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कैलाश मानसरोवर यात्री का 15वां दल
Updated Sun, 16 Sep 2018 02:09 AM IST
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कैलाश मानसरोवर यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। कैलाश मानसरोवर यात्रियों के 15वें दल के सदस्य मानसरोवर परिक्रमा पूरी कर शनिवार को वापस आ गए। दल ने निर्धारित 21 दिन की यात्रा पूरी की। केएमवीएन के काठगोदाम स्थित पर्यटक आवास गृह में यात्रियों का स्वागत किया गया।
टीआरसी में केएमवीएन के महाप्रबंधक त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने यात्रियों को कुमाउंनी ऐपण प्रतीक चिन्ह भेंट किया। यात्री दल में कुल 58 यात्री थे। इनमें से 11 यात्री पूर्व में ही निजी साधनों से लौट गए। आज 47 यात्री काठगोदाम के टीआरसी में पहुंचे। दोपहर भोजन के बाद यात्री दल दिल्ली को रवाना हो गया। दल के जनसंपर्क अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि 15वें दल के 50 यात्रियों ने चीन में चरणस्पर्श के दर्शन किए। टीआरएच के प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि 16वां दल आज शाम गुंजी पहुंच गया है। 17वां और 18वां दल एक साथ तकलाकोट से दारचिन के लिए रवाना हो गया है। बताया कि 15वां दल पहला ऐसा दल है जो अपने निर्धारित समय पर सकुशल यात्रा पूरी करके आया।
कैलाश मानसरोवर के 15वां दल में शामिल द्वारका दिल्ली निवासी रितु गौर ने बताया कि वह तीसरी बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर आई हैं और भविष्य में भी यात्रा करती रहेंगी। इससे पहले कभी उनको चरणस्पर्श में जाने का मौका नहीं मिला। चरणस्पर्श पहुंची तो उन्हें वहां अपने आसपास सुपर पावर महसूस हुई।
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टीआरसी में केएमवीएन के महाप्रबंधक त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने यात्रियों को कुमाउंनी ऐपण प्रतीक चिन्ह भेंट किया। यात्री दल में कुल 58 यात्री थे। इनमें से 11 यात्री पूर्व में ही निजी साधनों से लौट गए। आज 47 यात्री काठगोदाम के टीआरसी में पहुंचे। दोपहर भोजन के बाद यात्री दल दिल्ली को रवाना हो गया। दल के जनसंपर्क अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि 15वें दल के 50 यात्रियों ने चीन में चरणस्पर्श के दर्शन किए। टीआरएच के प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि 16वां दल आज शाम गुंजी पहुंच गया है। 17वां और 18वां दल एक साथ तकलाकोट से दारचिन के लिए रवाना हो गया है। बताया कि 15वां दल पहला ऐसा दल है जो अपने निर्धारित समय पर सकुशल यात्रा पूरी करके आया।
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कैलाश मानसरोवर के 15वां दल में शामिल द्वारका दिल्ली निवासी रितु गौर ने बताया कि वह तीसरी बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर आई हैं और भविष्य में भी यात्रा करती रहेंगी। इससे पहले कभी उनको चरणस्पर्श में जाने का मौका नहीं मिला। चरणस्पर्श पहुंची तो उन्हें वहां अपने आसपास सुपर पावर महसूस हुई।
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