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450 हेक्टेयर जंगल से खदेड़े अतिक्रमणकारी

Fri, 22 May 2015 01:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रामनगर
ब्यूरो/अमर उजाला,रामनगर Updated Fri, 22 May 2015 01:12 AM IST
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450 hectares of forest encroachers pursued

वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने का राज्य में अब तक का सबसे बड़ा अभियान बृहस्पतिवार को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के आमपोखरा रेंज में शिवनाथपुर में चला। सात घंटे तक चले अभियान में चार जेसीबी, एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्राली, 200 से अधिक वनकर्मी सहित पुलिस, पीएससी के जवानों की सहायता से साढ़े चार सौ हेक्टेयर में हुए अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया। अपनी जमीन खाली कराने के बाद जहां वन विभाग ने राहत की सांस ली है, वहीं मामले को सामने लाने के लिए डीएफओ राहुल ने अमर उजाला का आभार भी जताया है।

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अमर उजाला ने आमपोखरा रेंज में शिवनाथपुर में वन विभाग की भूमि पर हुए अतिक्रमण की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसमें विभाग 19 मई को छह-सात झोपड़ियों को ध्वस्त इतिश्री कर आया था। बुधवार को इस मुद्दे पर फिर से अमर उजाला ने प्रमुखता से अतिक्रमणकारियों के लौटने की खबर प्रकाशित की। इस पर जागे विभाग के डीएफओ राहुल ने बृहस्पतिवार को बड़ा कदम उठाते हुए शासन-प्रशासन की मदद मांगकर राज्य का अब तक का सबसे बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया।
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डीएफओ राहुल ने बताया कि सुबह नौ बजे से शुरू हुआ अतिक्रमण अभियान शाम चार बजे तक चला। अभियान में तराई पूर्व वन प्रभाग हल्द्वानी से भी वनकर्मी बुलवाए गए थे। अतिक्रमण में 100 से अधिक झोपड़ियों को ध्वस्त किया गया। उन्होंने बताया कि झोपड़ियों में लगी लकड़ियां जब्त करने के साथ ही घरेलू सामान कब्जेदारों को दे दिया गया है। गेहूं की फसल पहले ही कट चुकी थी, अभी चरी लगाई गई है जो जंगली जानवरों के काम आएगी।
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डीएफओ ने बताया कि अतिक्रमणकारियों ने करीब 10 हजार से अधिक छोटे-बड़े पेड़ काट डाले हैं। इस दौरान टीम में एसडीएम एसएस जंगपांगी, सीओ मिथिलेश कुमार, कोतवाल कैलाश पंवार, एसडीओ जेसी सिंह, बलवंत सिंह शाही, सभी रेंजो के रेंजर, एक प्लाटून पुरुष पीएससी, डेढ़ सेक्शन महिला पीएससी, तीन चौकी पुलिस इंचार्ज सहित 200 से अधिक वनकर्मी मौजूद थे।

इस बार रणनीति आई काम
100 से अधिक झोपड़ियों को हटाना और वहां रह रहे लोगों के इकट्ठा होने के चलते वन विभाग ने चार जेसीबी के साथ चार टीमें बना दी थीं। हर टीम को एक जेसीबी के साथ चारों दिशाओं में भेज दिया गया। एक साथ हुई कार्रवाई से अतिक्रमणकारी अपना सामान समेटने में ही व्यस्त रहे और भीड़ नहीं लग सकी। इस रणनीति के चलते आराम से अतिक्रमण हट गया। हालांकि शुरू में जब पांचवीं झोपड़ी तोड़ी जा रही थी तो एक विवाद हो गया और एक अतिक्रमणकारी ने अपनी झोपड़ी में आग लगा दी। विभाग ने उसे हिरासत में लेकर आग बुझाई। विभाग ने इतने बड़े अभियान में मात्र तीन लोगों को ही हिरासत में लिया, जिन्हें अतिक्रमण हटने के बाद छोड़ दिया गया।

40 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन हुई खाली
रामनगर। तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने सात घंटे का अभियान चलाकर कम से कम 40 करोड़ रुपये की जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है। यदि जंगल की जमीन को पांच लाख रुपये बीघा भी माने तो साढ़े चार सौ हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमण वाली भूमि की कीमत 40 करोड़ से भी ऊपर जाती है। जो विभाग ने खाली करा ली है।

...और उधर होता रहा अवैध खनन
रामनगर। बृहस्पतिवार को तराई पश्चिमी वन प्रभाग का पूरा स्टाफ अतिक्रमण हटाने में व्यस्त था। वही, कोसी और दाबका नदी में अवैध खनन कारोबारियों की पौ बाहर हो गई। न कोई रोकने वाला न टोकने वाला। दाबका में तो दिनदहाड़े जेसीबी से अतिक्रमण होता रहा, जो देर रात तक जारी था।


तीन अतिक्रमणकारियों को रियायत
अभियान के दौरान टीम ने सिर्फ सख्ती ही नहीं दिखाई नम्र दिल की झलक भी पेश की। अतिक्रमणकारियों को खदेड़ने के दौरान तीन परिवारों को लिखित में देने पर 26 मई तक की रियायत दी गई है। इनमें से दो परिवारों की कहीं और रहने की व्यवस्था नहीं होने के चलते रियायत दी गई तो तीसरे परिवार में बुधवार को ही महिला जैना खातून ने एक शिशु को जन्म दिया है। शिशु और महिला के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें भी 26 मई तक की मोहलत दी गई है। 

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