजे गुलाबघाटी के पास ट्रक पलटने से यह जाम लगा। प्राइवेट आपरेटर से क्रेन का इंतजाम करने में समय तो लगता ही है। जाम में फंस कर किसी की मौत हो जाए तो मुकदमा दर्ज होने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
-जन्मेजय खंडूरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल