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डेढ़ माह में 90 लाख क्विंटल धान खरीद शक के दायरे में

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 23 Nov 2019 01:54 AM IST
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90 lakh quintals of paddy purchase in a month and a half
90 lakh quintals of paddy purchase in a month and a half - फोटो : dhan21.jpg
हल्द्वानी। प्रदेश में पांच महीने में 5.5 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य के विपरीत कमीशन एजेंटों ने करीब डेढ़ महीने में ही कुमाऊं में नौ लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का कारनामा कर दिया। तय समय के तिहाई हिस्से में ही लक्ष्य से करीब दोगुनी खरीद से खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के अफसरों के कान खड़े हो गए। कमीशन एजेंट और राइस मिलें शक के दायरे में आईं तो संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी), कुमाऊं ने धान खरीद बंद कराने के साथ ही इस मामले में जांच बैठा दी है।
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शासन ने धान खरीद नीति में कमीशन एजेंट से धान खरीद का लक्ष्य 5.5 लाख मीट्रिक टन रखा था। इसमें से कुमाऊं रीजन को पांच लाख मीट्रिक टन और गढ़वाल रीजन को 0.5 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य दिया था। इसकी समय सीमा एक अक्तूबर से 28 फरवरी तक रखी गई थी, लेकिन डेढ़ माह में ही कुमाऊं के कमीशन एजेंटों ने 90 लाख क्विंटल (नौ लाख मीट्रिक टन) धान खरीद लिया।
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धान खरीद मानकों से अधिक होने पर खरीद शक के दायरे में आ गई है। इसके मद्देनजर आरएफसी कुमाऊं ललित मोहन रयाल ने धान खरीद रोकते हुए मामले की जांच बैठा दी है। जांच शुरू होते ही मिलों में खलबली मची है।
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मिलों का स्टाक वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। इसके लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। धान खरीद नीति में स्टॉक वेरिफिकेशन कराने का प्रावधान है। विसंगति पाए जाने पर मिलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -ललित मोहन रयाल, आरएफसी कुमाऊं
कमीशन के चक्कर में खेल होने की आशंका
हल्द्वानी। सरकार की नीति के तहत कमीशन एजेंट किसानों से धान खरीदकर राज्य सरकार को देते हैं। इस खरीद के बदले राज्य सरकार कमीशन एजेंट को एक निश्चित कमीशन देती है। संदेह है कि कमीशन एजेंटों ने कागजों में धान खरीद दिखाई है, हकीकत में इतनी खरीद हुई नहीं है।

बाहरी एजेंसी करे धान खरीद की जांच तो सामने आ सकता है घोटाला
डेढ़ माह में धान खरीद मानकों से अधिक होने पर धान खरीद शक के दायरे में हैं। धान खरीद नीति में धान खरीद के लिए बोली लगाना अनिवार्य है। सवाल ये है कि इतनी अधिक मात्रा में धान मंडियों में आया कैसे? इसकी बोली कहां हुई? इन सबकी जांच अगर बाहरी एजेंसी से कराई जाए तो बड़ा घपला सामने आ सकता है।
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