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दिव्यांग पूर्व सैनिक की पेंशन में लग गए तीन साल
Updated Tue, 07 Nov 2017 02:18 AM IST
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हल्द्वानी। अपने हाथ पैर हैं तो सब संभव है वर्ना हर जगह धक्के खाने पड़ते हैं। दिव्यांग पूर्व सैनिक त्रिलोक सिंह के साथ भी यही हुआ। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) में भर्ती हुए मगर पक्षाघात होने के कारण उन्हें यहां से 2014 में सेवानिवृत्त होना पड़ा था। तब से उन्हें पेंशन नहीं मिली। वह दिव्यांग थे भागदौड़ नहीं कर पाए। पत्नी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी तक बात पहुंचाई तो पता चला कि उनकी पेंशन अल्मोड़ा में फाइलों में कैद हैं। बैंक खाता ही नहीं खुला था। अब उनके खाते में पेंशन आई है।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर (अप्रा) बीएस रौतेला ने बताया कि डीएससी मुख्यालय में पूर्व सैनिक त्रिलोक सिंह का पता बागेश्वर जिले के कांटा का दर्ज था। इसी कारण ट्रेजरी कार्यालय से पेंशन पट्टा अल्मोड़ा कार्यालय भेज दिया गया। कार्यालय के लोगों ने बताया कि चूंकि कागज में बैंक खाते का जिक्र नहीं था। इसी कारण पेंशन राशि नहीं निर्गत की गई। इधर पूर्व सैनिक की पत्नी गोविंदी देवी पति के इलाज के लिए दिल्ली से लेकर हल्द्वानी तक भागदौड़ करती रही। एक तरफ पांच बच्चों का खर्च और दूसरी तरफ पति की दवा का खर्च जुटाने के लिए रिश्तेदारों से सहयोग लेना पड़ा। काफी दिनों से बंद पड़ी पेंशन चालू कराने के लिए एक रिश्तेदार ने सैनिक कल्याण कार्यालय जाने की सलाह दी। इसके बाद गोविंदी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी से संपर्क किया। जांच के बाद पता चला कि पेंशन अल्मोड़ा से रुकी है। मेजर बीएस रौतेला की सलाह पर गोविंदी ने काठगोदाम बैंक आफ बड़ौदा में पति के नाम पर खाता खोला। लिखा पढ़ी के बाद पेंशन राशि नैनीताल भेजने की स्वीकृति मिली।
पति के इलाज को मिली मदद
गोविंदी देवी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला का आभार जताते हुए बताया कि अब उनके पति की दवा अच्छे ढंग से हो रही है। वह जल्द ही चलने-फिरने लगेंगे।
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रुकी पेंशन मिली
हल्द्वानी। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि दस महीने के दौरान जिले के विभिन्न बैंकों को पूर्व सैनिकों की पेंशन के बाबत 181 प्रार्थनापत्र भेजे गए। अभी तक 50 फीसद लोगों को पेंशन मिल चुकी हैं। अन्य लोगों के मामले में पत्राचार जारी है। पूर्व सैनिकों की 71 शिकायतें भारतीय स्टेट बैंक, 75 बैंक आफ बड़ौदा, 20 शिकायतें पंजाब नेशनल बैंक और अन्य बैंकों को 15 शिकायतें भेजी गई हैं। 91 का निस्तारण हो चुका है।
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जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर (अप्रा) बीएस रौतेला ने बताया कि डीएससी मुख्यालय में पूर्व सैनिक त्रिलोक सिंह का पता बागेश्वर जिले के कांटा का दर्ज था। इसी कारण ट्रेजरी कार्यालय से पेंशन पट्टा अल्मोड़ा कार्यालय भेज दिया गया। कार्यालय के लोगों ने बताया कि चूंकि कागज में बैंक खाते का जिक्र नहीं था। इसी कारण पेंशन राशि नहीं निर्गत की गई। इधर पूर्व सैनिक की पत्नी गोविंदी देवी पति के इलाज के लिए दिल्ली से लेकर हल्द्वानी तक भागदौड़ करती रही। एक तरफ पांच बच्चों का खर्च और दूसरी तरफ पति की दवा का खर्च जुटाने के लिए रिश्तेदारों से सहयोग लेना पड़ा। काफी दिनों से बंद पड़ी पेंशन चालू कराने के लिए एक रिश्तेदार ने सैनिक कल्याण कार्यालय जाने की सलाह दी। इसके बाद गोविंदी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी से संपर्क किया। जांच के बाद पता चला कि पेंशन अल्मोड़ा से रुकी है। मेजर बीएस रौतेला की सलाह पर गोविंदी ने काठगोदाम बैंक आफ बड़ौदा में पति के नाम पर खाता खोला। लिखा पढ़ी के बाद पेंशन राशि नैनीताल भेजने की स्वीकृति मिली।
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पति के इलाज को मिली मदद
गोविंदी देवी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला का आभार जताते हुए बताया कि अब उनके पति की दवा अच्छे ढंग से हो रही है। वह जल्द ही चलने-फिरने लगेंगे।
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रुकी पेंशन मिली
हल्द्वानी। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि दस महीने के दौरान जिले के विभिन्न बैंकों को पूर्व सैनिकों की पेंशन के बाबत 181 प्रार्थनापत्र भेजे गए। अभी तक 50 फीसद लोगों को पेंशन मिल चुकी हैं। अन्य लोगों के मामले में पत्राचार जारी है। पूर्व सैनिकों की 71 शिकायतें भारतीय स्टेट बैंक, 75 बैंक आफ बड़ौदा, 20 शिकायतें पंजाब नेशनल बैंक और अन्य बैंकों को 15 शिकायतें भेजी गई हैं। 91 का निस्तारण हो चुका है।