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एक बीड़ी से लगी आग ने तबाह कर दीं 12 झोपड़ियां
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हल्द्वानी बरेली रोड गौला बाईपास रोड स्थितआंवलागेट पर मजदूरों के झोपड़ियों में लगी आग से जली साई?
- फोटो : HALDWANI
हल्द्वानी। आंवला गेट वन चौकी के पास बीड़ी से लगी आग से 12 झोपड़ियां जल गईं। बाइक, साइकिल, बिस्तर, फ्रिज सहित लाखों का सामान जल गया।
आंवला गेट वन चौकी के पास शाहिद, जोरावर मौर्या, अवधेश सक्सेना, धनवीर सक्सेना, टिंकू सक्सेना, निक्की ठाकुर, ज्ञानती और नरवीर की झोपड़ियों हैं। सोमवार दोपहर इनमें आग लग गई। बनभूलपुरा थानाध्यक्ष सुशील कुमार और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। तब तक आग काफी फैल चुकी थी।
घटना के वक्त मजदूर परिवार गौला नदी में काम कर रहे थे। फायर बिग्रेड ने तीन गाड़ियों की मदद से आग को काबू किया। आग से झोपड़ियों के पास रखी बाइक, तीन साइकिलें, दो रिक्शे, रजाई-गद्दे, अनाज, पैसे, फ्रिज, कूलर सहित लाखों का सामान नष्ट हो गया। टिंकू ने बताया कि उनकी छह झोपड़ियां जल गईं। धनवीर का सामान दो झोपड़ियों में रखा था। आग बुझाने वाली टीम में हेड कांस्टेबल श्याम सिंह, अर्जुन, प्रकाश कांडपाल, नरेंद्र मेहरा, प्रकाश आदि शामिल थे।
दिव्यांग को बचाया, एक बेहोश
हल्द्वानी। स्थानीय निवासी शाहिद की दिव्यांग बेटी महविश आग के बीच फंस गई थी। इस बीच उसके भाई सोहेल ने तुरंत कूदकर किसी तरह उसे बाहर निकाला। झोपड़ी को जलता देख अवधेश बेहोश होकर गिर पड़े। परिवार के लोगों ने उनको दूसरी जगह चारपाई पर लेटाया। सोहेल ने बताया कि उसने बहन की शादी के लिए 52 हजार के जेवरात बनाए थे जो आग से तबाह हो गए। काफी देर तक लोग राख के बीच जेवरात ढूंढते रहे लेकिन वे नहीं मिले।
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एक बीड़ी ने उजाड़ दी गरीबों की दुनिया
हल्द्वानी। पुलिस की पूछताछ से पता चला कि किसी ने बीड़ी पीकर अवधेश की झोपड़ी में रखे भूसे पर फेंक दी। जिससे धीरे-धीरे आग सुलग गई और झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के दौरान सिर्फ दो तीन लोग ही झोपड़ी में थे। पीड़ित ज्ञानती का कहना था कि उनका बिस्तर, राशन सब कुछ जल गया। वहीं सावित्री भी अपने दो बच्चों के साथ परेशान थीं। जोरावर का कहना था कि रात जमीन पर गुजरानी पड़ेगी।
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आंवला गेट वन चौकी के पास शाहिद, जोरावर मौर्या, अवधेश सक्सेना, धनवीर सक्सेना, टिंकू सक्सेना, निक्की ठाकुर, ज्ञानती और नरवीर की झोपड़ियों हैं। सोमवार दोपहर इनमें आग लग गई। बनभूलपुरा थानाध्यक्ष सुशील कुमार और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। तब तक आग काफी फैल चुकी थी।
घटना के वक्त मजदूर परिवार गौला नदी में काम कर रहे थे। फायर बिग्रेड ने तीन गाड़ियों की मदद से आग को काबू किया। आग से झोपड़ियों के पास रखी बाइक, तीन साइकिलें, दो रिक्शे, रजाई-गद्दे, अनाज, पैसे, फ्रिज, कूलर सहित लाखों का सामान नष्ट हो गया। टिंकू ने बताया कि उनकी छह झोपड़ियां जल गईं। धनवीर का सामान दो झोपड़ियों में रखा था। आग बुझाने वाली टीम में हेड कांस्टेबल श्याम सिंह, अर्जुन, प्रकाश कांडपाल, नरेंद्र मेहरा, प्रकाश आदि शामिल थे।
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दिव्यांग को बचाया, एक बेहोश
हल्द्वानी। स्थानीय निवासी शाहिद की दिव्यांग बेटी महविश आग के बीच फंस गई थी। इस बीच उसके भाई सोहेल ने तुरंत कूदकर किसी तरह उसे बाहर निकाला। झोपड़ी को जलता देख अवधेश बेहोश होकर गिर पड़े। परिवार के लोगों ने उनको दूसरी जगह चारपाई पर लेटाया। सोहेल ने बताया कि उसने बहन की शादी के लिए 52 हजार के जेवरात बनाए थे जो आग से तबाह हो गए। काफी देर तक लोग राख के बीच जेवरात ढूंढते रहे लेकिन वे नहीं मिले।
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एक बीड़ी ने उजाड़ दी गरीबों की दुनिया
हल्द्वानी। पुलिस की पूछताछ से पता चला कि किसी ने बीड़ी पीकर अवधेश की झोपड़ी में रखे भूसे पर फेंक दी। जिससे धीरे-धीरे आग सुलग गई और झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के दौरान सिर्फ दो तीन लोग ही झोपड़ी में थे। पीड़ित ज्ञानती का कहना था कि उनका बिस्तर, राशन सब कुछ जल गया। वहीं सावित्री भी अपने दो बच्चों के साथ परेशान थीं। जोरावर का कहना था कि रात जमीन पर गुजरानी पड़ेगी।