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मौसम के बदलते मिजाज से अन्नदाता परेशान
Updated Sat, 21 Apr 2018 02:12 AM IST
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हल्द्वानी। कभी बारिश, कभी अंधड़ और कुछ देर बाद फिर चटक धूप। मौसम के इस बदलते मिजाज से तराई भाबर के अन्नदाता परेशान हैं। किसान अब मौसम के मिजाज को भांपने के बाद धीरे-धीरे खेतों में शेष बचे गेहूं की कटाई और मढ़ाई को मजबूर हैं। इससे कटाई और मढ़ाई का खर्च भी बढ़ गया है।
एक पखवाड़ा पहले भाबर के कई किसानों ने मौसम को साफ देख गेहूं की कटाई कर ली थी लेकिन उसके बाद एकाएक मौसम बिगड़ा तो लगातार कई दिनों तक कभी सुबह तो कभी शाम बारिश हो गई। इससे हल्द्वानी, गौलापार, नंधौर घाटी, लामाचौड़, हल्दूचौड़, बिंदुखत्ता, कालाढूंगी, कोटाबाग समेत आसपास के सैकड़ों गांवों में गेहूं की कटी फसल खराब हो गई। अब भी मौसम के मिजाज हर दिन बदल रहे हैं।
गौलापार निवासी किसान हरीश सिंह बताते हैं कि आधी से अधिक फसल बर्बाद होने के बाद अब अधिकांश किसान सुबह आसमान देखते हैैं और मौसम साफ होने पर ही गेहूं की कटाई करते हैं। कटाई के तुरंत बाद गेहूं की हाथों हाथ मढ़ाई भी करा रहे हैं। जबकि पिछले साल तक अधिकांश किसान पूरा गेहूं काटने के बाद एक साथ उसकी मढ़ाई करते थे। किसान अर्जुन सिंह बताते हैं कि कटाई और मढ़ाई के लिए अलग-अलग दिन मजदूर लगाने पड़ रहे हैं और मढ़ाई की मशीन भी किराए पर मंगानी पड़ रही है, जबकि पहले एक ही दिन में कटाई और मढ़ाई हो जाती थी।
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वह बताते हैं कि मढ़ाई की मशीन एक हजार रुपये प्रति घंटे की दर से किराए पर मिल रही है, जबकि मजदूर भी साढ़े तीन सौ रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी ले रहे हैं। कटाई मढ़ाई से किसान का खर्च कई गुना बढ़ गया है।
गेहूं की कटाई-मढ़ाई किश्तों में करने को मजबूर किसान
लगातार बदल रहे मौसम पर टिकी गेहूं की कटाई और मढ़ाई
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एक पखवाड़ा पहले भाबर के कई किसानों ने मौसम को साफ देख गेहूं की कटाई कर ली थी लेकिन उसके बाद एकाएक मौसम बिगड़ा तो लगातार कई दिनों तक कभी सुबह तो कभी शाम बारिश हो गई। इससे हल्द्वानी, गौलापार, नंधौर घाटी, लामाचौड़, हल्दूचौड़, बिंदुखत्ता, कालाढूंगी, कोटाबाग समेत आसपास के सैकड़ों गांवों में गेहूं की कटी फसल खराब हो गई। अब भी मौसम के मिजाज हर दिन बदल रहे हैं।
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गौलापार निवासी किसान हरीश सिंह बताते हैं कि आधी से अधिक फसल बर्बाद होने के बाद अब अधिकांश किसान सुबह आसमान देखते हैैं और मौसम साफ होने पर ही गेहूं की कटाई करते हैं। कटाई के तुरंत बाद गेहूं की हाथों हाथ मढ़ाई भी करा रहे हैं। जबकि पिछले साल तक अधिकांश किसान पूरा गेहूं काटने के बाद एक साथ उसकी मढ़ाई करते थे। किसान अर्जुन सिंह बताते हैं कि कटाई और मढ़ाई के लिए अलग-अलग दिन मजदूर लगाने पड़ रहे हैं और मढ़ाई की मशीन भी किराए पर मंगानी पड़ रही है, जबकि पहले एक ही दिन में कटाई और मढ़ाई हो जाती थी।
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वह बताते हैं कि मढ़ाई की मशीन एक हजार रुपये प्रति घंटे की दर से किराए पर मिल रही है, जबकि मजदूर भी साढ़े तीन सौ रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी ले रहे हैं। कटाई मढ़ाई से किसान का खर्च कई गुना बढ़ गया है।
गेहूं की कटाई-मढ़ाई किश्तों में करने को मजबूर किसान
लगातार बदल रहे मौसम पर टिकी गेहूं की कटाई और मढ़ाई