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नए हाथी कॉरिडोर की होगी तलाश
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रामनगर (नैनीताल)। हाथियों के स्वच्छंद विचरण के लिए नए हाथी कॉरिडोर की तलाश की जा रही है। रामनगर वन प्रभाग हाथियों के कॉरिडोर को तलाशेगा और पुराने हाथी कॉरिडोर में आने वाले अवरूद्ध को भी दूर करेगा। हाथी कॉरिडोर की तलाश के लिए वन कर्मियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
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हाथी कॉरिडोर यानि एक ऐसा गलियारा या रास्ता जहां बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के हाथी एक जगह से दूसरी जगह स्वच्छंद रूप से विचरण कर सकें। बढ़ता शहरीकरण, फैलता सड़कों का जाल और सिकुड़ते जंगलों के कारण वर्तमान में सबसे बड़ा संकट वन्य जीवों के स्वच्छंद विचरण पर आ खड़ा हुआ है, इसीलिए हाथी कॉरिडोर बनाने की योजना सामने आई थी। दक्षिण पतली दून-चिलकिया कॉरिडोर, जो कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और रामनगर वन प्रभाग के बीच पड़ता है। चिलकिया-कोटा और कोट-मैलामी कॉरिडोर, जो रामनगर वन प्रभाग का हिस्सा हैं।फतेहपुर-गदगरिया, गौला रौखड़-गौराई टांडा, किलपुरा-खटीमा-सुरई हाथी कॉरिडोर, ये रामनगर वन प्रभाग और तराई सेंट्रल, तराई ईस्ट वन प्रभाग में हैं। अन्य हाथी कॉरिडोर के लिए नए कॉरिडोर को भी तलाशा जा रहा है और उनका चिन्हिकरण होगा। हाथियों के रूट को जाने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे और हाथियों के झुंड पर नजर रहेगी। इसके अलावा अकेले घूम रहे हाथियों पर नजर रखी जाएगी। रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि हाथियों के रूट में बदलाव देखे जा रहे हैं। पुराने हाथी कॉरिडोर के अलावा हाथियों ने अपने नए रूट बना लिए हैं। ऐसे में हाथियों के रूट को तलाशने और उनके कॉरिडोर को चिन्हित किया जाएगा। लोगों के अतिक्रमण किए जाने या कोई अवरुद्ध होने की वजह से हाथी अपना रूट बदल देता है। रूट पता लगते ही आए अतिक्रमण को हटाया जाएगा।
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