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दीपावली में बढ़ा पद्रूषण , पीसीबी ने कहा अभी रिपोर्ट आने का इंतजार
Updated Fri, 09 Nov 2018 01:13 AM IST
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बीकानेर में पटाखा गोदाम
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। शहर में दीपावली की रात जमकर आतिशबाजी हुई। पटाखों से निकले धुएं और धमाकेदार आवाज से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया। दीपावली की अगली रात को शहर और बाहरी इलाकों में एक धुंध छाई रही। इस धुंध से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि हवा के नमूने लेकर जांच को भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही प्रदूषण का सटीक आंकड़ा पता चल सकेगा।
तीन सालों में प्रदूषण के आंकड़ों की सूची
साल प्रदूषण का स्तर
2015 217 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर
2016 223 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर
2017 233 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर
10 बजे के बाद भी हुई आतिशबाजी
सुप्रीम कोर्ट ने वायु और ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए रात को सिर्फ 8-10 बजे तक आतिशबाजी के आदेश दिए थे, जबकि दीपावली पर रात 10 बजे के बाद भी कई लोगों ने आतिशबाजी की।
सेहत के लिए नुकसानदायक है 100 माइक्रोग्राम से ज्यादा स्तर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों अनुसार पीएम-10 पार्टिकुलेट मैटर का वार्षिक औसत 60 और 24 घंटे के अनुसार 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वार्षिक औसत 20 और 24 घंटे में प्रदूषण स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। हल्द्वानी में तीन सालों से इन स्तर से ज्यादा प्रदूषण हुआ है।
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हवा के लगातार नमूने लिए जा रहे हैं, इनको जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। इसकी रिपोर्ट दो दिनों में आ जाएगी। इसके बाद ही प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर का सटीक आंकड़ा सामने आएगा।
-डीके जोशी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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तीन सालों में प्रदूषण के आंकड़ों की सूची
साल प्रदूषण का स्तर
2015 217 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर
2016 223 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर
2017 233 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर
10 बजे के बाद भी हुई आतिशबाजी
सुप्रीम कोर्ट ने वायु और ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए रात को सिर्फ 8-10 बजे तक आतिशबाजी के आदेश दिए थे, जबकि दीपावली पर रात 10 बजे के बाद भी कई लोगों ने आतिशबाजी की।
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सेहत के लिए नुकसानदायक है 100 माइक्रोग्राम से ज्यादा स्तर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों अनुसार पीएम-10 पार्टिकुलेट मैटर का वार्षिक औसत 60 और 24 घंटे के अनुसार 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वार्षिक औसत 20 और 24 घंटे में प्रदूषण स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। हल्द्वानी में तीन सालों से इन स्तर से ज्यादा प्रदूषण हुआ है।
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हवा के लगातार नमूने लिए जा रहे हैं, इनको जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। इसकी रिपोर्ट दो दिनों में आ जाएगी। इसके बाद ही प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर का सटीक आंकड़ा सामने आएगा।
-डीके जोशी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड