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उतराखंड मानव अधिकार आयोग से कुलपति को नोटिस
Updated Sat, 18 Aug 2018 01:24 AM IST
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हल्द्वानी। उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग ने एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में पेयजल और शौचालय की बदहाली के मामले में वाद पंजीकृत कर कुमाऊं विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया है। 20 सितंबर को आयोग सुनवाई करेगा। इधर, कुमाऊं विश्वविद्यालय ने आयोग के आदेश का पालन कराने के संबंध में एमबी कॉलेज और उच्चशिक्षा निदेशालय को पत्र भेजा है। कुलसचिव को भी स्टेटस रिपोर्ट के साथ पेश होने को कहा है।
एमबीपीजी कालेज में अव्यवस्थाओं को लेकर अमर उजाला ने 11 मई को ‘सबसे बड़े कालेज का देखो हाल पानी है नहीं शौचालय बदहाल’ शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अमर उजाला की इस खबर पर उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए परिवाद पंजीकृत कर 19 जुलाई को सुनवाई करना तय किया था। सुनवाई की तिथि पर कुमाऊं विवि के कुलपति को उपस्थिति होने के संबंध में पत्र भी भेजा मगर मामला एमबीपीजी कॉलेज का होने के आधार पर कोई उपस्थित नहीं हुआ। विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. महेश कुमार ने उत्तराखंड मानव अधिकार को चिट्ठी भेज कर आयोग को सफाई दी कि खंडपीठ के आदेश का अनुपालन एमबीपीजी कॉलेज राजकीय महाविद्यालय द्वारा किया जाना है तथा राजकीय महाविद्यालय होने की स्थिति में उच्चशिक्षा निदेशालय हल्द्वानी के स्तर से आदेश का अनुपालन किया जा सकता है। इधर, आयोग ने नोटिस जारी कर कुमाऊं विवि के कुलपति को उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। सुनवाई 20 सितंबर को होगी। विश्वविद्यालय ने एमबीपीजी कॉलेज को आयोग से आए नोटिस और आदेश का अनुपालन करने के संबंध में पत्र भेजा है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रेखा पांडे ने बताया कि विश्वविद्यालय से पत्र मिलने के बाद आयोग के आदेश का अनुपालन कराया जा रहा है।
एमबी कॉलेज में पेयजल और शौचालय की बदहाली का लिया संज्ञान
20 सितंबर को आयोग में होगी मामले की सुनवाई
उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग में एमबीपीजी कॉलेज से संबंधित पंजीकृत मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है। आयोग से क्या आदेश आए हैं उसका अनुपालन कराने की कार्यवाही की जाएगी।
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- प्रो. डीके नौड़ियाल, कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय
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एमबीपीजी कालेज में अव्यवस्थाओं को लेकर अमर उजाला ने 11 मई को ‘सबसे बड़े कालेज का देखो हाल पानी है नहीं शौचालय बदहाल’ शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अमर उजाला की इस खबर पर उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए परिवाद पंजीकृत कर 19 जुलाई को सुनवाई करना तय किया था। सुनवाई की तिथि पर कुमाऊं विवि के कुलपति को उपस्थिति होने के संबंध में पत्र भी भेजा मगर मामला एमबीपीजी कॉलेज का होने के आधार पर कोई उपस्थित नहीं हुआ। विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. महेश कुमार ने उत्तराखंड मानव अधिकार को चिट्ठी भेज कर आयोग को सफाई दी कि खंडपीठ के आदेश का अनुपालन एमबीपीजी कॉलेज राजकीय महाविद्यालय द्वारा किया जाना है तथा राजकीय महाविद्यालय होने की स्थिति में उच्चशिक्षा निदेशालय हल्द्वानी के स्तर से आदेश का अनुपालन किया जा सकता है। इधर, आयोग ने नोटिस जारी कर कुमाऊं विवि के कुलपति को उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। सुनवाई 20 सितंबर को होगी। विश्वविद्यालय ने एमबीपीजी कॉलेज को आयोग से आए नोटिस और आदेश का अनुपालन करने के संबंध में पत्र भेजा है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रेखा पांडे ने बताया कि विश्वविद्यालय से पत्र मिलने के बाद आयोग के आदेश का अनुपालन कराया जा रहा है।
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एमबी कॉलेज में पेयजल और शौचालय की बदहाली का लिया संज्ञान
20 सितंबर को आयोग में होगी मामले की सुनवाई
उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग में एमबीपीजी कॉलेज से संबंधित पंजीकृत मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है। आयोग से क्या आदेश आए हैं उसका अनुपालन कराने की कार्यवाही की जाएगी।
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- प्रो. डीके नौड़ियाल, कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय