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प्रमुख वन संरक्षक ने किया नए गेट का शुभारंभ

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Apr 2019 02:45 AM IST
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प्रमुख वन संरक्षक ने किया नए गेट का शुभारंभ
प्रमुख वन संरक्षक ने किया नए गेट का शुभारंभ - फोटो : अमर उजाला
रामनगर (नैनीताल)। पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व (पीसीआर) के सीतावनी जोन में सोमवार से पवलगढ़ गेट से भी पर्यटकों की एंट्री होने लगी है। प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इस गेट का उद्घाटन किया। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर पांच जिप्सियों को सीतावनी के लिए रवाना किया। जंगल को कचरे से मुक्त करने में सहयोग मांगा। इसके लिए जंगल सफारी के लिए जा रहे पर्यटकों को कपड़े के बैग बांटे। लौटते समय बैग गेट पर जमा कराने और जंगल में पॉलीथीन न फेंकने को कहा।
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पीसीसीएफ जयराज तय समय से करीब दो घंटे की देरी से पवलगढ़ पहुंचे। स्थानीय महिलाओं ने स्वागत गीत गाकर उनका स्वागत किया। नए गेट के उद्घाटन के दौरान सीसीएफ कुमाऊं विवेक पांडेय, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते, सीटीआर के निदेशक राहुल, तराई पश्चिमी के डीएफओ हिमांशु बागरी, रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ बीपी सिंह सहित कई वनाधिकारी मौजूद रहे।
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प्रमुख वन संरक्षक ने किया पवलगढ़ गेट का उद्घाटन
पूजा-पाठ, मंत्रोचार के साथ आयोजित हुआ कार्यक्रम
नए गेट खुलने की प्रमुख वन संरक्षक ने लोगों को दी बधाई


हथिनियों के लिए आमडंडा डिपो अस्थायी कैंप : जयराज
रामनगर (नैनीताल)। पिछले साल रिजॉर्ट से छुड़ाई गई हथिनियों को यहां आमडंडा कैंप में रखा गया है लेकिन वाइल्ड लाइफ की गाइडलाइन के मुताबिक वह स्थान हथिनियों के लिए उपयुक्त नहीं है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने भी यह बात स्वीकारी। बताया कि आमडंडा केवल अस्थायी कैंप है। अभी इन हथिनियों के स्वामित्व का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बावजूद विभाग हथिनियों को बेहतर सुविधा देने के लिए सुरक्षित, सुविधायुक्त स्थान की तलाश कर रहा है। सीतावनी के बाद अब तराई पश्चिमी वन प्रभाग फांटो रेंज के जंगल को भी पर्यटन जोन बनाने की कवायद चल रही है।
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यहां पवलगढ़ में हुई बातचीत में पीसीसीएफ ने कहा कि यूपी में एक बाघिन के पेट से पॉलीथीन निकलने के बाद से उत्तराखंड के वन कर्मियों को भी सतर्क किया गया। इसीलिए पर्यटकों भी जंगल में कूड़ा न फेंकने की सलाह दी जा रही है। पिछले दिनों गढ़वाल मंडल में रेल की चपेट में आकर दो हाथियों की मौत के मामले में रेलवे के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। ऐसे हादसे रोकने के लिए पुख्ता उपाय किए जाएंगे। वन्यजीवों के वासस्थल वाले जंगलों में फैल रही लैंटाना घास को खत्म करने के लिए विभाग कार्य कर रहा है। लैंटाना घास से तेल निकालने, फर्नीचर बनाने की तैयारी है। विभाग इसका व्यावसायिक उपयोग तलाश रहा है।

बेहतर सुविधा वाले अलग स्थान की तलाश जारी
फांटो को भी अलग पर्यटन जोन बनाने की कवायद की जा रही
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