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एंबुलेंसकर्मियों की संवेदनहीनता ने ले ली मरीज की जान
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अल्मोड़ा। पहाड़ में मरीजों की जान भगवान भरोसे है। एक तो यहां के किसी भी अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं, ऊपर से संवेदनहीन तंत्र रही सही कसर पूरी कर रहा है। दूर-दराज के मरीजों को तुरंत अस्पताल तक पहुंचाने की गरज से शुरू की गई आपात एंबुलेंस सेवा 108 खुद ही मरीजों की जान लेने पर तुली हुई है। इनके कुछ कर्मियों की मानवता को कलंकित करने वाली हरकतों से इंसानियत के साथ ही मरीज भी दम तोड़ रहे हैं।
एंबुलेंस सेवा में लगे कर्मियों पर किसी का नियंत्रण नहीं। मरीजों के परिजनों से पैसे ऐंठने की शिकायत आम है। जिनसे ये पैसा नहीं ऐंठ सकते, उनको अपनी तिकड़मों से परेशान करके ही नहीं रखते बल्कि मरीज की जान पर भी खेल जाते हैं। एक पत्रकार को भी ऐसे ही संवेदनहीन एंबुलेंस कर्मियों के कारण अपनी मां को खोना पड़ा है।
पत्रकार अमित उप्रेती की मां निर्मला उप्रेती को बृहस्पतिवार शाम घर के पास ही गिर जाने से सिर पर गंभीर चोट लगी। उनको बृहस्पतिवार रात बेस अस्पताल लाया गया।
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चारों पर्वतीय जिलों के इस तथाकथित सबसे बड़े अस्पताल में उनके इलाज के लायक सुविधा नहीं थी तो लाचार डॉक्टर ने उन्हें हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद किसी तरह 108 एंबुलेंस की व्यवस्था कर उनको हल्द्वानी ले जाया जाने लगा। निर्मला उप्रेती की हालत नाजुक थी और डॉक्टर ने एंबुलेंस कर्मियों के सामने ही उनको जितनी जल्दी हो सके हल्द्वानी अस्पताल ले जाने को कहा था। मरीज की जान के लिए एक-एक पल कीमती है यह जानते हुए भी एंबुलेंस कर्मियों ने छड़ा के पास भोजन करने के लिए एंबुलेंस रोक ली।
उनकी इस हरकत पर मरीज के परिजन मन मसोस कर रह गए। एंबुलेंस कर्मियों ने भवाली जाकर वाहन के टायर बैठने की बात कहकर 20 मिनट वहां एंबुलेंस खड़ी कर दी और कहने लगे कि दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ेगी। मां को मरता देख रहा बेटा उनकी इस हरकत पर रो दिया, वह एंबुलेंस कर्मियों के आगे गिड़गिड़ाया तो वे एहसान कर उसी वाहन से मरीज को हल्द्वानी ले गए, जिसे वह खराब बता रहे थे। इस तरह करीब एक घंटे बाद मरीज को सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया जा सका। तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टर इलाज शुरू कर ही रहे थे कि निर्मला उप्रेती ने दम तोड़ दिया।
उधर जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बृहस्पतिवार को 108 एंबुलेंस कर्मियों द्वारा पत्रकार अमित उप्रेती की माता को गंभीर हालत में हल्द्वानी ले जाने के दौरान रास्ते में अनावश्यक विलंब करने के मामले की जांच मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विनीता साह को सौंप दी है और एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। इससे पहले पत्रकारों ने बैठक की और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर दोषी 108 कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
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एंबुलेंस सेवा में लगे कर्मियों पर किसी का नियंत्रण नहीं। मरीजों के परिजनों से पैसे ऐंठने की शिकायत आम है। जिनसे ये पैसा नहीं ऐंठ सकते, उनको अपनी तिकड़मों से परेशान करके ही नहीं रखते बल्कि मरीज की जान पर भी खेल जाते हैं। एक पत्रकार को भी ऐसे ही संवेदनहीन एंबुलेंस कर्मियों के कारण अपनी मां को खोना पड़ा है।
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पत्रकार अमित उप्रेती की मां निर्मला उप्रेती को बृहस्पतिवार शाम घर के पास ही गिर जाने से सिर पर गंभीर चोट लगी। उनको बृहस्पतिवार रात बेस अस्पताल लाया गया।
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चारों पर्वतीय जिलों के इस तथाकथित सबसे बड़े अस्पताल में उनके इलाज के लायक सुविधा नहीं थी तो लाचार डॉक्टर ने उन्हें हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद किसी तरह 108 एंबुलेंस की व्यवस्था कर उनको हल्द्वानी ले जाया जाने लगा। निर्मला उप्रेती की हालत नाजुक थी और डॉक्टर ने एंबुलेंस कर्मियों के सामने ही उनको जितनी जल्दी हो सके हल्द्वानी अस्पताल ले जाने को कहा था। मरीज की जान के लिए एक-एक पल कीमती है यह जानते हुए भी एंबुलेंस कर्मियों ने छड़ा के पास भोजन करने के लिए एंबुलेंस रोक ली।
उनकी इस हरकत पर मरीज के परिजन मन मसोस कर रह गए। एंबुलेंस कर्मियों ने भवाली जाकर वाहन के टायर बैठने की बात कहकर 20 मिनट वहां एंबुलेंस खड़ी कर दी और कहने लगे कि दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ेगी। मां को मरता देख रहा बेटा उनकी इस हरकत पर रो दिया, वह एंबुलेंस कर्मियों के आगे गिड़गिड़ाया तो वे एहसान कर उसी वाहन से मरीज को हल्द्वानी ले गए, जिसे वह खराब बता रहे थे। इस तरह करीब एक घंटे बाद मरीज को सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया जा सका। तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टर इलाज शुरू कर ही रहे थे कि निर्मला उप्रेती ने दम तोड़ दिया।
उधर जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बृहस्पतिवार को 108 एंबुलेंस कर्मियों द्वारा पत्रकार अमित उप्रेती की माता को गंभीर हालत में हल्द्वानी ले जाने के दौरान रास्ते में अनावश्यक विलंब करने के मामले की जांच मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विनीता साह को सौंप दी है और एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। इससे पहले पत्रकारों ने बैठक की और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर दोषी 108 कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।