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75 साल पुराना कोई भी दस्तावेज पांडुलिपि

Thu, 05 Feb 2015 01:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,नैनीताल
ब्यूरो/अमर उजाला,नैनीताल Updated Thu, 05 Feb 2015 01:50 AM IST
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75-year-old manuscript of any document

राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सहयोग और हिमालयन सोसायटी फार हैरिटेज एंड आर्ट कंजरवेशन की ओर से चल रही पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

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मास्टर ट्रेनर ललित पाठक ने बताया कि कई लोग पांडुलिपि का सही अर्थ नहीं समझ पाते हैं। पांडु का आशय है एक पीले रंग की खड़िया। संभवतया पूर्व में खड़िया से लेखन कार्य होता हो और इसीलिए इसे पांडु नाम दिया गया। जब यह भोजपत्र आदि में लिखित दस्तावेज के रूप में सामने आया तो इसे पांडुलिपि नाम दिया गया।
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प्रोजेक्ट समन्वयक संजय साह ने बताया कि किसी भी राष्ट्रीय महत्व के हस्तलिखित दस्तावेज की उम्र 75 साल होने पर उसे पांडुलिपि कहा जाता है। यह भारत सरकार के इंडियन आर्ट एंड ट्रेजर एक्ट में दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की पांडुलिपि की परंपरा को कल्सी अभिषेक (अशोक स्तंभ) 273 से 232 ईसवी तक माना जाता है।

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