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अब नगर निगम के वार्डों के आरक्षण की कवायद
Updated Wed, 27 Dec 2017 01:57 AM IST
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हल्द्वानी। नगर निगम में अब वार्डों के आरक्षण का काम होगा। यह काम राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। मंगलवार को नगर निगम ने 60 वार्डों के परिसीमन और जातिगत जनसंख्या की सर्वे रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजीं। हालांकि ऐसा करके नगर निगम ने अपने लिए एक मुसीबत और खड़ी कर ली है। कारण यह भी है कि वार्डों के परिसीमन को आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम रूप दिया जाना था।
नगर निगम में अब तक 25 वार्ड थे। सीमा विस्तार के तहत अब 60 वार्ड हो गए हैं। मंगलवार को नगर निगम ने परिसीमन का काम पूरा किया। इसके साथ ही वार्डों की जातिगत जनसंख्या के सर्वे का काम भी पूरा कर लिया गया। इन दोनों रिपोर्टों को मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग और शासन को भेज दिया गया। निगम अधिकारियों के मुताबिक अब वार्डों का आरक्षण किया जाना है। यह काम राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से होगा। इसके साथ ही नगर निगम के अध्यक्ष पद पर भी आरक्षण की तस्वीर साफ होनी बाकी है।
वैसे नगर निगम की ओर से वार्डों के परिसीमन के तहत संबंधित वार्डों से आपत्तियों को स्वीकार करने के लिए 29 दिसंबर अंतिम तिथि तय की गई थी। इसके बाद निगम को इन आपत्तियों का निस्तारण प्रस्ताव को अंतिम रूप देना था। नगर निगम अभी इस मुद्दे पर खामोश है कि बिना आपत्तियों को सुने ही प्रस्ताव को अंतिम रूप किस तरह से दे दिया गया। अधिक से अधिक निगम के अधिकारी यही कह रहे हैं कि शासन की ओर से प्रस्ताव मांगा गया था। जाहिर है कि यह मामला आने वाले समय में निगम पर भारी पड़ सकता है। कांग्रेस पहले ही इस मामले को लेकर आक्रामक है। कांग्रेस उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दे रही है। ऐसे में नियमों को नजरअंदाज कर प्रस्ताव को अंतिम रूप देना नगर निगम के लिए गले की फांस भी बन सकता है। नगर आयुक्त हरवीर सिंह का कहना है कि शासन की ओर से प्रस्ताव मांगा गया था। शासन की मांग पर ही प्रस्ताव भेजा गया है।
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नगर निगम में अब तक 25 वार्ड थे। सीमा विस्तार के तहत अब 60 वार्ड हो गए हैं। मंगलवार को नगर निगम ने परिसीमन का काम पूरा किया। इसके साथ ही वार्डों की जातिगत जनसंख्या के सर्वे का काम भी पूरा कर लिया गया। इन दोनों रिपोर्टों को मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग और शासन को भेज दिया गया। निगम अधिकारियों के मुताबिक अब वार्डों का आरक्षण किया जाना है। यह काम राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से होगा। इसके साथ ही नगर निगम के अध्यक्ष पद पर भी आरक्षण की तस्वीर साफ होनी बाकी है।
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वैसे नगर निगम की ओर से वार्डों के परिसीमन के तहत संबंधित वार्डों से आपत्तियों को स्वीकार करने के लिए 29 दिसंबर अंतिम तिथि तय की गई थी। इसके बाद निगम को इन आपत्तियों का निस्तारण प्रस्ताव को अंतिम रूप देना था। नगर निगम अभी इस मुद्दे पर खामोश है कि बिना आपत्तियों को सुने ही प्रस्ताव को अंतिम रूप किस तरह से दे दिया गया। अधिक से अधिक निगम के अधिकारी यही कह रहे हैं कि शासन की ओर से प्रस्ताव मांगा गया था। जाहिर है कि यह मामला आने वाले समय में निगम पर भारी पड़ सकता है। कांग्रेस पहले ही इस मामले को लेकर आक्रामक है। कांग्रेस उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दे रही है। ऐसे में नियमों को नजरअंदाज कर प्रस्ताव को अंतिम रूप देना नगर निगम के लिए गले की फांस भी बन सकता है। नगर आयुक्त हरवीर सिंह का कहना है कि शासन की ओर से प्रस्ताव मांगा गया था। शासन की मांग पर ही प्रस्ताव भेजा गया है।
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