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बाबा के जयकारों के साथ पहला कैलाश मानसरोवर दल भीमताल पहुंचा
Updated Mon, 02 Jul 2018 01:45 AM IST
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कैलाश मानसरोवर यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
भीमताल (नैनीताल)। कैलाश मानसरोवर की 24 दिन की यात्रा पूरी कर 58 सदस्यों का दल रविवार को भीमताल टीआरसी पहुंचा। यहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। दल का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र सिंह ने बताया कठिन परिस्थितियों के बावजूद सभी यात्रियों में उत्साह देखा गया। 58 यात्रियों में से 57 यात्री ही बाबा के दर्शन कर पाए जबकि घोड़ा न मिलने के कारण सवाई माधोपुर राजस्थान निवासी यात्री रामदयाल माली बाबा के दर्शन करने से वंचित रह गए।
रामदयाल माली ने कहा कि उन्होंने 11 साल से मानसरोवर यात्रा में जाने का सपना सजाया था। इस बार यात्रा का मौका मिला लेकिन बूंदी से आगे की यात्रा के लिए घोड़ा न मिल पाने से सपना अधूरा रह गया। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य का परीक्षण कर पैदल यात्रा करने से मना कर दिया।
गुरुग्राम के प्रवीण ने बताया कि पहली बार यात्रा पर जाकर मन प्रसन्न हो गया। जयपुर की रश्मि सोडानी ने कहा कि पहली यात्रा में ऐसा लगा मानो भोले नाथ सामने खड़े हों। इस यात्रा ने जिंदगी ही बदल दी।
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यात्रियों ने व्यवस्थाओं पर भी उठाए सवाल
यात्रियों ने केमीवीएन की व्यवस्थाओं पर सवाल भी उठाए। दिल्ली निवासी सुंदर शर्मा ने बताया उन्हें मूंगती नाला से बूंदी तक 12 किमी पैदल यात्रा बता 28 किमी खड़ी चढ़ाई में यात्रा कराई गई। यात्रा के दौरान न तो घोड़े मिले, न ही बेहतर गाइड मिला। फरीदाबाद के विजेंद्र त्यागी निवासी ने बताया खराब रास्तों से पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा। रायबरेली के विजेंद्र त्यागी, राम प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया यात्रियों ने हल्ला मचाकर सरकार पर दबाव बनाया तब जाकर बूंदी से पिथौरागढ़ तक हेली सेवा उपलब्ध कराई गई।
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रामदयाल माली ने कहा कि उन्होंने 11 साल से मानसरोवर यात्रा में जाने का सपना सजाया था। इस बार यात्रा का मौका मिला लेकिन बूंदी से आगे की यात्रा के लिए घोड़ा न मिल पाने से सपना अधूरा रह गया। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य का परीक्षण कर पैदल यात्रा करने से मना कर दिया।
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गुरुग्राम के प्रवीण ने बताया कि पहली बार यात्रा पर जाकर मन प्रसन्न हो गया। जयपुर की रश्मि सोडानी ने कहा कि पहली यात्रा में ऐसा लगा मानो भोले नाथ सामने खड़े हों। इस यात्रा ने जिंदगी ही बदल दी।
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यात्रियों ने व्यवस्थाओं पर भी उठाए सवाल
यात्रियों ने केमीवीएन की व्यवस्थाओं पर सवाल भी उठाए। दिल्ली निवासी सुंदर शर्मा ने बताया उन्हें मूंगती नाला से बूंदी तक 12 किमी पैदल यात्रा बता 28 किमी खड़ी चढ़ाई में यात्रा कराई गई। यात्रा के दौरान न तो घोड़े मिले, न ही बेहतर गाइड मिला। फरीदाबाद के विजेंद्र त्यागी निवासी ने बताया खराब रास्तों से पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा। रायबरेली के विजेंद्र त्यागी, राम प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया यात्रियों ने हल्ला मचाकर सरकार पर दबाव बनाया तब जाकर बूंदी से पिथौरागढ़ तक हेली सेवा उपलब्ध कराई गई।