{"_id":"5bdcb04cbdec226956572a34","slug":"201541189708-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मीडिया में प्रचार से पहले लेनी होगी निर्वाचन अधिकारी से अनुमति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मीडिया में प्रचार से पहले लेनी होगी निर्वाचन अधिकारी से अनुमति
Updated Sat, 03 Nov 2018 01:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। निर्वाचन आयोग के निर्देश के तहत प्रत्याशियों को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में प्रचार-प्रसार के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी अथवा निर्वाचन अधिकारी से अनुमति लेनी होगी। निकाय चुनाव में यह व्यवस्था पहली बार लागू की गई है। बावजूद इसके बगैर अनुमति प्रचार प्रसार हो रहा है। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के अधिकांश प्रत्याशियों की अपील से लेकर भ्रमण तक के फोटो और वीडियो फेसबुक और व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे हैं।
वर्ष 2004 में उच्चतम न्यायालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार बनाम मैसर्स जेमिनी टीवी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के मामले में टीवी, रेडियो, श्रव्य दृश्य प्रदर्शनों, सिनेमा हाल, इंटरनेट आधारित मीडिया, सोशल मीडिया, केबल नेटवर्क समेत वेबसाइट पर चुनाव प्रचार से संबंधित किसी भी तरह का प्रकाशन और प्रसारण से पहले मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) से प्रमाणपत्र लेने के निर्देश दिए थे। उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग ने 15 अप्रैल 2004 को इस संबंध में आदेश जारी किए और जिला स्तर पर उक्त प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार जिला निर्वाचन अधिकारी व निर्वाचन अधिकारी को दे दिया। एमसीएमसी का गठन लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए किया गया था। निकाय चुनाव के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
लेकिन इस बार निकाय चुनाव में भी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में प्रचार-प्रसार से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी अथवा संबंधित क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी से न केवल अनुमति लेनी होगी बल्कि प्रचार सामग्री का सत्यापन भी करना होगा। निर्वाचन आयोग के इस निर्देश के बाद भी अभी तक किसी भी प्रत्याशी ने प्रिंट, इलैक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के माध्यम से किए जा रहे प्रचार की अनुमति आरओ से नहीं ली है। यही नहीं सोशल मीडिया के प्रचार का खर्च भी प्रत्याशी के चुनाव व्यय में जोड़ा जाना है। इसके लिए भी आयोग ने दिशा निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन
राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को आदर्श आचार संहिता का पालन करने को कहा गया है। प्रत्याशियों के समर्थक बैनर व पोस्टर आदि के लिए स्वीकृति ले रहे हैं। अनुमति के बाद छपवाए गए पोस्टर बैनर तो सोशल मीडिया में वायरल किए जा सकते हैं लेकिन यदि इससे अलग किसी तरह का प्रचार किया जा रहा है तो यह गलत है। ऐसे मामलों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज कुमार उपाध्याय निर्वाचन अधिकारी/नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी।
विज्ञापन
वर्ष 2004 में उच्चतम न्यायालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार बनाम मैसर्स जेमिनी टीवी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के मामले में टीवी, रेडियो, श्रव्य दृश्य प्रदर्शनों, सिनेमा हाल, इंटरनेट आधारित मीडिया, सोशल मीडिया, केबल नेटवर्क समेत वेबसाइट पर चुनाव प्रचार से संबंधित किसी भी तरह का प्रकाशन और प्रसारण से पहले मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) से प्रमाणपत्र लेने के निर्देश दिए थे। उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग ने 15 अप्रैल 2004 को इस संबंध में आदेश जारी किए और जिला स्तर पर उक्त प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार जिला निर्वाचन अधिकारी व निर्वाचन अधिकारी को दे दिया। एमसीएमसी का गठन लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए किया गया था। निकाय चुनाव के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
विज्ञापन
लेकिन इस बार निकाय चुनाव में भी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में प्रचार-प्रसार से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी अथवा संबंधित क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी से न केवल अनुमति लेनी होगी बल्कि प्रचार सामग्री का सत्यापन भी करना होगा। निर्वाचन आयोग के इस निर्देश के बाद भी अभी तक किसी भी प्रत्याशी ने प्रिंट, इलैक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के माध्यम से किए जा रहे प्रचार की अनुमति आरओ से नहीं ली है। यही नहीं सोशल मीडिया के प्रचार का खर्च भी प्रत्याशी के चुनाव व्यय में जोड़ा जाना है। इसके लिए भी आयोग ने दिशा निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन
राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को आदर्श आचार संहिता का पालन करने को कहा गया है। प्रत्याशियों के समर्थक बैनर व पोस्टर आदि के लिए स्वीकृति ले रहे हैं। अनुमति के बाद छपवाए गए पोस्टर बैनर तो सोशल मीडिया में वायरल किए जा सकते हैं लेकिन यदि इससे अलग किसी तरह का प्रचार किया जा रहा है तो यह गलत है। ऐसे मामलों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज कुमार उपाध्याय निर्वाचन अधिकारी/नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी।