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तो जिला योजना की बैठकों में शामिल होंगे छावनी परिषद के प्रतिनिधि
Updated Thu, 07 Dec 2017 11:14 PM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। सब कुछ ठीक रहा तो छावनी परिषद के प्रतिनिधि भी जिला योजना की बैठकों में शामिल हो सकेंगे। दरअसल, प्रदेश में नौ छावनी परिषदें हैं, लेकिन यहां के प्रतिनिधि जिला योजना की बैठकों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, जिसके चलते छावनी क्षेत्र में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह मांग लंबे समय से उठती रही है। अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस संबंध में सार्थक कार्रवाई करने को कहा है।
राज्य बनने से पहले तक छावनी क्षेत्रों में राज्य सरकार, विधायक और सांसदों की विधायक निधि से विकास कार्य नहीं हो पाते थे। छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने बताया कि 2006 में संशोधित छावनी अधिनियम में छावनी क्षेत्र में राज्य सरकार मद से विकास कार्यों कराने की व्यवस्था कर दी गई है। रानीखेत छावनी को ड्रीम्ड नगर पालिका का दर्जा भी मिल चुका है। उन्होंने बताया कि जिला योजना की बैठकों में छावनी परिषद के चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जा रहा है। जिस कारण छावनी क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने पूर्ववर्ती राज्य सरकार को भी ज्ञापन भेजकर इस संबंध में सार्थक कार्रवाई करने की मांग उठाई थी, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई। प्रदेश में रानीखेत, अल्मोड़ा, नैनीताल, चकरौता, देहरादून, लैंसडौन, रुड़की, लंढौर और मसूरी छावनी परिषदें हैं। यदि जिला योजना की बैठकों में छावनी उपाध्यक्ष और सदस्यों को शामिल करने की अनुमति मिल जाती है तो छावनी क्षेत्र में राज्य सरकार मद से कार्य हो सकेंगे।
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राज्य बनने से पहले तक छावनी क्षेत्रों में राज्य सरकार, विधायक और सांसदों की विधायक निधि से विकास कार्य नहीं हो पाते थे। छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने बताया कि 2006 में संशोधित छावनी अधिनियम में छावनी क्षेत्र में राज्य सरकार मद से विकास कार्यों कराने की व्यवस्था कर दी गई है। रानीखेत छावनी को ड्रीम्ड नगर पालिका का दर्जा भी मिल चुका है। उन्होंने बताया कि जिला योजना की बैठकों में छावनी परिषद के चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जा रहा है। जिस कारण छावनी क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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उन्होंने पूर्ववर्ती राज्य सरकार को भी ज्ञापन भेजकर इस संबंध में सार्थक कार्रवाई करने की मांग उठाई थी, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई। प्रदेश में रानीखेत, अल्मोड़ा, नैनीताल, चकरौता, देहरादून, लैंसडौन, रुड़की, लंढौर और मसूरी छावनी परिषदें हैं। यदि जिला योजना की बैठकों में छावनी उपाध्यक्ष और सदस्यों को शामिल करने की अनुमति मिल जाती है तो छावनी क्षेत्र में राज्य सरकार मद से कार्य हो सकेंगे।
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