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महिला सशक्तीकरण के लिए सकारात्मक सोच जरूरी
Sun, 13 Jan 2019 02:11 AM IST
yashwant yashwant
ब्यूरो/अमर उजाला/नैनीताल
ब्यूरो/अमर उजाला/नैनीताल
Published by: yashwant yashwant
Updated Sun, 13 Jan 2019 02:11 AM IST
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हल्द्वानी में अपराजिता कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
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महिला सशक्तीकरण के लिए संस्कारों के साथ ही बेहतर शिक्षा और महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच का होना जरूरी है। उन्हें अच्छे संस्कारों के साथ ही सामाजिक मान मर्यादाओं से ऊपर की सोच रखने की जरूरत है। महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के साथ ही कुछ मामलों में महिलाओं को भी अपने अधिकारों का नाजायज इस्तेमाल करने से परहेज करना होगा।
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यह बात अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित संवाद कार्यक्रम में शहर के उद्यमी, शिक्षा जगत और कारोबार से जुड़ी महिलाओं ने कही। उन्होंने लचर कानून व्यवस्था, महिला अपराधों के मामलों में कठोर दंड का प्रावधान नहीं होने को भी महिला उत्पीड़न के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार ठहराया। नशा, दहेज प्रथा और दहेज हत्या के लिए जिम्मेदार बताया। बेटा, बेटी में भेदभाव के लिए बेटी में बचपन से ही समाज को लेकर भय पैदा करने की पारिवारिक धारणा को भी अहम बताया। वक्ताओं ने बच्चों को जन्म से ही अच्छे संस्कार देने पर जोर दिया।
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महिला सशक्तीकरण के लिए महिला और पुरुष को एक दूसरे का पूरक मानते हुए समानुपातिक व्यवहार किए जाने की जरूरत बताई। महिलाओं को भी इस सोच से ऊपर उठने की जरूर है कि वह नौकरी ही करेगी और घर का काम नहीं करेगी। घर के सभी सदस्यों के साथ बराबरी का व्यवहार करते हुए सभी को समान रूप से काम में हाथ बंटाना चाहिए। कार्यक्रम में भूमिका भंडारी अग्रवाल, मेघा पाठक, मोहनी जोशी, दिव्या खंडेलवाल, दीप्ति जोशी, मीनू रावत, पूजा साह, भावना महरा, भावना कैड़ा, सीके अमोला, दीप्ति मित्तल, दीप्ति भट्ट, मीनाक्षी राणा, खुशबू थापा ने विचार रखे।
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