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एक माह पहले ही लौट गए मजदूर
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हल्द्वानी। एक माह पहले ही गौला नदी के सात गेट बंद होने के कारण पांच हजार मजदूर बेरोजगार हो गए। बिहार और उत्तर प्रदेश से आए ये मजदूर अपने घर लौट गए हैं। अब पांच गेटों पर करीब तीन हजार मजदूर ही खनन क्षेत्र में हैं। पांच गेटों पर खनन बंद होने के बाद 5300 वाहन भी खड़े हो गए हैं।
गौला नदी में वन निगम खनन कराता है। नदी में शीशमहल, राजपुरा, इंदिरानगर, गोरापड़ाव, बेरीपड़ाव, हल्दूचौड़, मोटाहल्दू, देवरामपुर, लालकुआं, शांतिपुरी और सद्भाव कंपनी गेट से आरबीएम निकासी होती है। इस बार फरवरी में ही आरबीएम में मिट्टी आने की शिकायत पर वन निगम ने भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों से गौला नदी के गेटों की जांच कराई थी। वैज्ञानिकों ने गौला में 34.50 लाख घनमीटर आरबीएम निकासी का सुझाव दिया था। सात गेटों में आरबीएम की कमी के कारण वन निगम ने 28 अप्रैल से बंद कर दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के करीब पांच हजार मजदूर अपने घर लौट गए। हल्द्वानी खनन प्रभाग के शीशमहल, राजपुरा, सद्भाव, लालकुआं खनन प्रभाग के लालकुआं और शांतिपुरी गेट को खोला गया है। यहां पर करीब 3000 हजार मजदूर ही काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सात गेटों पर पंजीकृत 5300 वाहन आरबीएम की कमी के कारण खडे़ हो गए हैं।
एक माह पहले ही लौट गए 5000 मजदूर
गौला के सात गेट बंद होने का असर, बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूर लौटे
गौला के रेत की डिमांड घटी, दाम भी कम हो गए
गौला नदी के रेत में मिट्टी आने के कारण यहां के रेत की डिमांड कम हो गई है। इसी कारण स्टोन क्रशरों की गिट्टी और रेत के दाम में कमी आई है। इसी वजह से हल्द्वानी और लालकुआं के 19 स्टोन क्रशरों का कारोबार भी प्रभावित हो गया है। मार्च तक हल्द्वानी और लालकुआं के स्टोन क्रशरों की रेत के दाम 120 रुपये क्विंटल थे। जबकि गिट्टी का दाम 110 रुपये प्रति क्विंटल थे। अब आरबीएम में मिट्टी आने के कारण रेत के दाम 90 से 95 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया जबकि गिट्टी का दाम 90 रुपये प्रति क्विंटल तक है। कुमाऊं स्टोन क्रशर एसोसिएशन के सचिव सुनील तलवार ने बताया कि गौला के आरबीएम में मिट्टी के कारण स्टोन क्रशरों को ग्राहक कम मिल रहे हैं। इसी कारण आरबीएम और गिट्टी के दाम पहले से कम हो गए हैं।
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बाजपुर के रेत की डिमांड बढ़ी
इस बार बाजपुर के रेत की डिमांड बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि बाजपुर क्षेत्र में साफ आरबीएम आ निकल रहा है और इसका दाम भी कम है। इस क्षेत्र में रेत के दाम 60 रुपये प्रति क्विंटल हैं। सूत्रों के मुताबिक बाजपुर का रेता बरेली पहुंचने के बाद 90 रुपये प्रति क्विंटल पड़ रहा है जबकि हल्द्वानी का रेता 90 रुपये प्रति क्विंटल है। इसकी क्वालिटी भी खराब है।
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गौला नदी में वन निगम खनन कराता है। नदी में शीशमहल, राजपुरा, इंदिरानगर, गोरापड़ाव, बेरीपड़ाव, हल्दूचौड़, मोटाहल्दू, देवरामपुर, लालकुआं, शांतिपुरी और सद्भाव कंपनी गेट से आरबीएम निकासी होती है। इस बार फरवरी में ही आरबीएम में मिट्टी आने की शिकायत पर वन निगम ने भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों से गौला नदी के गेटों की जांच कराई थी। वैज्ञानिकों ने गौला में 34.50 लाख घनमीटर आरबीएम निकासी का सुझाव दिया था। सात गेटों में आरबीएम की कमी के कारण वन निगम ने 28 अप्रैल से बंद कर दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के करीब पांच हजार मजदूर अपने घर लौट गए। हल्द्वानी खनन प्रभाग के शीशमहल, राजपुरा, सद्भाव, लालकुआं खनन प्रभाग के लालकुआं और शांतिपुरी गेट को खोला गया है। यहां पर करीब 3000 हजार मजदूर ही काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सात गेटों पर पंजीकृत 5300 वाहन आरबीएम की कमी के कारण खडे़ हो गए हैं।
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एक माह पहले ही लौट गए 5000 मजदूर
गौला के सात गेट बंद होने का असर, बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूर लौटे
गौला के रेत की डिमांड घटी, दाम भी कम हो गए
गौला नदी के रेत में मिट्टी आने के कारण यहां के रेत की डिमांड कम हो गई है। इसी कारण स्टोन क्रशरों की गिट्टी और रेत के दाम में कमी आई है। इसी वजह से हल्द्वानी और लालकुआं के 19 स्टोन क्रशरों का कारोबार भी प्रभावित हो गया है। मार्च तक हल्द्वानी और लालकुआं के स्टोन क्रशरों की रेत के दाम 120 रुपये क्विंटल थे। जबकि गिट्टी का दाम 110 रुपये प्रति क्विंटल थे। अब आरबीएम में मिट्टी आने के कारण रेत के दाम 90 से 95 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया जबकि गिट्टी का दाम 90 रुपये प्रति क्विंटल तक है। कुमाऊं स्टोन क्रशर एसोसिएशन के सचिव सुनील तलवार ने बताया कि गौला के आरबीएम में मिट्टी के कारण स्टोन क्रशरों को ग्राहक कम मिल रहे हैं। इसी कारण आरबीएम और गिट्टी के दाम पहले से कम हो गए हैं।
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बाजपुर के रेत की डिमांड बढ़ी
इस बार बाजपुर के रेत की डिमांड बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि बाजपुर क्षेत्र में साफ आरबीएम आ निकल रहा है और इसका दाम भी कम है। इस क्षेत्र में रेत के दाम 60 रुपये प्रति क्विंटल हैं। सूत्रों के मुताबिक बाजपुर का रेता बरेली पहुंचने के बाद 90 रुपये प्रति क्विंटल पड़ रहा है जबकि हल्द्वानी का रेता 90 रुपये प्रति क्विंटल है। इसकी क्वालिटी भी खराब है।