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मेडिकल कालेज में सुपर स्पेशलिस्ट के पद स्वीकृत
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डेमो
- फोटो : डेमो
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हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी के मेडिकल कॉलेजों में न्यूरो सर्जन और हृदय विशेषज्ञ जैसे चिकित्सक तैयार हो सकेंगे। साथ में रोगियों को इलाज मुहैया हो सकेगा। शासन ने मेडिकल कॉलेज में डीएम कार्डियोलॉजी और एमसीएच जैसे कोर्स शुरू करने को अनुमति प्रदान कर दी है। राज्य में हल्द्वानी पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज होगा, जहां यह कोर्स शुरू होंगे।
वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के अलावा पीजी कोर्स (एमएस, एमडी आदि) कोर्स चल रहे हैं। मेडिकल कालेज प्रबंधन ने सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को तैयार करने की योजना बनाई। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रो. सीपी भैसोड़ा ने पिछले साल 29 सितंबर को शासन को कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी, न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलाजी, प्लास्टिक सर्जरी और यूरोलाजी विभाग खोलने का प्रस्ताव दिया था।
सूत्रों की माने तो इस प्रस्ताव पर शासन सहमत हो गया है। प्रस्ताव पर वित्तीय एवं कार्मिक विभाग ने पांच विभागों के लिए अपनी संस्तुति दे दी है। जबकि न्यूरोलॉजी विभाग का मामला तकनीकी कारणों से अटक गया है। शासन से अंतिम स्वीकृति मिलने के साथ ही नए विभागों को खोलने का काम शुरू हो जाएगा। इन विभागों के खुलने के साथ ही डीएम और एमसीएच की पढ़ाई भी राजकीय मेडिकल कालेज में होगी। प्राचार्य प्रो. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि पांच विभाग खुलने की अनुमति की पुष्टि की है।
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मेडिकल कॉलेज में तैयार होंगे न्यूरो सर्जन और हृदय विशेषज्ञ
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और यूरोलॉजी विभाग बनेंगे
वित्तीय और कार्मिक विभाग ने लगाई मोहर
सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की मिल सकेगी सुविधा
यह करनी होगी तैयारी
हल्द्वानी। प्रत्येक विभाग में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की आवश्यकता होगी। प्रोफेसर के अलावा प्रत्येक विभाग में न्यूनतम तीन-तीन संकाय सदस्यों की आवश्यकता होगी। साथ ही एमसीआई के मानकों के अनुसार एक सीनियर रेजीडेंट की जरूरत होगी। जबकि चिकित्सालय की आवश्यकता और सर्जिकल विभाग में 24 घंटे सुविधा उपलब्ध कराने के लिए न्यूनतम चार सीनियर रेजीडेंट की जरूरत होगी। इसके अलावा एक सिस्टर इंचार्ज, पांच स्टाफ नर्स की जरूरत होगी। जबकि चिकित्सालय की आवश्यकता को देखते हुए 20 स्टाफ नर्सों की जरूरत पड़ेगी। एक्सरे और ओटी टेक्नीशियन के अलावा अन्य स्टाफ की जरूरत पड़ेगी।
पांच विभागों को स्वीकृति मिल गई है। इन विभागों को अस्तित्व में लाने का काम जल्द शुरू हो जाएगा। राजकीय मेडिकल कालेज को आदर्श बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
डॉ. आशुतोष सयाना
चिकित्सा-शिक्षा, निदेशक
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वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के अलावा पीजी कोर्स (एमएस, एमडी आदि) कोर्स चल रहे हैं। मेडिकल कालेज प्रबंधन ने सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को तैयार करने की योजना बनाई। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रो. सीपी भैसोड़ा ने पिछले साल 29 सितंबर को शासन को कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी, न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलाजी, प्लास्टिक सर्जरी और यूरोलाजी विभाग खोलने का प्रस्ताव दिया था।
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सूत्रों की माने तो इस प्रस्ताव पर शासन सहमत हो गया है। प्रस्ताव पर वित्तीय एवं कार्मिक विभाग ने पांच विभागों के लिए अपनी संस्तुति दे दी है। जबकि न्यूरोलॉजी विभाग का मामला तकनीकी कारणों से अटक गया है। शासन से अंतिम स्वीकृति मिलने के साथ ही नए विभागों को खोलने का काम शुरू हो जाएगा। इन विभागों के खुलने के साथ ही डीएम और एमसीएच की पढ़ाई भी राजकीय मेडिकल कालेज में होगी। प्राचार्य प्रो. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि पांच विभाग खुलने की अनुमति की पुष्टि की है।
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मेडिकल कॉलेज में तैयार होंगे न्यूरो सर्जन और हृदय विशेषज्ञ
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और यूरोलॉजी विभाग बनेंगे
वित्तीय और कार्मिक विभाग ने लगाई मोहर
सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की मिल सकेगी सुविधा
यह करनी होगी तैयारी
हल्द्वानी। प्रत्येक विभाग में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की आवश्यकता होगी। प्रोफेसर के अलावा प्रत्येक विभाग में न्यूनतम तीन-तीन संकाय सदस्यों की आवश्यकता होगी। साथ ही एमसीआई के मानकों के अनुसार एक सीनियर रेजीडेंट की जरूरत होगी। जबकि चिकित्सालय की आवश्यकता और सर्जिकल विभाग में 24 घंटे सुविधा उपलब्ध कराने के लिए न्यूनतम चार सीनियर रेजीडेंट की जरूरत होगी। इसके अलावा एक सिस्टर इंचार्ज, पांच स्टाफ नर्स की जरूरत होगी। जबकि चिकित्सालय की आवश्यकता को देखते हुए 20 स्टाफ नर्सों की जरूरत पड़ेगी। एक्सरे और ओटी टेक्नीशियन के अलावा अन्य स्टाफ की जरूरत पड़ेगी।
पांच विभागों को स्वीकृति मिल गई है। इन विभागों को अस्तित्व में लाने का काम जल्द शुरू हो जाएगा। राजकीय मेडिकल कालेज को आदर्श बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
डॉ. आशुतोष सयाना
चिकित्सा-शिक्षा, निदेशक