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कुमाऊं विवि: सीनेट के चुनाव में खेल, नियम हो गए फेल
Updated Sun, 17 Jun 2018 01:08 AM IST
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हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय के सीनेट के चुनाव में विवि के अपने नियम ही फेल हो गए। हद यह हुई कि पते की जानकारी न होने वाले सदस्य मतदाताओं को भी मतपत्र पहुंचा दिए गए। कई सदस्य मतदाताओं का तो एक ही पता दर्शा दिया गया।
विवि ने पंजीकृत स्नातकों की नई संशोधित सूची पिछले माह ही तैयार की थी। तत्कालीन कुल सचिव ने स्पष्ट कहा था कि सदस्यों को आधार कार्ड के आधार पर ही सत्यापन करवाना होगा और आधार कार्ड की छाया प्रति भी स्वप्रमाणित जमा करनी होगी।
विवि ने नियम लागू किया था कि सदस्यों का पता स्वयं का होना चाहिए। अब सामने आया कि विश्वविद्यालय के ये सभी नियम फेल हो गए।
इन मतदाताओं का एक ही पता दर्शाया
क्रमांक संख्या 1192 से लेकर 1201 संख्या तक अंकित सदस्य संजय सिंह जीना, निशा जीना, महेंद्र सिंह जीना, भावना जीना, उमा नेगी, बीएस नेगी, कला बुंगला, नेहा कार्तिक, केवलानंद, अंजना उप्रेती का एक ही पता दर्शाया गया है। इनके अलावा क्रमांक 1211 पर अंकित नवीन पांडे, क्रमांक 1215 पर मुकेश चंद्र तिवारी, क्रमांक 1227 पर दीपक आर्या का पता तक नहीं लिखा है। इसके बावजूद इन्हें मतपत्र भेजे जा चुके हैं।
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प्रथम वरीयता मत पाने को खेल
सीनेट के चुनाव में यह सब खेल चुनाव जीतने के लिए होता है। इसमें अगर किसी प्रत्याशी को 25 मत प्रथम वरीयता के मिल जाते हैं तो वह जीत जाता है। ऐसे में मतपत्र एकत्र किये जा रहे हैं ताकि प्रथम वरीयता दिखाई जा सके।
विवि सभा (सीनेट) चुनाव की प्रक्रिया मेरे कार्यभार संभालने से पहले से चल रही है। स्नातकों को सदस्यों बनाने में अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी ताकि चुनाव निष्पक्ष हो सकें। सोमवार को बैठक बुलाकर समीक्षा की जाएगी।
- डॉ. महेश कुमार, कुल सचिव कुमाऊं विवि नैनीताल
स्नातक चुनाव प्रक्रिया निरस्त करे विवि
हल्द्वानी। स्नातक सदस्य प्रमोद अग्रवाल के मुताबिक खामियों के कारण ही उन्होंने इस बार चुनाव नहीं लड़ा। जितने भी मार्फत वाले मतपत्र हैं सभी को निरस्त कर चुनाव कराया जाना चाहिए। पंजीकृत स्नातक चुनाव निरस्त कराने के लिए जरूरत पड़ी तो कोर्ट भी जाएंगे।
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विवि ने पंजीकृत स्नातकों की नई संशोधित सूची पिछले माह ही तैयार की थी। तत्कालीन कुल सचिव ने स्पष्ट कहा था कि सदस्यों को आधार कार्ड के आधार पर ही सत्यापन करवाना होगा और आधार कार्ड की छाया प्रति भी स्वप्रमाणित जमा करनी होगी।
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विवि ने नियम लागू किया था कि सदस्यों का पता स्वयं का होना चाहिए। अब सामने आया कि विश्वविद्यालय के ये सभी नियम फेल हो गए।
इन मतदाताओं का एक ही पता दर्शाया
क्रमांक संख्या 1192 से लेकर 1201 संख्या तक अंकित सदस्य संजय सिंह जीना, निशा जीना, महेंद्र सिंह जीना, भावना जीना, उमा नेगी, बीएस नेगी, कला बुंगला, नेहा कार्तिक, केवलानंद, अंजना उप्रेती का एक ही पता दर्शाया गया है। इनके अलावा क्रमांक 1211 पर अंकित नवीन पांडे, क्रमांक 1215 पर मुकेश चंद्र तिवारी, क्रमांक 1227 पर दीपक आर्या का पता तक नहीं लिखा है। इसके बावजूद इन्हें मतपत्र भेजे जा चुके हैं।
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प्रथम वरीयता मत पाने को खेल
सीनेट के चुनाव में यह सब खेल चुनाव जीतने के लिए होता है। इसमें अगर किसी प्रत्याशी को 25 मत प्रथम वरीयता के मिल जाते हैं तो वह जीत जाता है। ऐसे में मतपत्र एकत्र किये जा रहे हैं ताकि प्रथम वरीयता दिखाई जा सके।
विवि सभा (सीनेट) चुनाव की प्रक्रिया मेरे कार्यभार संभालने से पहले से चल रही है। स्नातकों को सदस्यों बनाने में अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी ताकि चुनाव निष्पक्ष हो सकें। सोमवार को बैठक बुलाकर समीक्षा की जाएगी।
- डॉ. महेश कुमार, कुल सचिव कुमाऊं विवि नैनीताल
स्नातक चुनाव प्रक्रिया निरस्त करे विवि
हल्द्वानी। स्नातक सदस्य प्रमोद अग्रवाल के मुताबिक खामियों के कारण ही उन्होंने इस बार चुनाव नहीं लड़ा। जितने भी मार्फत वाले मतपत्र हैं सभी को निरस्त कर चुनाव कराया जाना चाहिए। पंजीकृत स्नातक चुनाव निरस्त कराने के लिए जरूरत पड़ी तो कोर्ट भी जाएंगे।