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प्रसूता को नहीं उपलब् ध कराई खुशियों की सवारी
Updated Tue, 04 Sep 2018 01:16 AM IST
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हल्द्वानी। रोडवेज के सार्वजनिक शौचालय में नवजात को जन्म देने वाली हेमा परगाईं के परिजनों ने महिला अस्पताल प्रबंधन पर फिर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। हेमा को अस्पताल से डिस्चार्ज करने के बाद घर जाने के लिए वाहन नहीं दिलाया गया जबकि प्रसूता को घर छोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने खुशियों की सवारी वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई है।
चोरगलिया निवासी भुवन चंद्र परगाईं की पत्नी ने शनिवार को रोडवेज के सार्वजनिक शौचालय में नवजात को जन्म दिया था। परिजनों ने कहा कि किसी तरह हेमा और नवजात को महिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन तीन घंटे बाद ही चिकित्सकों ने नवजात को हायर सेंटर ले जाने को कहा। वह नवजात को लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचा, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजनों ने महिला अस्पताल में लापरवाही को लेकर हंगामा भी किया था। रविवार को भी प्रसूता महिला अस्पताल में भर्ती है। परिजनों का आरोप है कि दर्द की शिकायत के बाद भी ढंग से इलाज नहीं किया गया। रात को ही हेमा के बेड पर एक और महिला को लिटा दिया गया। विरोध करने पर बेड की कमी बताई गई हालांकि सुबह दूसरी महिला को हटा दिया गया। परिजनों ने दवाएं भी बाहर से मंगाने का आरोप लगाया। सोमवार को अस्पताल से छुट्टी देने के बाद घर ले जाने के लिए वाहन तक नहीं दिलाया गया। इस कारण हेमा को लेकर पति रोडवेज पर बस के इंतजार में काफी देर तक भटकता रहा।
प्रसूता को घर भेजने को नहीं उपलब्ध कराया वाहन
खुशियों की सवारी निशुल्क उपलब्ध कराने का है नियम
पति-पत्नी रोडवेज पर बस के लिए भटकते रहे
खुशियों की सवारी पात्र महिलाओं को उपलब्ध कराई जाती है। शहर में तीन-चार वाहन हैं जो कि एसटीएच और महिला अस्पताल से प्रसूता को घर छोड़ने जाते हैं। वाहन खाली होने के बाद तत्काल दूसरे को उपलब्ध कराया जाता है। स्टाफ को वाहन उपलब्ध कराने को कहा गया था।
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- डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमएस, महिला अस्पताल, हल्द्वानी।
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चोरगलिया निवासी भुवन चंद्र परगाईं की पत्नी ने शनिवार को रोडवेज के सार्वजनिक शौचालय में नवजात को जन्म दिया था। परिजनों ने कहा कि किसी तरह हेमा और नवजात को महिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन तीन घंटे बाद ही चिकित्सकों ने नवजात को हायर सेंटर ले जाने को कहा। वह नवजात को लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचा, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजनों ने महिला अस्पताल में लापरवाही को लेकर हंगामा भी किया था। रविवार को भी प्रसूता महिला अस्पताल में भर्ती है। परिजनों का आरोप है कि दर्द की शिकायत के बाद भी ढंग से इलाज नहीं किया गया। रात को ही हेमा के बेड पर एक और महिला को लिटा दिया गया। विरोध करने पर बेड की कमी बताई गई हालांकि सुबह दूसरी महिला को हटा दिया गया। परिजनों ने दवाएं भी बाहर से मंगाने का आरोप लगाया। सोमवार को अस्पताल से छुट्टी देने के बाद घर ले जाने के लिए वाहन तक नहीं दिलाया गया। इस कारण हेमा को लेकर पति रोडवेज पर बस के इंतजार में काफी देर तक भटकता रहा।
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प्रसूता को घर भेजने को नहीं उपलब्ध कराया वाहन
खुशियों की सवारी निशुल्क उपलब्ध कराने का है नियम
पति-पत्नी रोडवेज पर बस के लिए भटकते रहे
खुशियों की सवारी पात्र महिलाओं को उपलब्ध कराई जाती है। शहर में तीन-चार वाहन हैं जो कि एसटीएच और महिला अस्पताल से प्रसूता को घर छोड़ने जाते हैं। वाहन खाली होने के बाद तत्काल दूसरे को उपलब्ध कराया जाता है। स्टाफ को वाहन उपलब्ध कराने को कहा गया था।
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- डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमएस, महिला अस्पताल, हल्द्वानी।