{"_id":"5a245a924f1c1b8b688b680f","slug":"71512331922-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गीता जीवन के प्रबंधन का मार्ग दिखाती है : प्रो. मिश्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गीता जीवन के प्रबंधन का मार्ग दिखाती है : प्रो. मिश्र
Updated Mon, 04 Dec 2017 01:42 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। श्रीमद्भागवत गीता प्रबंधन का मूलभूत मार्गदर्शक शास्त्र है। गीता संपूर्ण जीवन के प्रबंधन का मार्ग दिखाती है। यह यूओयू के कुलसचिव प्रो. आरसी मिश्रा ने कही। प्रो. मिश्रा दुर्गादत्त कपिलाश्रमी संस्कृत महाविद्यालय में ‘श्रीमद्भागवत गीता में प्रबंध कौशल’ विषय पर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित एक दिनी संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेयर जोगेंद्र रौतेला, महामंडलेश्वर परेश यति महाराज और उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने किया। इस दौरान मेयर जोगेंद्र रौतेला ने संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के लिए सभी से आगे आने का आह्वान किया। स्वामी परेश यति महाराज ने कहा कि भगवत गीता प्रत्येक भारतीय के लिए आस्था और संस्कृति का स्रोत है। उन्होंने गीता को आचरण में उतारने पर जोर दिया। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी, यूओयू के असिस्टेंट प्रो. देवेश मिश्र, आचार्य गोपाल दत्त त्रिपाठी, डॉ. महेश चंद्र जोशी ने भी संबोधित किया। इस दौरान महाविद्यालय की प्रबंध समिति के सचिव और पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. उर्वीश चंद्र मिश्रा के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संगोष्ठी में डॉ. संजू रूबाली, पवन कुमार झा, कुलदीप पंत, वंदना तिवारी, माया मौलखी, मधुकर उपाध्याय आदि थे। प्रधानाचार्य राजेंद्र भट्ट ने आभार जताया। संचालन डॉ. हरीश गुरुरानी ने किया।
विज्ञापन
संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेयर जोगेंद्र रौतेला, महामंडलेश्वर परेश यति महाराज और उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने किया। इस दौरान मेयर जोगेंद्र रौतेला ने संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के लिए सभी से आगे आने का आह्वान किया। स्वामी परेश यति महाराज ने कहा कि भगवत गीता प्रत्येक भारतीय के लिए आस्था और संस्कृति का स्रोत है। उन्होंने गीता को आचरण में उतारने पर जोर दिया। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी, यूओयू के असिस्टेंट प्रो. देवेश मिश्र, आचार्य गोपाल दत्त त्रिपाठी, डॉ. महेश चंद्र जोशी ने भी संबोधित किया। इस दौरान महाविद्यालय की प्रबंध समिति के सचिव और पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. उर्वीश चंद्र मिश्रा के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संगोष्ठी में डॉ. संजू रूबाली, पवन कुमार झा, कुलदीप पंत, वंदना तिवारी, माया मौलखी, मधुकर उपाध्याय आदि थे। प्रधानाचार्य राजेंद्र भट्ट ने आभार जताया। संचालन डॉ. हरीश गुरुरानी ने किया।
विज्ञापन