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बेटा-बेटी का फर्क दूर होगा, तभी समाज में समानता आएगी
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अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स
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हल्द्वानी। अमर उजाला की अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत बुधवार को हीरानगर स्थित स्वर संगम संगीत संस्थान में अपराजिता गोष्ठी हुई। संगीत का प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों ने कहा कि घर से ही बेटा-बेटी के फर्क को दूर कर समाज में समानता लाई जा सकती है।
माता-पिता की सही परवरिश समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने एवं आत्मविश्वासी मुस्कान के लिए वचनबद्धता दोहराई और संकल्प पत्र भी भरे। इस मौके पर आचार्य हरीश चंद्र पंत, विनीता पांडे, मीरा पंत, मुकेश पंत, चंद्रशेखर पंत, रश्मि जोशी, शांभवी झा, प्रांजल पांडे, श्रेया सुयाल, संस्कृति भट्ट, हर्षिता पांडे, शिवांश बिष्ट, आरोही पंत, भावना कोरंगा, नितेश उप्रेती, निकिता उपाध्याय, नेहा बिष्ट, रिद्धी गुप्ता, प्रियल पांडे, गरिमा मेहता, मन ढैला आदि थे।
बेटा-बेटी का फर्क दूर होगा, तभी समाज में समानता आएगी
अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत आयोजित कार्यशाला में बोले विद्यार्थी
- अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को अधिकारों और कानूनों की जानकारी नहीं होती। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत है। -कामाक्षा पंत
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- महिलाएं अपने आप में सशक्त हैं। घर संभालने के साथ ही कामकाज भी बखूबी निभा रही हैं। पुरुषों को महिलाओं को प्रोत्साहित करने को आगे आने चाहिए। - दीप्ति पंत
- दकियानूसी सोच के चलते घर-परिवार और समाज में महिलाओं के योगदान को कम आंका जाता है। महिलाएं शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत हैं। - पलक जोशी
- लड़का-लड़की में भेदभाव नहीं होना चाहिए। बचपन से ही माता-पिता बेटा-बेटी को समान परवरिश देंगे तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन दिखेगा। - ज्योति दास
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माता-पिता की सही परवरिश समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने एवं आत्मविश्वासी मुस्कान के लिए वचनबद्धता दोहराई और संकल्प पत्र भी भरे। इस मौके पर आचार्य हरीश चंद्र पंत, विनीता पांडे, मीरा पंत, मुकेश पंत, चंद्रशेखर पंत, रश्मि जोशी, शांभवी झा, प्रांजल पांडे, श्रेया सुयाल, संस्कृति भट्ट, हर्षिता पांडे, शिवांश बिष्ट, आरोही पंत, भावना कोरंगा, नितेश उप्रेती, निकिता उपाध्याय, नेहा बिष्ट, रिद्धी गुप्ता, प्रियल पांडे, गरिमा मेहता, मन ढैला आदि थे।
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बेटा-बेटी का फर्क दूर होगा, तभी समाज में समानता आएगी
अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत आयोजित कार्यशाला में बोले विद्यार्थी
- अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को अधिकारों और कानूनों की जानकारी नहीं होती। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत है। -कामाक्षा पंत
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- महिलाएं अपने आप में सशक्त हैं। घर संभालने के साथ ही कामकाज भी बखूबी निभा रही हैं। पुरुषों को महिलाओं को प्रोत्साहित करने को आगे आने चाहिए। - दीप्ति पंत
- दकियानूसी सोच के चलते घर-परिवार और समाज में महिलाओं के योगदान को कम आंका जाता है। महिलाएं शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत हैं। - पलक जोशी
- लड़का-लड़की में भेदभाव नहीं होना चाहिए। बचपन से ही माता-पिता बेटा-बेटी को समान परवरिश देंगे तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन दिखेगा। - ज्योति दास