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छूटी प्रयोगात्मक परीक्षा देने का शुल्क देना होगा दो - दो हजार
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:51 AM IST
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200 रुपये का नोट
- फोटो : RBI
हल्द्वानी। स्नातक प्रथम और दूसरे सेमेस्टर वर्ष 2016 के छात्रों को छूटी प्रयोगात्मक परीक्षा देने के लिए अब दो-दो हजार रुपये शुल्क देना होगा जबकि आंतरिक मूल्यांकन के लिए 500 रुपये शुल्क भुगतान करना होगा। कुमाऊं विश्वविद्यालय के इस फरमान से एमबीपीजी कालेज के छात्रों में नाराजगी है।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने एमबीपीजी कॉलेज को आदेश दिए हैं कि स्नातक 2016 के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के जो छात्र-छात्राएं जो किसी कारण प्रयोगात्मक परीक्षा एवं आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा देने से वंचित रह गए हों उन्हें 31 मार्च तक अंतिम अवसर दिया गया है। प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए 2000 रुपये और आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा के लिए 500 रुपये का भुगतान करना होगा। कॉलेज की परीक्षा प्रभारी डॉ. पूर्णिमा भटनागर ने बताया कि विश्वविद्यालय से मिलने पर नोटिस बोर्ड पर सूचना लगवा दी गई है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक स्तर पर वर्ष 2016 सत्र से सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई थी। सेमेस्टर में प्रयोगात्मक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन की जानकारी न होने के कारण तमाम छात्र-छात्राओं की प्रयोगात्मक परीक्षाएं छूट गई थीं। इसमें बीए, बीएससी और बीकॉम सभी कक्षाओं के छात्र शामिल थे। प्रयोगात्मक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन के नंबर न चढ़ने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम अपूर्ण होने पर घोषित नहीं हो सका था। प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर का भले ही परीक्षा परिणाम अपूर्ण हो रहा हो लेकिन छात्र चतुर्थ सेमेस्टर तक पहुंच गए। इधर, विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा परिणाम के लिए विश्वविद्यालय पर दबाव बनाया जा रहा था।
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विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने एमबीपीजी कॉलेज को आदेश दिए हैं कि स्नातक 2016 के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के जो छात्र-छात्राएं जो किसी कारण प्रयोगात्मक परीक्षा एवं आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा देने से वंचित रह गए हों उन्हें 31 मार्च तक अंतिम अवसर दिया गया है। प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए 2000 रुपये और आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा के लिए 500 रुपये का भुगतान करना होगा। कॉलेज की परीक्षा प्रभारी डॉ. पूर्णिमा भटनागर ने बताया कि विश्वविद्यालय से मिलने पर नोटिस बोर्ड पर सूचना लगवा दी गई है।
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कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक स्तर पर वर्ष 2016 सत्र से सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई थी। सेमेस्टर में प्रयोगात्मक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन की जानकारी न होने के कारण तमाम छात्र-छात्राओं की प्रयोगात्मक परीक्षाएं छूट गई थीं। इसमें बीए, बीएससी और बीकॉम सभी कक्षाओं के छात्र शामिल थे। प्रयोगात्मक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन के नंबर न चढ़ने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम अपूर्ण होने पर घोषित नहीं हो सका था। प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर का भले ही परीक्षा परिणाम अपूर्ण हो रहा हो लेकिन छात्र चतुर्थ सेमेस्टर तक पहुंच गए। इधर, विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा परिणाम के लिए विश्वविद्यालय पर दबाव बनाया जा रहा था।
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