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मेडिकल कालेज की मान्यता पर खतरा
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हल्द्वानी। डॉक्टरों की कमी ने राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन की पेशानी पर बल डाल रखे हैं। फैकल्टी की कमी के कारण के मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की आपत्तियों का अभी तक निस्तारण नहीं हुआ है।
मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने इंडोर मरीजों की कमी के चलते भी आपत्ति लगाई थी। पांच सौ बेड के अनुसार इंडोर मरीजों की संख्या कम थी। साथ ही रेडियोलॉजी से लेकर अन्य विभागों में फैकल्टी पूरी नहीं है। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट तक की विभागों में कमी है। विज्ञापन निकालने के बाद भी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर नहीं आ रहे हैं। एमसीआई निरीक्षण के बाद अब तक छह बार आपत्ति लगा चुकी है। इसके बावजूद डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो सकी है। इस संबंध में राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि मानकों के तहत ओपीडी में 2500 से 3000 मरीज होने चाहिए। ओपीडी में मरीजों की संख्या पर्याप्त है। कुछ समय पहले तक आईपीडी में मरीज कम थे अब लगभग 400 से 450 मरीज हैं और मानक पूरे हैं। बताया कि फैकल्टी की कमी के चलते समस्या आ रही है। प्रयास किया जा रहा है कि फैकल्टी पूरी हो जाए।
मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर खतरा
इंडोर मरीजों की संख्या बढ़ी तो फैकल्टी की कमी परेशानी का सबब
चिकित्सा शिक्षा विभाग को नहीं मिल रहे डॉक्टर
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मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने इंडोर मरीजों की कमी के चलते भी आपत्ति लगाई थी। पांच सौ बेड के अनुसार इंडोर मरीजों की संख्या कम थी। साथ ही रेडियोलॉजी से लेकर अन्य विभागों में फैकल्टी पूरी नहीं है। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट तक की विभागों में कमी है। विज्ञापन निकालने के बाद भी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर नहीं आ रहे हैं। एमसीआई निरीक्षण के बाद अब तक छह बार आपत्ति लगा चुकी है। इसके बावजूद डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो सकी है। इस संबंध में राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि मानकों के तहत ओपीडी में 2500 से 3000 मरीज होने चाहिए। ओपीडी में मरीजों की संख्या पर्याप्त है। कुछ समय पहले तक आईपीडी में मरीज कम थे अब लगभग 400 से 450 मरीज हैं और मानक पूरे हैं। बताया कि फैकल्टी की कमी के चलते समस्या आ रही है। प्रयास किया जा रहा है कि फैकल्टी पूरी हो जाए।
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मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर खतरा
इंडोर मरीजों की संख्या बढ़ी तो फैकल्टी की कमी परेशानी का सबब
चिकित्सा शिक्षा विभाग को नहीं मिल रहे डॉक्टर