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जीएसटी का एक साल पूरा

Sun, 01 Jul 2018 01:46 AM IST
Updated Sun, 01 Jul 2018 01:46 AM IST
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जीएसटी का एक साल पूरा
GST
हल्द्वानी। सेवा एवं उत्पाद कर का एक साल कुमाऊं में समस्याओं के समाधान में बीता। तमाम खूबियों के बाद भी व्यवस्था के पूरी तरह से पटरी पर न आने से व्यापारियों का एक साल समस्याएं सुलझाने में बीता।
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सूबे में एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू किया गया था। इस तिथि पर प्रदेशभर में करीब 80 हजार व्यापारी वैट में पंजीकृत थे। वैट में पंजीयन के लिए सालाना कारोबार क ी सीमा पांच लाख रुपये थी। जीएसटी में यह सीमा 10 लाख रुपये है। राज्य कर अधिकारियों का मानना था कि इससे पंजीयन की संख्या प्रभावित होगी। राज्य कर के आंकड़ों के मुताबिक सूबे में 1.37 लाख व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हैं। यह संख्या बढ़ती जा रही है। जीएसटी लागू होने के बाद पोर्टल में तकनीकी कमियां, मैनुअल काम न होने से कारोबारियों को रिटर्न भरने में परेशानी हो रही है। जीएसटी आर 1, 2, 3 जमा करने में कारोबारियों के पसीने छूटे। वर्ष 2017-18 में जीएसटी से सात हजार करोड़ की आय हुई।
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हल्द्वानी में 100 फीसदी कारोबारी बढ़े
हल्द्वानी में वैट के दौरान पांच हजार कारोबारी पंजीकृत थे। जीएसटी लागू होने के बाद हर खंड में औसतन 1,000 से 1,200 तक कारोबारी पंजीकृत हुए। पांच हजार से ज्यादा नए कारोबारी पंजीकृत हुए। इस तरह 10 हजार से ज्यादा कारोबारी पंजीकृत हैं।
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क्या कहते हैं व्यापारी
यहां 70 फीसदी अर्थव्यवस्था ग्रामीण है। इस पर जीएसटी नहीं लागू करना चाहिए। जहां उत्पादन हो रहा है, वहीं जीएसटी जोड़कर एमआरपी पर जुड़ना चाहिए। इससे सरकार का राजस्व प्रभावित नहीं होगा और व्यापारियों का झंझट भी खत्म हो जाएगा।
- नवीन वर्मा, प्रदेश महामंत्री, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल


जीएसटी से छोटे व्यापारियों का कारोबार खत्म हो गया है। जीएसटी की गणित अभी अधिकारी नहीं समझ पाए हैं, व्यापारियों का क्या होगा। जीएसटी से डबल टैक्स वसूला जा रहा है।
- हुकुम सिंह कुंवर, देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल

क्या कहते हैं अधिवक्ता
जीएसटी रिटर्न जमा करने की कार्यवाही बेहद जटिल है। रिटर्न, ई वे बिल सभी वेबसाइट पर निर्भर है। इसकी वजह से अंतिम तिथियों पर लोड बढ़ने से दिक्कत होती है। जीएसटी आर 1,2,3 रिटर्न घोषित किए हैं लेकिन तकनीकी कमी से दाखिल नहीं हो पाते हैं। ऐसे में बिल मैचिंग, आईटीसी मिलान में बहुत दिक्कत होती है। अभी इनमें सुधार की जरूरत है।

- सुमित गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन

क्या कहते हैं अफसर
जीएसटी पोर्टल में शुरुआती कमियों के बाद लगातार सुधार किया गया है। वर्तमान में रोजाना ढाई तीन हजार ई वे बिल जनरेट हो रहे हैं। रिटर्न भी जमा हो रहे हैं। जटिलताओं को निरंतर दूर किया गया है। जीएसटी के बाद प्रदेशभर में 50 हजार से ज्यादा नए व्यापारी जुड़े हैं।
- पीएस डुंगरियाल, संयुक्त आयुक्त जीएसटी।
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