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वनवासियों के सहयोग से हो सकता है वनों का संरक्षण
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Indian Forest Service
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नैनीताल। उत्तराखंड प्रशासन अकादमी (एटीआई) में गुड गवर्नेंस विषय पर पांच दिनी कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें कई राज्यों से आए आईएफएस अधिकारियों को व्यावहारिक पहलू बताए गए। इसके समापन सत्र में शुक्रवार को चिपको आंदोलन से जुड़े पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि वनवासियों के सहयोग से ही वन संरक्षण हो सकता है।
भट्ट ने कहा कि जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है। इसका मुद्दा जंगलों से ही जुड़ा है। वनों के संरक्षण से ही पर्यावरण भी संरक्षित रहेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वनों और पानी के संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाएं। पूर्व कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंध की जानकारी दी। डॉ. ओमप्रकाश ने संचालन किया। कोर्स निर्देशक डॉ. मनोज पांडे, डॉ. बीएन मोहंती, ललित कुमार तिवारी, विजय कुमार, भगत सिंह, जी रमन, अनूप सिंह, वीएस मलिक, सुनील कुमार, एएम शर्मा आदि थे।
वनवासियों के सहयोग से ही वनों का संरक्षण संभव
गुड गवर्नेंस पर आयोजित पांच दिनी कार्यशाला का समापन
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भट्ट ने कहा कि जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है। इसका मुद्दा जंगलों से ही जुड़ा है। वनों के संरक्षण से ही पर्यावरण भी संरक्षित रहेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वनों और पानी के संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाएं। पूर्व कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंध की जानकारी दी। डॉ. ओमप्रकाश ने संचालन किया। कोर्स निर्देशक डॉ. मनोज पांडे, डॉ. बीएन मोहंती, ललित कुमार तिवारी, विजय कुमार, भगत सिंह, जी रमन, अनूप सिंह, वीएस मलिक, सुनील कुमार, एएम शर्मा आदि थे।
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वनवासियों के सहयोग से ही वनों का संरक्षण संभव
गुड गवर्नेंस पर आयोजित पांच दिनी कार्यशाला का समापन